LIVEUPSC CSE 2027 & BPSC • नोट्स • समसामयिकी • PYQ • Tests
UPSC Mains अभ्यास · GS Paper 1

अभ्यास प्रश्न 6

हिंदी आवाज़ तैयार हो रही है…
10 अंक150 शब्दबौद्ध और जैन स्थापत्य

प्रश्न

भारतीय शैलकृत वास्तुकला के उदय में मौर्यकालीन 'बाराबर और नागार्जुनी गुफाओं' के स्थापत्य और सांस्कृतिक महत्त्व का मूल्यांकन कीजिए।

प्रश्न की मांग

बाराबर गुफाओं को भारतीय शैलकृत परंपरा के जनक (Prototype) के रूप में स्थापित करना, काष्ठ से प्रस्तर अनुकरण व मौर्य पॉलिश को समझाना, और आजीवक संरक्षण के माध्यम से मौर्य धार्मिक सहिष्णुता को रेखांकित करना।

भूमिका की दिशा

बिहार के जहानाबाद जिले की बाराबर और नागार्जुनी पहाड़ियों में तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में उत्कीर्ण सात गुफाएँ भारतीय उपमहाद्वीप में शैलकृत वास्तुकला (Rock-cut architecture) का प्रारंभ बिंदु हैं।

उत्तर-लेखन रूपरेखा

  • तकनीकी नवाचार: भारत की सबसे कठोर आग्नेय चट्टान (ग्रेनाइट) को तराशकर भीतर से दर्पण जैसी चमकदार 'मौर्य पॉलिश' करना और उत्कृष्ट प्रतिध्वनि (Acoustics) पैदा करना उच्च मौर्य अभियांत्रिकी का प्रमाण है।
  • काष्ठ वास्तुकला का प्रस्तर में रूपांतरण: लोमस ऋषि गुफा का गजपृष्ठाकार प्रवेश-मेहराब (जिस पर हाथियों द्वारा स्तूप पूजा उत्कीर्ण है) और सुदामा गुफा का वृत्ताकार झोपड़ीनुमा कक्ष लकड़ी व फूस की वास्तुकला को पत्थर में उतारने का प्रथम सफल प्रयोग था।
  • परवर्ती बौद्ध स्थापत्य का प्रोटोटाइप: लोमस ऋषि गुफा का मेहराब ही आगे चलकर भाजा, कार्ले और अजंता के 'चैत्य-वातायन' (चंद्रशाला) तथा सुदामा गुफा की योजना चैत्यगृहों का आधार बनी।
  • सांस्कृतिक एवं राजनीतिक महत्त्व: स्वयं बौद्ध होते हुए भी सम्राट अशोक और दशरथ द्वारा मक्खलि गोसाल के 'आजीवक संप्रदाय' के भिक्षुओं को ये गुफाएँ दान देना मौर्य राज्य की पंथनिरपेक्ष और बहुलतावादी 'धम्म' नीति को सिद्ध करता है।

उपयोगी उदाहरण

लोमस ऋषि गुफा का प्रवेश द्वार, सुदामा गुफा (अशोक के 12वें राजवर्ष का अभिलेख), और नागार्जुनी की गोपिका गुफा (दशरथ का अभिलेख)।

निष्कर्ष की दिशा

बाराबर गुफाओं ने भारतीय वास्तुकला को नाशवान लकड़ी से निकालकर शाश्वत चट्टानों में अमरता प्रदान करने की दिशा दिखाई।