वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 144
एक सवाल हल कीजिए, उसका कारण समझिए, फिर आगे बढ़िए। करंट अफेयर्स, विषयवार अध्ययन और विगत वर्षों के प्रश्न अब एक जगह।
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2861–2880 / 4666 प्रश्न
प्रश्न-संग्रह
प्रश्न खोलकर हल करेंभारतीय न्यायपालिका के संदर्भ में:मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश को पुनः बैठने और कार्य क…
- मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रपति की पूर्व सहमति से, किसी सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश को पुनः बैठने और कार्य करने के लिए बुला सकते हैं।
- उच्च न्यायालय को अपने निर्णय की समीक्षा का वही अधिकार है जैसा सुप्रीम कोर्ट को है।
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- संविधान से सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश को बुलाने का प्रावधान है; दूसरा कथन प्रश्न की आधिकारिक कुंजी में सही नहीं माना गया।
भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कानून-निर्माण में भारतीयों को शामिल करने की शुरुआत हुई। 2. 1862 में …
भारतीय परिषद अधिनियम, 1861 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कानून-निर्माण में भारतीयों को शामिल करने की शुरुआत हुई। 2. 1862 में राजा बनारस, महाराजा पटियाला और सर दिनकर राव को नामित किया गया। 3. पोर्टफोलियो प्रणाली को वैधानिक मान्यता मिली। 4. आपात स्थिति में वायसराय को अध्यादेश जारी करने की शक्ति मिली। सही कथन कौन-से हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
चारों कथन सही हैं। 1861 के अधिनियम ने विधायी परिषद के गैर-सरकारी सदस्यों में भारतीयों को नामित करने की शुरुआत की और प्रशासनिक विकेंद्रीकरण को कुछ हद तक पुनर्जीवित किया। पोर्टफोलियो प्रणाली, जिसे लॉर्ड कैनिंग ने 1859 में व्यवहार में अपनाया था, इस अधिनियम से वैधानिक आधार मिला। वायसराय को सीमित अवधि के लिए अध्यादेश की शक्ति भी दी गई।
भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 ने विधायी परिषदों को कौन-सी नई संसदीय सुविधा दी?
भारतीय परिषद अधिनियम, 1892 ने विधायी परिषदों को कौन-सी नई संसदीय सुविधा दी?
उत्तर और पूरी व्याख्या
1892 के अधिनियम ने सदस्यों को बजट पर चर्चा करने और कार्यपालिका से प्रश्न पूछने की सीमित अनुमति दी। किंतु वे बजट पर मतदान नहीं कर सकते थे और पूरक प्रश्न पूछने का अधिकार भी नहीं था। इससे विधायी नियंत्रण का प्रारंभिक रूप विकसित हुआ, पर उत्तरदायी शासन अभी बहुत दूर था।
भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में 'किचन कैबिनेट' या 'आंतरिक मंत्रिमंडल' (Kitchen Cabinet / Inner Cabinet) का क्या तात्पर्य है?
भारतीय प्रशासनिक व्यवस्था में 'किचन कैबिनेट' या 'आंतरिक मंत्रिमंडल' (Kitchen Cabinet / Inner Cabinet) का क्या तात्पर्य है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (b) है। Kitchen Cabinet कोई संवैधानिक या वैधानिक निकाय नहीं है। यह प्रधानमंत्री के अत्यंत भरोसेमंद सहयोगियों का छोटा अनौपचारिक समूह होता है, जिसके माध्यम से संवेदनशील या त्वरित राजनीतिक सलाह ली जा सकती है। इसकी शक्ति औपचारिक कानून से नहीं, प्रधानमंत्री के विश्वास और निकटता से आती है। आलोचना यह है कि ऐसा समूह औपचारिक Cabinet और संस्थागत जवाबदेही को पीछे छोड़ सकता है; लाभ यह कि निर्णय-समन्वय तेज हो सकता है।
भारतीय राजकोषीय संघवाद में 'Balancing Wheel of Fiscal Federalism' किसे कहा जाता है?
भारतीय राजकोषीय संघवाद में 'Balancing Wheel of Fiscal Federalism' किसे कहा जाता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
वित्त आयोग केंद्र और राज्यों के बीच कर-वितरण और अनुदानों की सिफारिश के कारण राजकोषीय संघवाद का संतुलनकारी संस्थान माना जाता है।
भारतीय राजव्यवस्था की संघीय प्रकृति का आवश्यक लक्षण कौन-सा है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- संघवाद में संविधान की सर्वोच्चता और स्वतंत्र न्यायपालिका केंद्र-राज्य शक्तियों की सीमाओं की रक्षा करती है।
भारतीय राजव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: अध्यादेश किसी केंद्रीय अधिनियम में संशोधन कर सकता है।अध्यादेश किसी मौलिक अधिकार…
- अध्यादेश किसी केंद्रीय अधिनियम में संशोधन कर सकता है।
- अध्यादेश किसी मौलिक अधिकार को सीमित कर सकता है।
- अध्यादेश को पूर्व प्रभाव से लागू किया जा सकता है।
सही कथनों का चयन कीजिए:
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- अनुच्छेद 123 के अंतर्गत अध्यादेश को संसद के अधिनियम जैसी शक्ति प्राप्त होती है; इसलिए वह केंद्रीय अधिनियम में संशोधन या निरसन कर सकता है।
- अध्यादेश भी संविधान की सीमाओं से बंधा है और मौलिक अधिकारों का हनन नहीं कर सकता।
- विधायी कानून की तरह अध्यादेश को भी उपयुक्त स्थिति में पूर्व प्रभाव दिया जा सकता है।
भारतीय राजव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: राज्यपाल अपने पद की शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग के लिए किसी न्यायालय के प्र…
- राज्यपाल अपने पद की शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग के लिए किसी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं होते।
- राज्यपाल के कार्यकाल के दौरान उनके विरुद्ध कोई आपराधिक कार्यवाही आरंभ या जारी नहीं की जा सकती।
- राज्य विधानमंडल के सदस्य सदन में कही गई बात या दिए गए मत के लिए न्यायालयी कार्यवाही के प्रति उत्तरदायी नहीं होते।
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- अनुच्छेद 361 राष्ट्रपति और राज्यपाल को पदगत कार्यों के संबंध में न्यायालयी उत्तरदायित्व से संरक्षण देता है।
- उनके कार्यकाल में आपराधिक कार्यवाही आरंभ/जारी नहीं की जा सकती।
- अनुच्छेद 194 राज्य विधानमंडल के सदस्यों को सदन में कही बात/मत के लिए विशेषाधिकार देता है।
भारतीय राष्ट्रीय ध्वज को संविधान सभा ने किस तिथि को अपनाया?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- संविधान सभा ने 22 जुलाई 1947 को वर्तमान तिरंगे को स्वतंत्र भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रूप में अपनाया।
भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना का वैधानिक आधार कौन-सा अधिनियम था?
भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना का वैधानिक आधार कौन-सा अधिनियम था?
उत्तर और पूरी व्याख्या
भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के आधार पर हुई और उसने 1 अप्रैल 1935 से कार्य शुरू किया। हिल्टन यंग आयोग ने केंद्रीय बैंक की स्थापना की सिफारिश की थी। इसलिए स्थापना का वैधानिक आधार 1935 का भारत सरकार अधिनियम नहीं, बल्कि विशिष्ट भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 है।
भारतीय संघ की अमेरिकी संघ से तुलना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
भारतीय संघ की अमेरिकी संघ से तुलना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (a) है। अमेरिका में संघीय संविधान के साथ राज्यों के अपने संविधान और दोहरी नागरिकता की परंपरा है, जबकि भारत में एकल नागरिकता है और राज्यों के लिए अलग संवैधानिक नागरिकता नहीं है। भारत में संसद अनुच्छेद 3 के तहत राज्यों की सीमा, क्षेत्र या नाम बदल सकती है; इसलिए राज्यों की क्षेत्रीय अखंडता अमेरिकी राज्यों जैसी संवैधानिक सुरक्षा प्राप्त नहीं करती। अवशिष्ट शक्तियाँ भारत में संसद को दी गई हैं, जबकि अमेरिकी मॉडल में सामान्यतः राज्यों के पास रहती हैं।
भारतीय संघवाद की एकात्मक विशेषताओं (Unitary Features) में निम्नलिखित में से कौन-से शामिल हैं? 1. सशक्त केंद्र (Strong Centre) 2. अखिल भारतीय सेवा…
भारतीय संघवाद की एकात्मक विशेषताओं (Unitary Features) में निम्नलिखित में से कौन-से शामिल हैं? 1. सशक्त केंद्र (Strong Centre) 2. अखिल भारतीय सेवाएं (All India Services) 3. एकीकृत न्यायपालिका (Integrated Judiciary) 4. राज्यपाल की नियुक्ति (Appointment of Governor) 5. संविधान की कठोरता (Rigidity of the Constitution) नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
उत्तर और पूरी व्याख्या
संविधान की कठोरता (Rigidity) एक 'संघीय विशेषता' (Federal feature) है, न कि एकात्मक। बाकी चारों (1, 2, 3, 4) एकात्मक (Unitary/Non-federal) विशेषताएं हैं।
भारतीय संघवाद की प्रकृति पर विभिन्न विद्वानों की टिप्पणियों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. के. सी. व्हेयर — 'अर्ध-संघीय' (Qu…
भारतीय संघवाद की प्रकृति पर विभिन्न विद्वानों की टिप्पणियों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. के. सी. व्हेयर — 'अर्ध-संघीय' (Quasi-Federal) 2. पॉल एपलबी — 'अत्यधिक संघीय' (Extremely Federal) 3. मॉरिस जोन्स — 'सौदेबाजी का संघवाद' (Bargaining Federalism) 4. ग्रैनविले ऑस्टिन — 'सहकारी संघवाद' (Cooperative Federalism) उपर्युक्त में से कितने युग्म सही सुमेलित हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (d) है। चारों युग्म भारतीय संघवाद पर प्रचलित विद्वत टिप्पणियों से जुड़े हैं। के.सी. व्हेयर ने भारतीय व्यवस्था को केंद्र की ओर झुकी 'quasi-federal' प्रकृति वाला माना; मॉरिस जोन्स ने केंद्र-राज्य व्यवहार में bargaining federalism पर जोर दिया; ग्रैनविले ऑस्टिन ने cooperative federalism की अवधारणा को रेखांकित किया। ऐसे प्रश्नों में अवधारणा से अधिक लेखक-कथन का सही मिलान महत्वपूर्ण है।
भारतीय संघवाद को 'विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ' (Indestructible Union of Destructible States) क्यों कहा जाता है?
भारतीय संघवाद को 'विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ' (Indestructible Union of Destructible States) क्यों कहा जाता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (b) है। अनुच्छेद 3 संसद को राज्य के गठन, क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन की शक्ति देता है; संबंधित राज्य विधानमंडल से राय मांगी जाती है, पर उसकी सहमति बाध्यकारी नहीं है। दूसरी ओर कोई राज्य भारत संघ से पृथक होने का संवैधानिक अधिकार नहीं रखता। इसलिए संघ को 'अविनाशी' और राज्यों की वर्तमान सीमाओं/रूप को 'परिवर्तनीय' कहा जाता है।
भारतीय संघीय व्यवस्था के स्वरूप के संदर्भ में विभिन्न विधिवेत्ताओं के दृष्टिकोणों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार K C. Wheare) : अर्ध-स…
भारतीय संघीय व्यवस्था के स्वरूप के संदर्भ में विभिन्न विधिवेत्ताओं के दृष्टिकोणों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार K C. Wheare) : अर्ध-संघीय (Quasi-federal) 2. ग्रैनविल ऑस्टिन (Granville Austin) : कीजिए: 1. के . सी. व्हेयर ( . सहकारी संघवाद (Cooperative federalism) 3. मॉरिस जोन्स (Morris-Jones) : सौदेबाजी का संघवाद (Bargaining federalism) 4. पॉल एप्पलबी (Paul Appleby) : अत्यधिक केंद्रीकृ त संघवाद उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
चारों युग्म सही सुमेलित हैं। भारतीय संघवाद के स्वरूप पर विभिन्न राजनीतिक विचारकों की ये अत्यंत प्रसिद्ध और ऐतिहासिक परिभाषाएं हैं।
भारतीय संविधान का कौन-सा अनुच्छेद भारत निर्वाचन आयोग की स्थापना से संबंधित है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- अनुच्छेद 324 चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण की शक्ति निर्वाचन आयोग को देता है।
भारतीय संविधान की निम्नलिखित विशेषताओं में से कौन-सी इसकी 'एकात्मक विशेषता' (Unitary Feature) नहीं है?
भारतीय संविधान की निम्नलिखित विशेषताओं में से कौन-सी इसकी 'एकात्मक विशेषता' (Unitary Feature) नहीं है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (c) है। शक्तियों का संवैधानिक विभाजन संघीय व्यवस्था की मूल विशेषता है, क्योंकि केंद्र और राज्यों के विधायी क्षेत्र संविधान द्वारा अलग किए जाते हैं। इसके विपरीत एकल संविधान, अखिल भारतीय सेवाएँ और राज्यपाल की नियुक्ति में केंद्र की प्रमुख भूमिका भारतीय संघवाद को केंद्राभिमुख बनाती हैं। UPSC अक्सर 'संघीय' और 'एकात्मक' विशेषताओं को उलटकर पूछता है।
भारतीय संविधान की प्रकृति के संदर्भ में के. सी. व्हेयर (K.C. Wheare) ने इसे किस रूप में वर्णित किया था?
भारतीय संविधान की प्रकृति के संदर्भ में के. सी. व्हेयर (K.C. Wheare) ने इसे किस रूप में वर्णित किया था?
उत्तर और पूरी व्याख्या
के. सी. व्हेयर ने भारतीय संविधान को 'अर्ध-संघीय' (Quasi-Federal) कहा था। ग्रैनविले ऑस्टिन ने इसे 'सहकारी परिसंघवाद' और मॉरिस जोन्स ने 'सौदेबाजी का संघवाद' कहा था।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना ( Preamble) की विधिक और संवैधानिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेरुबारी यूनियन मामले (19…
भारतीय संविधान की प्रस्तावना ( Preamble) की विधिक और संवैधानिक स्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेरुबारी यूनियन मामले (1960) में उच्चतम न्यायालय ने माना था कि प्रस्तावना संविधान का भाग नहीं है। 2. के शवानंद भारती बनाम के रल राज्य (1973) मामले में उच्चतम न्यायालय ने पूर्व निर्णय को पलटते हुए यह स्वीकार किया कि प्रस्तावना संविधान का एक अभिन्न अंग ( Integral part) है। 3. एल.आई.सी. ऑफ इंडिया मामले (1995) में सर्वोच्च न्यायालय ने पुनः पुष्टि की कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है। 4. प्रस्तावना विधायिका की शक्तियों का स्रोत है और इसके प्रावधान न्यायालयों में सीधे प्रवर्तनीय ( Justiciable) हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
कथन 4 गलत है क्योंकि प्रस्तावना न तो विधायिका की शक्ति का स्रोत है और न ही उसकी शक्तियों पर प्रतिबंध लगाती है; साथ ही यह गैर-न्यायोचित (Non justiciable - ) है अर्थात इसके प्रावधान अदालतों में सीधे लागू नहीं कराए जा सकते। कथन 1, 2 और 3 सही हैं।
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में प्रयुक्त शब्दों के सही क्रम का चयन कीजिए:
भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) में प्रयुक्त शब्दों के सही क्रम का चयन कीजिए:
उत्तर और पूरी व्याख्या
प्रस्तावना में सही क्रम है: 'संपूर्ण प्रभुत्व-संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य' (Sovereign, Socialist, Secular, Democratic, Republic)।