LIVEUPSC CSE 2027 & BPSC • नोट्स • समसामयिकी • PYQ • Tests
UPSC Mains अभ्यास · GS Paper 1

अभ्यास प्रश्न 9

हिंदी आवाज़ तैयार हो रही है…
10 अंक150 शब्दबौद्ध और जैन स्थापत्य

प्रश्न

कलिंग नरेश खारवेल के संरक्षण में विकसित ओडिशा की 'उदयगिरि और खंडगिरि' की जैन गुफाओं की प्रमुख स्थापत्य और कलात्मक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

प्रश्न की मांग

उदयगिरि-खंडगिरि गुफाओं की आवासीय प्रकृति, स्थापत्य विन्यास, प्रमुख गुफाओं (रानी गुम्फा, हाथीगुम्फा, गणेश गुम्फा) और उनके ऐतिहासिक महत्त्व का विश्लेषण करना।

भूमिका की दिशा

प्रथम शताब्दी ईसा पूर्व में कलिंग के महामेघवाहन (चेदि) शासक खारवेल के काल में भुवनेश्वर के निकट उदयगिरि (18 गुफाएँ) और खंडगिरि (15 गुफाएँ) पहाड़ियों में उत्कीर्ण गुफाएँ पूर्वी भारत में जैन शैलकृत स्थापत्य का प्राचीनतम और सर्वोत्कृष्ट उदाहरण हैं।

उत्तर-लेखन रूपरेखा

  • जैन मुनि-निवास (निसीदिया) के रूप में विशिष्ट योजना: पश्चिमी दक्कन की बौद्ध गुफाओं के विपरीत यहाँ कोई गजपृष्ठाकार 'चैत्यगृह' नहीं है; ये गुफाएँ जैन श्रमणों की कठोर तपश्चर्या और वर्षावास के लिए बनीं। कोठरियों के द्वार अत्यंत छोटे हैं (ताकि झुककर विनम्रता से प्रवेश किया जाए) और भीतर का फर्श सिरहाने की ओर ढलानदार (तकिये की तरह ऊँचा) है।
  • बहुमंजिला और प्रांगण-युक्त स्थापत्य: 'रानी गुम्फा' (उदयगिरि गुफा 1) तीन ओर से खुली हुई एक भव्य दोमंजिला संरचना है जिसके मध्य में नाट्य/सत्संग हेतु खुला प्रांगण है।
  • पशु-आधारित प्रवेश द्वार: 'बाघ गुम्फा' (गुफा 12) का प्रवेश द्वार दहाड़ते हुए बाघ के खुले जबड़े के रूप में तराशा गया है।
  • जीवंत उभारदार मूर्तिकला और प्रतीकवाद: रानी गुम्फा, गणेश गुम्फा और अनंत गुम्फा के बरामदों में द्वारपालों, वन्य दृश्यों, नृत्य-संगीत, गजलक्ष्मी, सूर्य और जैन मांगलिक चिह्नों (नंदिपाद, स्वस्तिक, वृक्ष-चैत्य) का सजीव उत्कीर्णन है।
  • अभिलेखीय महत्त्व: हाथीगुम्फा (गुफा 14) का 17 पंक्तियों वाला प्राकृत अभिलेख खारवेल के 13 वर्षों के शासन, नहर विस्तार और 'कलिंग-जिन' प्रतिमा की वापसी का ऐतिहासिक दस्तावेज है।

उपयोगी उदाहरण

हाथीगुम्फा, रानी गुम्फा, गणेश गुम्फा, बाघ गुम्फा और अनंत गुम्फा।

निष्कर्ष की दिशा

उदयगिरि-खंडगिरि की गुफाएँ कलिंग की क्षेत्रीय कला शैली और प्रारंभिक जैन तपोवन स्थापत्य के अनूठे सामंजस्य को प्रदर्शित करती हैं।