वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 37
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721–740 / 4666 प्रश्न
प्रश्न-संग्रह
प्रश्न खोलकर हल करें1931–1932 में केरल में चले 'गुरुवायूर सत्याग्रह' (Guruvayur Satyagraha) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह प्रसिद्ध गुरुवायूर क…
1931–1932 में केरल में चले 'गुरुवायूर सत्याग्रह' (Guruvayur Satyagraha) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह प्रसिद्ध गुरुवायूर कृष्ण मंदिर में सभी जातियों के हिंदुओं को प्रवेश दिलाने के लिए केरल प्रांतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा शुरू किया गया था। 2. के. केलप्पन ('केरल के गांधी') ने मंदिर के द्वार खुलवाने के लिए आमरण अनशन किया, जिसे बाद में गांधीजी के अनुरोध पर समाप्त किया गया। 3. युवा कांग्रेस नेता पी. कृष्ण पिल्लई और ए.के. गोपालन (जो बाद में प्रमुख कम्युनिस्ट नेता बने) ने इस आंदोलन में अग्रणी भूमिका निभाई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। 1931–32 का गुरुवायूर सत्याग्रह कृष्ण मंदिर प्रवेश के लिए था। के. केलप्पन ने अनशन किया। पी. कृष्ण पिल्लई और ए.के. गोपालन ने लाठियां खाकर नेतृत्व किया।
1932 के ऐतिहासिक 'पूना पैक्ट' (Poona Pact) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह समझौता यरवदा जेल (पुणे) में महात्मा गांधी के आमरण…
1932 के ऐतिहासिक 'पूना पैक्ट' (Poona Pact) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह समझौता यरवदा जेल (पुणे) में महात्मा गांधी के आमरण अनशन के दबाव में डॉ. अंबेडकर और सवर्ण हिंदू नेताओं (मदन मोहन मालवीय आदि) के बीच हुआ था। 2. इसके तहत रैम्से मैकडोनाल्ड के 'सांप्रदायिक पंचाट' (Communal Award) में दलितों को दिए गए 'पृथक निर्वाचक मंडल' (Separate Electorates) को त्याग दिया गया। 3. इसके बदले प्रांतीय विधानमंडलों में दलितों के लिए आरक्षित सीटों की संख्या 71 से बढ़ाकर 147 कर दी गई तथा केंद्रीय विधायिका में 18% सीटें आरक्षित की गईं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। 24 सितंबर 1932 को पूना पैक्ट हुआ। पृथक निर्वाचक मंडल त्याग दिया गया और सामान्य सीटों में दलितों के लिए सीटें 71 से बढ़ाकर 147 की गईं तथा केंद्रीय विधायिका में 18% आरक्षण मिला।
1932 में अखिल भारतीय हरिजन संघ की स्थापना किसने की?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- हरिजन सेवक संघ की स्थापना 1932 में गांधीजी की पहल से हुई।
1932 में पूना पैक्ट के तुरंत बाद महात्मा गांधी द्वारा अस्पृश्यता निवारण के लिए स्थापित संस्था और पत्रिका का नाम क्या था?
1932 में पूना पैक्ट के तुरंत बाद महात्मा गांधी द्वारा अस्पृश्यता निवारण के लिए स्थापित संस्था और पत्रिका का नाम क्या था?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (a) सही है। 1932 में गांधीजी ने 'अखिल भारतीय अस्पृश्यता विरोधी लीग' (बाद में हरिजन सेवक संघ) बनाई और 1933 में 'हरिजन' साप्ताहिक पत्रिका शुरू की।
1936 में डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा स्थापित राजनीतिक दल का नाम क्या था जिसने 1937 के बंबई प्रांतीय चुनावों में शानदार सफलता प्राप्त की थी?
1936 में डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा स्थापित राजनीतिक दल का नाम क्या था जिसने 1937 के बंबई प्रांतीय चुनावों में शानदार सफलता प्राप्त की थी?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (a) सही है। 1936 में डॉ. अंबेडकर ने 'इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी' (स्वतंत्र लेबर पार्टी) बनाई, जिसने 1937 के चुनावों में बंबई विधानसभा की 17 में से 14 आरक्षित व सामान्य सीटें जीतीं।
1937 में पारित 'हिंदू महिला संपत्ति अधिकार अधिनियम' (Hindu Women's Rights to Property Act, 1937 / देशमुख अधिनियम) का मुख्य प्रावधान क्या था?
1937 में पारित 'हिंदू महिला संपत्ति अधिकार अधिनियम' (Hindu Women's Rights to Property Act, 1937 / देशमुख अधिनियम) का मुख्य प्रावधान क्या था?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (a) सही है। 1937 के देशमुख कानून ने हिंदू विधवा को अपने मृत पति की संपत्ति में पुत्र के बराबर हिस्सा पाने का अधिकार दिया, यद्यपि यह सीमित जीवन पर्यंत अधिकार था।
1939 में, सुभाष चन्द्र बोस द्वारा फॉरवर्ड ब्लॉक के गठन के लिए निम्नलिखित में से कौन-से कारकों का योगदान रहा? बोस, महात्मा गांधी का विश्वास जीतने …
- बोस, महात्मा गांधी का विश्वास जीतने में विफल रहे।
- कांग्रेसी वामपंथियों में एकता नहीं थी और वे बोस को समर्थन देने में विफल रहे।
- साम्यवादियों ने बोस के प्रयासों का समर्थन नहीं किया।
- एम. एन. रॉय के समर्थक और जयप्रकाश नारायण जैसे समाजवादी नेताओं ने बोस को समर्थन देने की अपेक्षा कांग्रेस की एकता को वरीयता दी।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
उत्तर और पूरी व्याख्या
कथनवार विश्लेषण
- 1 सही: 1939 के कांग्रेस अध्यक्षीय संकट में बोस और गांधी-समर्थित नेतृत्व के बीच गंभीर मतभेद बने रहे।
- 2 सही: कांग्रेस का वाम पक्ष एक संगठित, एकमत खेमे के रूप में बोस के पीछे नहीं खड़ा हो पाया।
- 3 को गलत माना गया: साम्यवादियों के रुख को पूरे घटनाक्रम में एकसमान ‘समर्थन नहीं किया’ कहना अत्यधिक व्यापक है; 1939 के अध्यक्षीय चुनाव में बोस को कम्युनिस्ट समर्थन मिला था।
- 4 सही: समाजवादी और एम. एन. रॉय से जुड़े समूहों के एक हिस्से ने कांग्रेस की एकता को प्राथमिकता दी।
1940 के व्यक्तिगत सत्याग्रह के तीसरे सत्याग्रही कौन थे?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- विनोबा भावे पहले और जवाहरलाल नेहरू दूसरे थे; तीसरे सत्याग्रही ब्रह्मदत्त थे।
1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह का प्रथम सत्याग्रही विनोबा भावे ने आंदोलन कहाँ से प्रारंभ किया?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- विनोबा भावे ने महाराष्ट्र के पवनार से व्यक्तिगत सत्याग्रह आरंभ किया।
1945–46 में दिल्ली के INA मुकदमों में बचाव पक्ष के वकील कौन थे?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- भूलाभाई देसाई ने INA अभियुक्तों की रक्षा में प्रमुख भूमिका निभाई।
1946 में भारत भेजे गए कैबिनेट मिशन का सदस्य कौन नहीं था?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- कैबिनेट मिशन में क्रिप्स, पेथिक-लॉरेन्स और ए. वी. अलेक्जेन्डर थे; रैम्जे मैक्डोनाल्ड नहीं।
1947 में पंजाब और बंगाल के लिए गठित दोनों सीमा आयोगों की अध्यक्षता किसने की?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- सिरिल रेडक्लिफ ने पंजाब और बंगाल दोनों Boundary Commissions की अध्यक्षता की।
1948 में स्थापित हिंद मजदूर सभा के संस्थापकों में कौन थे?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- हिंद मजदूर सभा की स्थापना में अशोक मेहता आदि समाजवादी ट्रेड यूनियन नेता प्रमुख थे।
19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में इतिहास के अध्ययन ने राष्ट्रवाद को किस प्रकार सहायता दी?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- इन तीनों प्रक्रियाओं ने औपनिवेशिक विमर्श का प्रतिवाद और राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में भूमिका निभाई।
19वीं शताब्दी के भारतीय पुनर्जागरण (Indian Renaissance) के उदय की परिस्थितियों और अंतर्निहित विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार की…
19वीं शताब्दी के भारतीय पुनर्जागरण (Indian Renaissance) के उदय की परिस्थितियों और अंतर्निहित विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पश्चिमी तार्किकता (Rationalism), मानवतावाद (Humanism) और प्रबोधनकालीन विचारों के प्रभाव ने भारतीय बुद्धिजीवियों को अपनी सामाजिक-धार्मिक परंपराओं का पुनर्मूल्यांकन करने के लिए प्रेरित किया। 2. सुधारकों ने सामाजिक कुरीतियों को समाप्त करने के लिए तर्क (Reason) और प्राचीन धर्मग्रंथों के सार दोनों का सहारा लिया। 3. इन सुधार आंदोलनों ने पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण की वकालत की और भारतीय सांस्कृतिक विरासत को पूरी तरह त्यागने का आह्वान किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
कथन 3 गलत है क्योंकि भारतीय सुधारकों ने पश्चिमी सभ्यता के अंधानुकरण को खारिज किया; उन्होंने आधुनिक तार्किकता और वैज्ञानिक दृष्टि को भारतीय सांस्कृतिक चेतना और दर्शन के साथ समन्वित करने का प्रयास किया। कथन 1 और 2 सही हैं।
19वीं शताब्दी में मध्य एशिया में ब्रिटिश और रूसी साम्राज्यों के बीच की भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को किस नाम से जाना जाता है?
19वीं शताब्दी में मध्य एशिया में ब्रिटिश और रूसी साम्राज्यों के बीच की भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता को किस नाम से जाना जाता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
विकल्प (a) सही है। 19वीं सदी में मध्य एशिया और अफगानिस्तान में प्रभाव स्थापित करने के लिए ब्रिटेन और रूस के बीच चली गुप्त कूटनीतिक और सैन्य प्रतिद्वंद्विता को 'द ग्रेट गेम' (The Great Game) कहा जाता है।
19वीं सदी के 'वहाबी आंदोलन' (Wahabi Movement) के भारतीय स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में इस आंदोलन की नींव रायबर…
19वीं सदी के 'वहाबी आंदोलन' (Wahabi Movement) के भारतीय स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में इस आंदोलन की नींव रायबरेली के सैयद अहमद बरेलवी ने रखी, जो दिल्ली के शाह वलीउल्लाह के विचारों से प्रभावित थे। 2. आंदोलन का मुख्य उद्देश्य भारत को 'दार-उल-हर्ब' (काफिरों का देश) से 'दार-उल-इस्लाम' में परिवर्तित करना था। 3. सैयद अहमद ने पश्चिमोत्तर सीमांत (पेशावर के निकट सिथाना) को अपना सैन्य केंद्र बनाया और प्रारंभ में सिखों के विरुद्ध जिहाद की घोषणा की। 4. 1849 में पंजाब के विलय के बाद वहाबियों का मुख्य निशाना ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी बन गई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
चारों कथन सही हैं। सैयद अहमद बरेलवी ने भारत में वहाबी आंदोलन शुरू किया। सिथाना में केंद्र बनाकर पहले सिखों और 1849 के बाद अंग्रेजों के खिलाफ जिहाद छेड़ा। 1831 में बालाकोट के युद्ध में सैयद अहमद शहीद हुए।
19वीं सदी के अंतिम वर्षों और 20वीं सदी के प्रारंभ में भारत में 'उग्र राष्ट्रवाद' (Militant Nationalism / Extremism) के उदय के मूल कारणों के संदर्…
19वीं सदी के अंतिम वर्षों और 20वीं सदी के प्रारंभ में भारत में 'उग्र राष्ट्रवाद' (Militant Nationalism / Extremism) के उदय के मूल कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 1892 के भारतीय परिषद अधिनियम की विफलता और संवैधानिक सुधारों की संकीर्ण सीमा ने युवा राष्ट्रवादियों को निराश कर दिया था। 2. 1896–1900 के बीच पड़े विनाशकारी अकालों और बंबई में फैले ब्यूबोनिक प्लेग के दौरान ब्रिटिश सरकार की संवेदनहीनता ने जन-आक्रोश को चरम पर पहुंचा दिया। 3. उदारवादी नेताओं की 'भिक्षावृत्ति' (Mendicancy) की राजनीति से असंतुष्ट होकर एक नए युवा वर्ग ने 'आत्म-सहायता' (Self-reliance) और प्रत्यक्ष राजनीतिक कार्रवाई का मार्ग अपनाया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कारण सही हैं। 1892 के अधिनियम की संकीर्णता, 1896-1900 के अकाल व पूना प्लेग में सरकारी संवेदनहीनता, तथा उदारवादियों की याचना नीति की विफलता ने उग्र राष्ट्रवाद के उदय की जमीन तैयार की।
19वीं सदी के उत्तरार्ध में प्रारंभिक राष्ट्रवादियों द्वारा ब्रिटिश शासन की 'आर्थिक आलोचना' (Economic Critique of Colonialism) के संदर्भ में निम्न…
19वीं सदी के उत्तरार्ध में प्रारंभिक राष्ट्रवादियों द्वारा ब्रिटिश शासन की 'आर्थिक आलोचना' (Economic Critique of Colonialism) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दादाभाई नौरोजी, न्यायमूर्ति महादेव गोविंद रानाडे और रमेश चंद्र दत्त (R.C. Dutt) ने औपनिवेशिक अर्थव्यवस्था का गहन वैज्ञानिक विश्लेषण प्रस्तुत किया। 2. उन्होंने सिद्ध किया कि भारत की भीषण गरीबी और निरंतर पड़ने वाले अकाल ईश्वर की देन या भारतीयों के आलस्य का परिणाम नहीं थे, बल्कि ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों और आर्थिक दोहन की सीधी उपज थे। 3. इस आर्थिक विश्लेषण ने ब्रिटिश दावों (कि ब्रिटिश शासन भारत का कल्याण और आधुनिकीकरण कर रहा है) की नैतिक वैधता को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। नौरोजी, रानाडे और आर.सी. दत्त ने आर्थिक आलोचना कर साबित किया कि भारतीय दरिद्रता औपनिवेशिक नीतियों की देन है, जिसने ब्रिटिश शासन की नैतिक वैधता समाप्त कर दी।
19वीं सदी के उत्तरार्ध में भारत में 'आधुनिक राष्ट्रवाद के उदय' (Rise of Modern Nationalism) के मूल कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार…
19वीं सदी के उत्तरार्ध में भारत में 'आधुनिक राष्ट्रवाद के उदय' (Rise of Modern Nationalism) के मूल कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश औपनिवेशिक हितों और भारतीय जनता के हितों के बीच का मूलभूत अंतर्विरोध (Basic contradiction) राष्ट्रवाद का मुख्य प्रेरक बल बना। 2. रेलवे, डाक-तार और एक समान कानूनी व्यवस्था द्वारा देश के प्रशासनिक और आर्थिक एकीकरण ने क्षेत्रीय सीमाओं को तोड़कर अखिल भारतीय चेतना को जन्म दिया। 3. अंग्रेजी भाषा और पश्चिमी शिक्षा ने विभिन्न भाषाई क्षेत्रों के शिक्षित भारतीयों को एक सामान्य बौद्धिक मंच और लोकतांत्रिक विचार प्रदान किए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। भारतीय जनता के हितों और औपनिवेशिक हितों के टकराव ने राष्ट्रीय चेतना को जन्म दिया। रेल, तार और साझा प्रशासनिक कानून ने देश को एकीकृत किया तथा अंग्रेजी भाषा ने विभिन्न प्रांतों के बुद्धिजीवियों के बीच संपर्क का साझा माध्यम प्रदान किया।