अभ्यास प्रश्न 13
प्रश्न
कुषाण और गुप्त काल में विकसित बौद्ध मूर्तिकला की तीन प्रमुख शैलियों—गांधार, मथुरा और सारनाथ—की तुलना कीजिए। किस प्रकार सारनाथ शैली ने भारतीय शास्त्रीय कला के आध्यात्मिक आदर्श को पूर्णता प्रदान की?
प्रश्न की मांग
गांधार, मथुरा और सारनाथ की सामग्री, मुखाकृति, वस्त्र-विन्यास, प्रभामंडल और आध्यात्मिक भाव की तुलना करना।
भूमिका की दिशा
प्रथम से छठी शताब्दी ईस्वी के बीच बुद्ध की मानवाकार प्रतिमा का विकास गांधार के यूनानी-रोमन यथार्थवाद और मथुरा की स्वदेशी ऊर्जा से होता हुआ गुप्तकालीन सारनाथ की आध्यात्मिक प्रशांति में अपने शिखर पर पहुँचा।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
- सामग्री और क्षेत्र: गांधार (पश्चिमोत्तर) में नीला-भूरा शिस्ट व स्टुको; मथुरा में चित्तीदार लाल बलुआ पत्थर; और सारनाथ में चुनार का हल्का पीला-भूरा (Buff) बलुआ पत्थर।
- शारीरिक बनावट और वस्त्र-विन्यास: गांधार में मांसल शरीर और मोटी सिलवटों वाला रोमन टोगा-सदृश वस्त्र; मथुरा में चौड़े कंधे (यक्ष-प्रभाव) और बाएँ कंधे पर पतली रेखाओं वाली संघाटी; जबकि सारनाथ में छरहरा शरीर और पूरी तरह सिलवट-रहित पारदर्शी (Wet drapery) वस्त्र।
- प्रभामंडल (Halo): गांधार में सादा गोलाकार प्रभामंडल; मथुरा में अर्धचंद्राकार दांतों (Scalloped) वाला प्रभामंडल; जबकि सारनाथ में किनारे पर अत्यंत सूक्ष्म पद्म-लताओं से अलंकृत विशाल प्रभामंडल।
- सारनाथ में आध्यात्मिक पूर्णता: सारनाथ की धर्मचक्रप्रवर्तन बुद्ध प्रतिमा में बाहरी शारीरिक शक्ति या विदेशी प्रभाव पूरी तरह विलीन हो जाते हैं—अर्ध-मुँदे कमलाकार नेत्र, शांत मुस्कान और कोमल उँगलियाँ बुद्ध की आंतरिक प्रज्ञा और समाधि को जीवंत कर देती हैं।
उपयोगी उदाहरण
तक्षशिला/पेशावर के गांधार बुद्ध, कटरा टीला (मथुरा) के पद्मासन बुद्ध, और सारनाथ संग्रहालय की धर्मचक्रप्रवर्तन बुद्ध प्रतिमा।
निष्कर्ष की दिशा
सारनाथ शैली ने भारतीय कला के उस मानक को स्थापित किया जिसने आगे अजंता और दक्षिण-पूर्व एशिया की संपूर्ण बौद्ध मूर्तिकला को दिशा दी।