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UPSC Mains अभ्यास · GS Paper 1

अभ्यास प्रश्न 19

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10 अंक150 शब्दबौद्ध और जैन स्थापत्य

प्रश्न

प्रायद्वीपीय भारत (दक्कन और दक्षिण भारत) में जैन गुफाओं, बसदियों और एकाश्म प्रतिमाओं के विकास में चालुक्य, गंग, राष्ट्रकूट और पांड्य शासकों के योगदान का मूल्यांकन कीजिए।

प्रश्न की मांग

उत्तर व पश्चिम भारत से अलग, कर्नाटक, महाराष्ट्र और तमिलनाडु में विकसित जैन स्थापत्य (बादामी, ऐहोल, एलोरा, श्रवणबेलगोला, सित्तनवासल, मुदबिद्री) पर प्रकाश डालना।

भूमिका की दिशा

भद्रबाहु और चंद्रगुप्त मौर्य के दक्षिण प्रवास के बाद से ही प्रायद्वीपीय भारत (विशेषकर कर्नाटक और तमिल देश) दिगंबर जैन धर्म और स्थापत्य का एक प्रमुख गढ़ बन गया, जिसे क्षेत्रीय राजवंशों ने उदार संरक्षण दिया।

उत्तर-लेखन रूपरेखा

  • प्रारंभिक चालुक्य संरक्षण (कर्नाटक): बादामी की गुफा संख्या 4 (महावीर, पार्श्वनाथ और बाहुबली के शिल्प) तथा ऐहोल का 'मेगुती जैन मंदिर' (634 ई., रविकीर्ति द्वारा निर्मित, जिस पर पुलकेशिन द्वितीय की प्रसिद्ध ऐहोल प्रशस्ति उत्कीर्ण है)।
  • राष्ट्रकूट संरक्षण (महाराष्ट्र व कर्नाटक): राष्ट्रकूट शासक अमोघवर्ष प्रथम के काल में जैन धर्म फला-फूला और एलोरा में गुफा 30–34 (छोटा कैलाश, इंद्रसभा और जगन्नाथ सभा) तथा पट्टदकल का जैन नारायण मंदिर निर्मित हुआ।
  • पश्चिमी गंग और होयसल संरक्षण (श्रवणबेलगोला व बसदियाँ): गंग मंत्री चामुंडराय ने श्रवणबेलगोला में चंद्रगिरि पर चामुंडराय बसदि और विंध्यगिरि पर 57 फीट ऊँची गोम्मटेश्वर बाहुबली की एकाश्म प्रतिमा (981–983 ई.) बनवाई; बाद में करकला और वेणूर में भी विशाल बाहुबली प्रतिमाएँ तथा हलेबिदु व मुदबिद्री (हजार स्तंभों वाली 'त्रिभुवन तिलक चूड़ामणि बसदि') का निर्माण हुआ।
  • तमिल क्षेत्र में पल्लव-पांड्य संरक्षण: पुदुक्कोट्टई की 'सित्तनवासल गुफा' (अरिवर कोविल) के समवसरण भित्ति-चित्र, मदुरै की समानार पहाड़ियाँ और तिरुमलाई के जैन गुफा मंदिर।

उपयोगी उदाहरण

मेगुती मंदिर (ऐहोल), एलोरा की इंद्रसभा, श्रवणबेलगोला की बाहुबली प्रतिमा, सित्तनवासल गुफा और मुदबिद्री की हजार स्तंभ बसदि।

निष्कर्ष की दिशा

दक्षिण भारत के जैन स्थापत्य ने द्रविड़ और वेसर मंदिर शैलियों को दिगंबर जैन सादगी और एकाश्म भव्यता के साथ जोड़कर एक अनूठी क्षेत्रीय पहचान दी।