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UPSC Mains अभ्यास · GS Paper 1

अभ्यास प्रश्न 3

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15 अंक250 शब्दबौद्ध और जैन स्थापत्य

प्रश्न

"पश्चिमी दक्कन का बौद्ध शैलकृत गुफा स्थापत्य केवल भिक्षुओं के एकांतवास की खोज नहीं था, बल्कि यह प्राचीन व्यापारिक मार्गों, शहरीकरण और वणिक श्रेणियों के आर्थिक नेटवर्क के साथ गहराई से जुड़ा हुआ था।" परीक्षण कीजिए।

प्रश्न की मांग

यह सिद्ध करना कि भाजा, कार्ले, नासिक, जुन्नर और कन्हेरी जैसी गुफाएँ निर्जन जंगलों में न होकर व्यापारिक दर्रों और बंदरगाहों के पास क्यों बनीं और विहारों व व्यापारियों के बीच कैसा सहजीवी (Symbiotic) संबंध था।

भूमिका की दिशा

दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व से तीसरी शताब्दी ईस्वी के मध्य पश्चिमी घाट (सह्याद्रि) की बेसाल्ट चट्टानों में उत्कीर्ण सैकड़ों बौद्ध गुफाओं का भूगोल वास्तव में सातवाहन-क्षत्रप काल के हिंद-रोमन व्यापार और दक्षिणापथ के व्यापारिक मार्गों के मानचित्र से मेल खाता है।

उत्तर-लेखन रूपरेखा

  • रणनीतिक व्यापारिक दर्रों पर अवस्थिति: दक्कन के भीतरी नगरों (पैठण, तगर, नासिक) को पश्चिमी तट के बंदरगाहों (सोपारा, कल्याण, भड़ौच, चौल) से जोड़ने वाले दर्रों—नानेघाट (जुन्नर गुफाएँ), भोरघाट (कार्ले, भाजा, बेडसा) और थालघाट (नासिक पांडुलेना)—पर ही ये गुफाएँ केंद्रित थीं।
  • व्यापारियों और श्रेणियों द्वारा वित्तपोषण: वैदिक वर्ण-व्यवस्था की तुलना में बौद्ध धर्म ने वाणिज्य और सूदखोरी को नैतिक वैधता दी। परिणामस्वरूप सार्थवाहों, श्रेष्ठियों और शिल्पकार श्रेणियों ने अपनी व्यापारिक समृद्धि का बड़ा हिस्सा चैत्यों और विहारों के निर्माण में लगाया।
  • श्रेणियों की बैंकिंग भूमिका ('अक्षय-नीवी'): शासक और धनी दानदाता भिक्षुओं के वस्त्र और भोजन के लिए बुनकरों या तिल-पीसने वालों की श्रेणियों के पास स्थायी मूलधन (अक्षय-नीवी) जमा करते थे, जिसके ब्याज से संघ का खर्च चलता था।
  • व्यापारिक काफिलों के लिए विहारों की उपयोगिता: ये गुफा-विहार दुर्गम पहाड़ी रास्तों में व्यापारिक काफिलों को सुरक्षित विश्राम-स्थल, पेयजल (कन्हेरी के जल-कुंड), चिकित्सा और साख-पत्रों की सुविधा देते थे।
  • अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक समावेशन: पश्चिमी तट के व्यापार में सक्रिय विदेशी 'यवन' (इंडो-ग्रीक/रोमन) व्यापारियों ने भी इन भारतीय गुफाओं को दान देकर स्थानीय समाज में अपनी स्वीकार्यता बनाई।

उपयोगी उदाहरण

कार्ले चैत्य का निर्माता वैजयंती का श्रेष्ठि 'भूतपाल' व धेनुकाकटक के यवन दानदाता; नासिक गुफा 10 में उषवदात द्वारा बुनकर श्रेणी में 2,000 कार्षापण का निवेश; और सोपारा बंदरगाह के पास कन्हेरी की 109 गुफाएँ।

निष्कर्ष की दिशा

इस प्रकार पश्चिमी दक्कन के चैत्य और विहार आध्यात्मिक केंद्र होने के साथ-साथ प्राचीन भारत के आर्थिक और व्यापारिक राजमार्गों के संस्थागत स्तंभ भी थे।