वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 143
एक सवाल हल कीजिए, उसका कारण समझिए, फिर आगे बढ़िए। करंट अफेयर्स, विषयवार अध्ययन और विगत वर्षों के प्रश्न अब एक जगह।
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विषय चुनकर शुरू करें। उत्तर के साथ व्याख्या पढ़ें और कठिन प्रश्न दोहराएँ।
2841–2860 / 4666 प्रश्न
प्रश्न-संग्रह
प्रश्न खोलकर हल करेंभारत में international treaties और domestic law के संबंध में कौन-सा कथन सबसे सही है?
भारत में international treaties और domestic law के संबंध में कौन-सा कथन सबसे सही है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
भारत में executive treaty-making और domestic enforceability अलग प्रश्न हैं। यदि treaty लागू करने के लिए मौजूदा कानून बदलना या विधायी अधिकारों पर प्रभाव डालना आवश्यक है, तो विधायी आधार चाहिए; न्यायालय कभी-कभी अस्पष्ट घरेलू कानून की व्याख्या अंतरराष्ट्रीय दायित्वों के अनुरूप भी करते हैं।
भारत में Judicial Activism और Public Interest Litigation के प्रारंभिक विकास से सर्वाधिक जुड़े दो न्यायाधीश कौन माने जाते हैं?
भारत में Judicial Activism और Public Interest Litigation के प्रारंभिक विकास से सर्वाधिक जुड़े दो न्यायाधीश कौन माने जाते हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (a) है। Justice V.R. Krishna Iyer और Justice P.N. Bhagwati ने locus standi को उदार बनाने, गरीब और वंचित व्यक्तियों की ओर से याचिकाएँ स्वीकार करने और epistolary jurisdiction जैसी प्रक्रियाओं से access to justice बढ़ाने में केंद्रीय भूमिका निभाई। उनके दौर में Article 21 और सामाजिक न्याय के अनेक मुद्दों पर न्यायपालिका ने अधिक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाया। हालांकि judicial activism का विकास अनेक न्यायाधीशों के योगदान से हुआ, इन दोनों के नाम शुरुआती भारतीय PIL आंदोलन से विशेष रूप से जुड़े हैं।
भारत में Judicial Activism के उभार के कारणों में निम्नलिखित में से कौन-से शामिल माने जाते हैं? 1. विधायिका/कार्यपालिका की निष्क्रियता या governan…
भारत में Judicial Activism के उभार के कारणों में निम्नलिखित में से कौन-से शामिल माने जाते हैं? 1. विधायिका/कार्यपालिका की निष्क्रियता या governance deficit। 2. मौलिक अधिकारों और कमजोर वर्गों के सामाजिक न्याय की रक्षा की आवश्यकता। 3. राजनीतिक संस्थाओं में जवाबदेही और आंतरिक लोकतंत्र की कमी। 4. प्रशासनिक भ्रष्टाचार तथा पर्यावरण/मानवाधिकार संरक्षण में सरकारी विफलताएँ। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (d) है। Judicial Activism का उभार किसी एक कारण से नहीं हुआ। शासन की निष्क्रियता, rights violations, गरीब वर्गों की न्याय तक कमजोर पहुँच, पर्यावरणीय संकट और प्रशासनिक भ्रष्टाचार ने अदालतों के सामने अधिक हस्तक्षेप की माँग पैदा की। साथ ही PIL ने procedural barriers कम किए। फिर भी activism की वैधता हर मामले में अलग प्रश्न है—न्यायपालिका को अधिकार-सुरक्षा करते समय separation of powers और संस्थागत क्षमता की सीमाओं का भी ध्यान रखना पड़ता है।
भारत में PIL के प्रारंभिक विकास से जुड़ा वह प्रसिद्ध मामला कौन-सा है जिसमें undertrial prisoners के speedy trial और स्वतंत्रता के प्रश्न को उठाया…
भारत में PIL के प्रारंभिक विकास से जुड़ा वह प्रसिद्ध मामला कौन-सा है जिसमें undertrial prisoners के speedy trial और स्वतंत्रता के प्रश्न को उठाया गया?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (a) है। Hussainara Khatoon series (1979) को भारत की शुरुआती और सबसे प्रभावशाली PIL proceedings में गिना जाता है। बिहार की जेलों में वर्षों से विचाराधीन कैदियों की स्थिति सामने आने पर Supreme Court ने speedy trial को Article 21 की fair and reasonable procedure से जोड़ा और कई undertrial prisoners को राहत मिली। इस मामले ने दिखाया कि न्याय तक पहुँच केवल formal litigation तक सीमित नहीं रह सकती, विशेषकर उन लोगों के लिए जो गरीबी के कारण स्वयं अदालत नहीं पहुँच पाते।
भारत रत्न और पद्म पुरस्कारों के संदर्भ में कौन-से कथन सही नहीं हैं?ये अनुच्छेद 18(1) के अंतर्गत ‘उपाधियाँ’ हैं।1954 में शुरू पद्म पुरस्कार केवल ए…
- ये अनुच्छेद 18(1) के अंतर्गत ‘उपाधियाँ’ हैं।
- 1954 में शुरू पद्म पुरस्कार केवल एक बार निलंबित हुए।
- एक वर्ष में भारत रत्न की अधिकतम संख्या पाँच है।
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- राष्ट्रीय पुरस्कार अनुच्छेद 18 की निषिद्ध उपाधियाँ नहीं; पद्म पुरस्कार एक से अधिक अवधियों में स्थगित रहे और भारत रत्न सामान्यतः अधिकतम तीन प्रति वर्ष तक सीमित है।
भारत शासन अधिनियम, 1935 की प्रस्तावित संघीय व्यवस्था में अवशिष्ट शक्तियाँ किसके पास थीं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- अवशिष्ट शक्तियाँ गवर्नर-जनरल के विवेक से जुड़ी थीं।
भारत सरकार अधिनियम, 1858 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बोर्ड ऑफ कंट्रोल और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स समाप्त कर दिए गए। 2. भारत के र…
भारत सरकार अधिनियम, 1858 के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बोर्ड ऑफ कंट्रोल और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स समाप्त कर दिए गए। 2. भारत के राज्य सचिव का पद बनाया गया। 3. राज्य सचिव की सहायता के लिए 15 सदस्यीय परिषद बनाई गई। 4. लॉर्ड कैनिंग भारत के प्रथम वायसराय बने। कितने कथन सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
चारों कथन सही हैं। 1857 के विद्रोह के बाद 1858 के अधिनियम ने ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर भारत का प्रशासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया। भारत सचिव ब्रिटिश मंत्रिमंडल का सदस्य था और उसे 15 सदस्यीय परिषद सहायता देती थी। गवर्नर-जनरल का पद बना रहा, लेकिन क्राउन के प्रतिनिधि के रूप में उसे वायसराय भी कहा जाने लगा।
भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अंतर्गत प्रांतीय द्वैध शासन में निम्नलिखित में से कौन-सा 'हस्तांतरित विषय' था?
भारत सरकार अधिनियम, 1919 के अंतर्गत प्रांतीय द्वैध शासन में निम्नलिखित में से कौन-सा 'हस्तांतरित विषय' था?
उत्तर और पूरी व्याख्या
स्थानीय स्वशासन हस्तांतरित विषय था। शिक्षा, सार्वजनिक स्वास्थ्य, कृषि और स्थानीय स्वशासन जैसे विषय मंत्रियों को दिए गए, जो प्रांतीय विधानमंडल के प्रति उत्तरदायी थे। पुलिस, न्याय, भूमि-राजस्व और वित्त जैसे महत्वपूर्ण विषय गवर्नर और उसकी कार्यकारी परिषद के नियंत्रण में आरक्षित रहे।
भारत सरकार अधिनियम, 1919 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था और प्रत्यक्ष चुनाव की शुरुआत हुई। 2. पृथ…
भारत सरकार अधिनियम, 1919 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केंद्र में द्विसदनीय व्यवस्था और प्रत्यक्ष चुनाव की शुरुआत हुई। 2. पृथक निर्वाचन का विस्तार सिखों, भारतीय ईसाइयों, आंग्ल-भारतीयों और यूरोपियों तक हुआ। 3. केंद्रीय और प्रांतीय बजट अलग किए गए। 4. इसके परिणामस्वरूप 1926 में केंद्रीय लोक सेवा आयोग स्थापित हुआ। कितने कथन सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
चारों कथन सही हैं। 1919 के अधिनियम ने केंद्र में काउंसिल ऑफ स्टेट और लेजिस्लेटिव असेंबली के रूप में द्विसदनीयता स्थापित की और प्रत्यक्ष चुनाव का विस्तार किया। इसने वित्तीय विकेंद्रीकरण बढ़ाया तथा लोक सेवा आयोग की स्थापना का प्रावधान किया, जिसके आधार पर 1926 में केंद्रीय लोक सेवा आयोग बना।
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत प्रस्तावित अखिल भारतीय संघ व्यवहार में क्यों नहीं बन सका?
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत प्रस्तावित अखिल भारतीय संघ व्यवहार में क्यों नहीं बन सका?
उत्तर और पूरी व्याख्या
संघ की स्थापना के लिए देशी रियासतों की पर्याप्त भागीदारी आवश्यक थी, लेकिन आवश्यक संख्या में रियासतें शामिल होने को तैयार नहीं हुईं। इसलिए 1935 के अधिनियम का संघीय भाग प्रभावी नहीं हो पाया। इसके विपरीत प्रांतीय स्वायत्तता 1937 से लागू हुई।
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत मताधिकार किन आधारों से सीमित था? 1. संपत्ति 2. कर 3. शिक्षा
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के तहत मताधिकार किन आधारों से सीमित था? 1. संपत्ति 2. कर 3. शिक्षा
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों आधार लागू थे। 1935 के अधिनियम ने मतदाता आधार का विस्तार किया, लेकिन सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार नहीं दिया। संपत्ति, कर-भुगतान, शिक्षा और अन्य योग्यताओं के कारण केवल सीमित आबादी मतदाता बन सकी।
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के प्रस्तावित अखिल भारतीय संघ में अवशिष्ट शक्तियाँ किसे दी गई थीं?
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के प्रस्तावित अखिल भारतीय संघ में अवशिष्ट शक्तियाँ किसे दी गई थीं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
अवशिष्ट शक्तियाँ गवर्नर-जनरल को दी गई थीं। 1935 के अधिनियम ने संघीय, प्रांतीय और समवर्ती—तीन विधायी सूचियाँ बनाईं, लेकिन जो विषय इन सूचियों में नहीं थे, उन पर अंतिम आवंटन का अधिकार गवर्नर-जनरल के पास रखा गया। यह व्यवस्था वर्तमान संविधान से भिन्न है, जहाँ अवशिष्ट विधायी शक्ति संसद के पास है।
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता लागू की गई। 2. क…
भारत सरकार अधिनियम, 1935 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रांतों में द्वैध शासन समाप्त कर प्रांतीय स्वायत्तता लागू की गई। 2. केंद्र में द्वैध शासन का प्रावधान किया गया। 3. छह प्रांतों में द्विसदनीय विधानमंडल का प्रावधान था। 4. 1937 में संघीय न्यायालय स्थापित हुआ। सही कथन कौन-से हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
चारों कथन सही हैं। प्रांतों में द्वैध शासन हटाकर स्वायत्तता दी गई, जबकि संघीय स्तर पर द्वैध शासन का प्रावधान रखा गया, हालांकि संघीय भाग लागू ही नहीं हुआ। मद्रास, बंबई, बंगाल, संयुक्त प्रांत, बिहार और असम में द्विसदनीय विधानमंडल का प्रावधान था। संघीय न्यायालय ने 1937 से कार्य शुरू किया।
भारत सरकार के अधीन संगठनों के संदर्भ में, निम्नलिखित विवरणों पर विचार कीजिए: केंद्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो (CEIB) — विविध विधि प्रवर्तन अभिकरणों …
- केंद्रीय आर्थिक आसूचना ब्यूरो (CEIB) — विविध विधि प्रवर्तन अभिकरणों के बीच समन्वय करना — गृह मंत्रालय
- गंभीर कपट अन्वेषण कार्यालय (SFIO) — जटिल निगमित कपटों का अन्वेषण करना — वित्त मंत्रालय
- केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) — सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों को परिरक्षित करना और राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था की दशा को सुनिश्चित करना — कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय
उपर्युक्त कितनी पंक्तियों में दिए गए विवरण सही सुमेलित हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- पंक्ति 1 गलत: CEIB आर्थिक अपराधों से संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय का नोडल निकाय है, पर यह वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग के अंतर्गत है, गृह मंत्रालय के नहीं।
- पंक्ति 2 गलत: SFIO जटिल कॉर्पोरेट कपटों की जाँच करता है, लेकिन यह कारपोरेट कार्य मंत्रालय के अंतर्गत है, वित्त मंत्रालय के नहीं।
- पंक्ति 3 सही: CBI प्रशासनिक रूप से कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय से संबद्ध है; दी गई कार्य-विवरण पंक्ति भी इसके घोषित उद्देश्यों से मेल खाती है।
भारतीय और अमेरिकी Judicial Review के बीच मुख्य अंतर के संदर्भ में कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त है?
भारतीय और अमेरिकी Judicial Review के बीच मुख्य अंतर के संदर्भ में कौन-सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (b) है। भारतीय संविधान ने अनुच्छेद 21 में जापानी मॉडल से 'procedure established by law' वाक्यांश अपनाया, जबकि अमेरिकी constitutional law में due process की व्यापक परंपरा है। लेकिन Maneka Gandhi v. Union of India (1978) के बाद Supreme Court ने कहा कि Article 21 की प्रक्रिया arbitrary नहीं हो सकती; उसे just, fair and reasonable होना चाहिए। इसलिए आज भारतीय review को केवल संकीर्ण procedural review कहना गलत होगा, फिर भी दोनों देशों की संवैधानिक संरचनाएँ समान नहीं हैं।
भारतीय धर्मनिरपेक्षता ( Indian Secularism) के मॉडल और पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता के मॉडल के मध्य मूलभूत अंतर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार …
भारतीय धर्मनिरपेक्षता ( Indian Secularism) के मॉडल और पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता के मॉडल के मध्य मूलभूत अंतर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पश्चिमी धर्मनिरपेक्षता राज्य और धर्म के मध्य पूर्ण पृथक्करण ( Strict wall of separation) पर आधारित है, जहां राज्य किसी भी धार्मिक गतिविधि में हस्तक्षेप नहीं करता। 2. भारतीय धर्मनिरपेक्षता सभी धर्मों के प्रति समान आदर और सभी को समान संरक्षण (सर्वधर्म समभाव) के सिद्धांत पर आधारित है। 3. भारतीय मॉडल में राज्य को सामाजिक सुधार, समानता और मौलिक अधिकारों के संरक्षण हेतु धार्मिक प्रथाओं में सकारात्मक हस्तक्षेप करने की अनुमति है (जैसे अस्पृश्यता उन्मूलन अनुच्छेद 17)। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। पश्चिमी मॉडल सख्त अलगाव पर आधारित है, जबकि भारतीय मॉडल सैद्धांतिक दूरी ( Principled distance) और सभी धर्मों के समान सम्मान व कु रीतियों के विरुद्ध सकारात्मक हस्तक्षेप की अनुमति देता है।
भारतीय ध्वज संहिता, 2002 के संदर्भ में: कथन I: राष्ट्रीय ध्वज का एक मानक आकार 600 मिमी × 400 मिमी है। कथन II: ध्वज की लंबाई और ऊँचाई का अनुपात 3:…
कथन I: राष्ट्रीय ध्वज का एक मानक आकार 600 मिमी × 400 मिमी है।
कथन II: ध्वज की लंबाई और ऊँचाई का अनुपात 3:2 है।
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- राष्ट्रीय ध्वज का अनुपात 3:2 निर्धारित है।
- 600×400 मिमी सूचीबद्ध मानक आकारों में नहीं है; मानक आकार अनुपात का पालन करते हुए निर्दिष्ट मापों में होते हैं।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के अधीन जीरो प्रथम सूचना रिपोर्ट (Zero FIR) के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं?…
- जीरो एफआईआर (Zero FIR) किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई जा सकती है, भले ही संज्ञेय / असंज्ञेय अपराध किए जाने का स्थान, उस पुलिस स्टेशन की क्षेत्रीय अधिकारिता से बाहर हो।
- किसी पुलिस स्टेशन, जहाँ जीरो एफआईआर (Zero FIR) दर्ज की गई है, वहाँ के प्रभारी अधिकारी सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से प्राथमिक अन्वेषण आरंभ कर सकता है।
- जीरो एफआईआर (Zero FIR) के अंतर्गत, सूचना देने वाले के लिए यह अनिवार्य है कि वह सूचना इलेक्ट्रॉनिक प्ररूप में दे।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- कथन 1 गलत: धारा 173 में क्षेत्राधिकार की परवाह किए बिना सूचना देने की व्यवस्था संज्ञेय अपराध के लिए है; कथन ने असंज्ञेय अपराध भी जोड़ दिया है।
- कथन 2 सही: 3 वर्ष या अधिक किंतु 7 वर्ष से कम दंडनीय संज्ञेय अपराधों में धारा 173(3) के तहत DSP या उससे ऊपर के अधिकारी की पूर्व अनुमति से प्रारंभिक जाँच की जा सकती है।
- कथन 3 गलत: सूचना मौखिक या इलेक्ट्रॉनिक दोनों रूपों में दी जा सकती है; इलेक्ट्रॉनिक रूप अनिवार्य नहीं है।
भारतीय नागरिकता के अर्जन एवं समाप्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'देशीयकरण' ( Naturalization)…
भारतीय नागरिकता के अर्जन एवं समाप्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत 'देशीयकरण' ( Naturalization) द्वारा नागरिकता प्राप्त करने वाले व्यक्ति को संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेनी होती है। 2. यदि किसी नागरिक ने छल-कपट या मिथ्या निरूपण से नागरिकता प्राप्त की है, तो केंद्र सरकार उसे नागरिकता से वंचित ( Deprivation) कर सकती है। 3. युद्ध के दौरान यदि कोई नागरिक शत्रु देश के साथ अवैध व्यापार या संचार करता है, तो उसकी नागरिकता अनिवार्य रूप से समाप्त की जा सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। नागरिकता अधिनियम, 1955 के तहत देशीयकरण द्वारा नागरिकता प्राप्त करने वाले को निष्ठा की शपथ लेनी होती है। कपटपूर्ण तरीके से नागरिकता लेने पर या युद्ध के दौरान शत्रु की अवैध सहायता करने पर केंद्र सरकार नागरिकता से वंचित ( Deprivation ) कर सकती है।
भारतीय न्यायपालिका की संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में केंद्र और राज्यों के लिए अलग-अलग दोहरी न्यायपालिका (Dual …
भारतीय न्यायपालिका की संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में केंद्र और राज्यों के लिए अलग-अलग दोहरी न्यायपालिका (Dual Judiciary) है। 2. भारत ने एकीकृत न्यायपालिका (Integrated Judiciary) अपनाई है, जो केंद्र और राज्य दोनों विधियों को लागू करती है। 3. उच्चतम न्यायालय का उद्घाटन 28 जनवरी 1950 को हुआ और उसने संघीय न्यायालय (Federal Court) का स्थान लिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (b) है। कथन 1 गलत है। अमेरिका की तरह भारत में अलग संघीय और राज्य न्यायालय-प्रणालियाँ नहीं हैं; भारत में उच्चतम न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालयों तक एक एकीकृत न्यायिक ढाँचा है। कथन 2 सही है क्योंकि यही एकीकृत संरचना संघ और राज्य—दोनों स्तरों के कानून लागू करती है। कथन 3 भी सही है: 28 जनवरी 1950 को उच्चतम न्यायालय ने कार्य प्रारंभ किया और उसने Government of India Act, 1935 के तहत बने Federal Court का स्थान लिया।