वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 126
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2501–2520 / 4666 प्रश्न
प्रश्न-संग्रह
प्रश्न खोलकर हल करेंउच्चतम न्यायालय के आरंभिक क्षेत्राधिकार ( Original Jurisdiction — अनुच्छेद 131) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसमें केंद्र और…
उच्चतम न्यायालय के आरंभिक क्षेत्राधिकार ( Original Jurisdiction — अनुच्छेद 131) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसमें केंद्र और एक या अधिक राज्यों के बीच, या दो या अधिक राज्यों के बीच का कोई भी कानूनी विवाद शामिल है। 2. संविधान-पूर्व की किसी संधि या समझौते से उत्पन्न विवाद अनुच्छेद 131 के आरंभिक क्षेत्राधिकार से बाहर हैं। 3. अंतर-राज्यीय जल विवाद ( Inter-state water disputes) भी अनुच्छेद 131 के तहत सीधे उच्चतम न्यायालय के आरंभिक क्षेत्राधिकार में आते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
कथन 3 गलत है क्योंकि संविधान के अनुच्छेद 262(2) के तहत अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 संसद को यह अधिकार देता है कि वह जल विवादों को उच्चतम न्यायालय के क्षेत्राधिकार से बाहर रख सके , अतः ये विवाद अनुच्छेद 131 के तहत नहीं आते। कथन 1 और 2 सही हैं।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रस्ताव लोकसभा में कम-से-कम 100 सदस्यों या …
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रस्ताव लोकसभा में कम-से-कम 100 सदस्यों या राज्यसभा में 50 सदस्यों के हस्ताक्षर से आरंभ हो सकता है। 2. संबंधित पीठासीन अधिकारी प्रस्ताव स्वीकार या अस्वीकार कर सकता है। 3. स्वीकार होने पर तीन-सदस्यीय जाँच समिति गठित की जाती है। 4. आरोप सिद्ध होने पर प्रत्येक सदन में विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना आवश्यक है। उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (c) है। Judges (Inquiry) Act, 1968 के तहत प्रारंभिक notice के लिए लोकसभा में 100 और राज्यसभा में 50 सदस्यों का समर्थन चाहिए। Speaker/Chairman प्रस्ताव स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं। स्वीकार होने पर तीन-सदस्यीय जाँच समिति आरोपों की जाँच करती है। यदि समिति कदाचार या असमर्थता सिद्ध पाती है, तभी संसद में removal motion आगे बढ़ता है और दोनों सदनों में कुल सदस्य संख्या का बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वालों का कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होता है।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के कार्यकाल और पदमुक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान छह वर्ष का निश्चित कार्यकाल देता…
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के कार्यकाल और पदमुक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान छह वर्ष का निश्चित कार्यकाल देता है। 2. न्यायाधीश 65 वर्ष की आयु तक पद धारण करता है। 3. वह राष्ट्रपति को लिखित त्यागपत्र दे सकता है। 4. उसे संसद के दोनों सदनों की विशेष बहुमत वाली प्रक्रिया के बाद राष्ट्रपति द्वारा केवल सिद्ध कदाचार या असमर्थता के आधार पर हटाया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (b) है। Supreme Court Judge का कोई छह-वर्षीय निश्चित कार्यकाल नहीं है; वह 65 वर्ष की आयु तक पद पर रह सकता है, यदि पहले त्यागपत्र न दे या हटाया न जाए। त्यागपत्र राष्ट्रपति को दिया जाता है। पद से हटाने का संवैधानिक आधार 'proved misbehaviour or incapacity' है और इसके लिए संसद के प्रत्येक सदन में कठोर विशेष बहुमत से address पारित होना आवश्यक है। यह कठिन प्रक्रिया न्यायिक स्वतंत्रता की प्रमुख सुरक्षा है।
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और भत्तों के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?
उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के वेतन और भत्तों के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (b) है। न्यायाधीशों के वेतन और सेवा-शर्तें संसद द्वारा कानून से निर्धारित की जाती हैं, राष्ट्रपति की निजी प्रशासनिक इच्छा से नहीं। संबंधित व्यय Consolidated Fund of India पर charged होता है, इसलिए annual voting के अधीन नहीं रहता। न्यायिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए नियुक्ति के बाद सेवा-शर्तों में अलाभकारी परिवर्तन पर संवैधानिक रोक है; अनुच्छेद 360 के वित्तीय आपातकाल की स्थिति में वेतन-संबंधी निर्देश एक अपवाद बन सकते हैं।
उच्चतम न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction — अनुच्छेद 131) में निम्नलिखित में से कौन-से विवाद आते हैं? 1. भारत सरकार और एक या अध…
उच्चतम न्यायालय के मूल क्षेत्राधिकार (Original Jurisdiction — अनुच्छेद 131) में निम्नलिखित में से कौन-से विवाद आते हैं? 1. भारत सरकार और एक या अधिक राज्यों के बीच विवाद। 2. एक ओर भारत सरकार और कोई राज्य/राज्य, दूसरी ओर एक या अधिक अन्य राज्यों के बीच विवाद। 3. दो या अधिक राज्यों के बीच विवाद। 4. अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद, जिन पर संसद अनुच्छेद 262 के तहत न्यायालयीय अधिकार-क्षेत्र को बाहर कर सकती है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (a) है। अनुच्छेद 131 Supreme Court को संघ और राज्यों के बीच ऐसे कानूनी विवादों पर exclusive original jurisdiction देता है जिनमें किसी legal right का अस्तित्व या सीमा प्रश्न में हो। कथन 1, 2 और 3 इसी संवैधानिक ढाँचे में आते हैं। अंतर-राज्यीय नदी जल विवादों के लिए अनुच्छेद 262 संसद को विशेष व्यवस्था बनाने और न्यायालयों का क्षेत्राधिकार बाहर करने की शक्ति देता है; इसी कारण उन्हें सामान्य अनुच्छेद 131 प्रश्न की तरह नहीं पढ़ना चाहिए।
उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-कौन से तत्व संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) के अंग माने गए हैं? 1. …
उच्चतम न्यायालय के विभिन्न निर्णयों के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन-कौन से तत्व संविधान के 'मूल ढांचे' (Basic Structure) के अंग माने गए हैं? 1. संविधान की सर्वोच्चता (Supremacy of the Constitution) 2. न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) 3. विधि का शासन (Rule of Law) 4. स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव (Free and Fair Elections) 5. न्यायपालिका की स्वतंत्रता (Independence of Judiciary) नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
उत्तर और पूरी व्याख्या
ये सभी पांचों तत्व उच्चतम न्यायालय द्वारा समय-समय पर संविधान के मूल ढांचे (आधारभूत संरचना) का हिस्सा घोषित किए गए हैं।
उच्चतम न्यायालय में उपचारात्मक याचिका ( Curative Petition) की अवधारणा के उद्भव और नियमों के संदर्भ में रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा (2002) म…
उच्चतम न्यायालय में उपचारात्मक याचिका ( Curative Petition) की अवधारणा के उद्भव और नियमों के संदर्भ में रूपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा (2002) मामले में क्या सिद्धांत तय किए गए? 1. पुनर्विचार याचिका ( Review Petition) खारिज होने के बाद भी अन्याय के निवारण और प्रक्रिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए उपचारात्मक याचिका दायर की जा सकती है। 2. यह याचिका केवल अत्यंत दुर्लभ मामलों में स्वीकार की जाती है, जैसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन हुआ हो या न्यायाधीश का व्यक्तिगत हित ( Bias) रहा हो। 3. याचिका पर विचार करने से पहले उच्चतम न्यायालय के तीन वरिष्ठतम न्यायाधीशों और उस पीठ के न्यायाधीशों (यदि उपलब्ध हों) द्वारा इसका परीक्षण किया जाना अनिवार्य है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। 2002 में रूपा हुर्रा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपने ही अंतिम फैसले के खिलाफ उपचारात्मक याचिका का नवाचार किया, जो न्याय की विफलता रोकने का अंतिम कानूनी उपाय है।
उच्चतम न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीशों ( Ad Hoc Judges) की नियुक्ति के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 127 के तहत क्या प्रक्रिया निर्धारित है? 1. य…
उच्चतम न्यायालय में तदर्थ न्यायाधीशों ( Ad Hoc Judges) की नियुक्ति के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 127 के तहत क्या प्रक्रिया निर्धारित है? 1. यदि किसी समय उच्चतम न्यायालय के किसी सत्र को आयोजित करने या चालू रखने के लिए न्यायाधीशों की गणपूर्ति ( Quorum) उपलब्ध न हो, तो तदर्थ न्यायाधीश की नियुक्ति की जा सकती है। 2. भारत के मुख्य न्यायाधीश ( CJI) राष्ट्रपति की पूर्व सहमति और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को तदर्थ न्यायाधीश नियुक्त कर सकते हैं। 3. संबंधित उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने की योग्यता रखनी चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 127 के तहत कोरम पूरा न होने पर केवल CJI द्वारा राष्ट्रपति की सहमति से उच्च न्यायालय के योग्य जज को तदर्थ रूप में नियुक्त किया जा सकता है (यह व्यवस्था उच्च न्यायालयों में नहीं है)।
उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित 'Judges Cases' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रथम Judges Case (1981) …
उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की नियुक्ति से संबंधित 'Judges Cases' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रथम Judges Case (1981) में 'consultation' को 'concurrence' के समान नहीं माना गया। 2. द्वितीय Judges Case (1993) में न्यायपालिका की प्रधानता स्थापित करते हुए collegium प्रणाली की नींव पड़ी। 3. तृतीय Judges Case (1998) में राष्ट्रपति के अनुच्छेद 143 संदर्भ पर न्यायालय ने Supreme Court नियुक्तियों के लिए collegium को CJI और चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों का समूह स्पष्ट किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (d) है। First Judges Case में कार्यपालिका की भूमिका अपेक्षाकृत मजबूत मानी गई और consultation को concurrence नहीं माना गया। 1993 के Second Judges Case ने इस स्थिति को बदलते हुए न्यायिक नियुक्तियों में CJI की संस्थागत राय को प्रधानता दी और collegium व्यवस्था विकसित हुई। 1998 के Third Judges Case में राष्ट्रपति के संदर्भ पर इस संस्थागत परामर्श को विस्तृत किया गया और Supreme Court नियुक्तियों के लिए CJI + चार वरिष्ठतम न्यायाधीशों वाली संरचना स्पष्ट हुई।
उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की शक्ति किसमें निहित है?
उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की शक्ति किसमें निहित है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (c) है। अनुच्छेद 124(1) मूल रूप से एक मुख्य न्यायाधीश और सात अन्य न्यायाधीशों की व्यवस्था करता था, लेकिन आगे संख्या बढ़ाने की शक्ति संसद को दी गई। संसद Supreme Court (Number of Judges) Act में संशोधन करके sanctioned strength बदलती है। 2019 के संशोधन से कुल अधिकतम शक्ति 34—एक CJI और 33 अन्य न्यायाधीश—की गई। इसलिए राष्ट्रपति नियुक्ति करते हैं, लेकिन कुल संख्या निर्धारित करने की विधायी शक्ति संसद के पास है।
उत्प्रेषण (Certiorari) रिट के संदर्भ में T. C. Basappa v. T. Nagappa (1954) और विकसित न्यायशास्त्र के आधार पर निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1.…
उत्प्रेषण (Certiorari) रिट के संदर्भ में T. C. Basappa v. T. Nagappa (1954) और विकसित न्यायशास्त्र के आधार पर निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. T. C. Basappa का सुप्रीम कोर्ट निर्णय 5 मई 1954 का है। 2. Certiorari न्यायिक या अर्ध-न्यायिक कार्य करने वाले प्राधिकरण के अधिकार-क्षेत्र संबंधी या अभिलेख पर प्रत्यक्ष विधिक त्रुटि को सुधारने के लिए जारी हो सकती है; प्रशासनिक निकाय भी जब अर्ध-न्यायिक कार्य करे तो इसके दायरे में आ सकता है। 3. Certiorari अपीलीय नहीं बल्कि पर्यवेक्षी उपचार है; रिट न्यायालय सामान्य अपील की तरह साक्ष्य का पुनर्मूल्यांकन नहीं करता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। PDF में T. C. Basappa का वर्ष 1991 दिया गया था, जबकि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय 5 मई 1954 का है। इस निर्णय ने certiorari को supervisory writ बताया और jurisdictional/patent legal errors को सुधारने के सिद्धांत स्पष्ट किए।
उदार लोकतंत्र में स्वतंत्रता की सर्वोत्तम सुरक्षा किससे होती है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- शक्तियों के विभाजन से किसी एक संस्था में निरंकुश सत्ता के संकेंद्रण पर रोक लगती है।
उपकर (Cess) और अधिभार (Surcharge) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. Cess सामान्यतः किसी निर्दिष्ट उद्देश्य के लिए लगाया जाने वाला…
उपकर (Cess) और अधिभार (Surcharge) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. Cess सामान्यतः किसी निर्दिष्ट उद्देश्य के लिए लगाया जाने वाला कर है; उसका आधार कर-राशि या कोई अन्य करयोग्य आधार हो सकता है, इसलिए हर cess को तकनीकी रूप से 'tax on tax' कहना सही नहीं है। 2. Surcharge मूल कर के ऊपर अतिरिक्त कर है और उसकी प्राप्ति किसी विशिष्ट उद्देश्य के लिए संवैधानिक रूप से earmark होना आवश्यक नहीं है। 3. अनुच्छेद 270 की वर्तमान व्यवस्था में cess और अनुच्छेद 271 के surcharge की प्राप्तियाँ राज्यों के साथ बाँटे जाने वाले divisible pool में शामिल नहीं होतीं। कौन-से कथन सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। Cess और surcharge को एक ही अर्थ में नहीं समझना चाहिए। Cess किसी निर्दिष्ट उद्देश्य से जुड़ा कर हो सकता है, जबकि surcharge मूल कर पर अतिरिक्त भार है। संविधान के अनुच्छेद 270 में specific-purpose cess और अनुच्छेद 271 के surcharge को divisible pool से बाहर रखा गया है।
उपराष्ट्रपति के कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
उपराष्ट्रपति के कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (d) है। उपराष्ट्रपति राज्यसभा का पदेन सभापति है, लेकिन कार्यवाहक राष्ट्रपति बनने पर वह राज्यसभा सभापति के कर्तव्य नहीं निभाता और उस अवधि में राष्ट्रपति पद के वेतन-भत्तों का अधिकारी होता है। आकस्मिक राष्ट्रपति रिक्ति को अनुच्छेद 62(2) के अनुसार छह महीने के भीतर भरना आवश्यक है; इसलिए सामान्यतः उपराष्ट्रपति अधिकतम छह महीने तक ही कार्यवाहक राष्ट्रपति रह सकता है, एक वर्ष नहीं।
उपराष्ट्रपति के चुनाव को किस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती?
उपराष्ट्रपति के चुनाव को किस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (a) है। अनुच्छेद 71(4) के अनुसार राष्ट्रपति या उपराष्ट्रपति के चुनाव को केवल इस आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती कि निर्वाचन मंडल में किसी कारण से रिक्ति थी। इसका उद्देश्य चुनाव को हर आकस्मिक रिक्ति से अस्थिर होने से बचाना है। उपराष्ट्रपति चुनाव स्वयं गुप्त मतदान और एकल संक्रमणीय मत की पद्धति से होता है, इसलिए विकल्प (d) कोई वैध चुनौती नहीं बल्कि प्रक्रिया की सामान्य विशेषता है।
उपराष्ट्रपति के पद की शपथ (Oath) किसके द्वारा दिलाई जाती है?
उपराष्ट्रपति के पद की शपथ (Oath) किसके द्वारा दिलाई जाती है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (b) है। अनुच्छेद 69 के अनुसार उपराष्ट्रपति पद ग्रहण करने से पहले राष्ट्रपति या राष्ट्रपति द्वारा इस उद्देश्य के लिए नियुक्त व्यक्ति के समक्ष शपथ या प्रतिज्ञान करता है। राष्ट्रपति की शपथ मुख्य न्यायाधीश दिलाते हैं, लेकिन उपराष्ट्रपति के लिए वही नियम लागू नहीं होता। इसी समानता के कारण CJI वाला विकल्प अक्सर भ्रम पैदा करता है।
उपराष्ट्रपति को पद से हटाने (Removal) की संवैधानिक प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हटाने का संकल्प केवल राज्यसभा में …
उपराष्ट्रपति को पद से हटाने (Removal) की संवैधानिक प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हटाने का संकल्प केवल राज्यसभा में शुरू किया जा सकता है। 2. कम-से-कम 14 दिन पूर्व लिखित सूचना आवश्यक है। 3. संकल्प राज्यसभा में तत्कालीन समस्त सदस्यों के बहुमत से पारित होना और लोकसभा द्वारा सहमत होना चाहिए। 4. संविधान उपराष्ट्रपति को हटाने के लिए कोई विशिष्ट औपचारिक आधार निर्धारित नहीं करता। उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (c) है। अनुच्छेद 67(b) के अनुसार हटाने का प्रस्ताव राज्यसभा में ही प्रारंभ होता है और उसे राज्यसभा के तत्कालीन कुल सदस्यों के बहुमत से पारित किया जाना चाहिए; इसके बाद लोकसभा की सहमति आवश्यक है। कम-से-कम 14 दिन की सूचना देनी होती है। राष्ट्रपति के महाभियोग की तरह यहाँ 'संविधान का उल्लंघन' जैसा कोई निर्धारित आधार नहीं है। इसे महाभियोग कहना भी तकनीकी रूप से सही नहीं—यह removal resolution है।
उपराष्ट्रपति पद की योग्यताओं (Qualifications) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वह भारत का नागरिक हो और 35 वर्ष की आयु पूरी कर चु…
उपराष्ट्रपति पद की योग्यताओं (Qualifications) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वह भारत का नागरिक हो और 35 वर्ष की आयु पूरी कर चुका हो। 2. वह राज्यसभा का सदस्य निर्वाचित होने के लिए अर्हित हो। 3. नामांकन के लिए कम-से-कम 20 प्रस्तावक और 20 अनुमोदक आवश्यक होते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 66(3) उपराष्ट्रपति के लिए भारतीय नागरिकता, 35 वर्ष की आयु और राज्यसभा सदस्य चुने जाने की योग्यता आवश्यक बनाता है। चुनावी कानून नामांकन के लिए 20 प्रस्तावक और 20 अनुमोदक मांगता है। तुलना के लिए राष्ट्रपति पद हेतु लोकसभा की सदस्यता-योग्यता और 50+50 प्रस्तावक/अनुमोदक चाहिए। उपराष्ट्रपति उम्मीदवार को संसद का वर्तमान सदस्य होना आवश्यक नहीं, केवल राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने योग्य होना चाहिए।
एक बहुजातीय जिले में, जहाँ आर्थिक प्रतिस्पर्धा और ऐतिहासिक शिकायतों के परिणामस्वरूप प्रायः सामुदायिक तनाव उत्पन्न होते हैं, वहाँ एक जनजातीय उपग्र…
उपर्युक्त के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- तकनीकी विकल्पों पर चर्चा करने से पहले, विरोध करने वाले जनजाति समुदाय की सांस्कृतिक चिंताओं को स्वीकार करने के साथ ही, एक सफल संघर्ष समाधान प्रक्रिया अवश्य आरंभ की जानी चाहिए।
- शहरी स्वास्थ्य चिंताओं के समाधान के लिए, सरकार को अविलंब परियोजना को आगे बढ़ाना चाहिए, जो कि किसी लघु वर्ग की भावनाओं से कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण है।
- पारस्परिक समझ विकसित करने और तनावों को कम करने में सहायता के लिए जनजाति नेताओं, पर्यावरण विशेषज्ञों, और नगर पालिका के प्रतिनिधियों को सम्मिलित करते हुए एक बहु-हितधारक संवाद मंच का गठन करना।
- साक्ष्य आधारित निर्णयन को सुकर बनाने के लिए एक स्वतंत्र पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (ESIA) को संचालित करना और प्राप्त निष्कर्षों को दोनों पक्षों के साथ पारदर्शी रूप से साझा करना।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से, इस समाधान प्रक्रिया में योगदान देंगे?
उत्तर और पूरी व्याख्या
कथनवार विश्लेषण
- कथन 1 सही: मध्यस्थता में प्रभावित समुदाय की पहचान, संस्कृति और शिकायतों को पहले सुनना विश्वास-निर्माण का आवश्यक आधार है।
- कथन 2 गलत: सार्वजनिक स्वास्थ्य महत्त्वपूर्ण है, पर किसी जनजातीय समुदाय के अधिकारों और सांस्कृतिक हितों को केवल संख्या के आधार पर दरकिनार कर परियोजना थोपना सहभागी शासन और विधिसम्मत प्रक्रिया के विरुद्ध होगा।
- कथन 3 सही: बहु-हितधारक संवाद से सभी पक्षों को साझा मंच मिलता है और तनाव कम करते हुए सहमति-आधारित विकल्प खोजे जा सकते हैं।
- कथन 4 सही: स्वतंत्र पर्यावरणीय एवं सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन तथा पारदर्शी निष्कर्ष साक्ष्य-आधारित निर्णय के लिए उपयोगी हैं।
एकात्मक शासन प्रणाली की कौन-सी विशेषता सत्य नहीं है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- BPSC की अंतिम उत्तर-कुंजी के अनुसार सही उत्तर (c) बड़े देशों के लिए आदर्श है।