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अभ्यास से समझ तक

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 127

एक सवाल हल कीजिए, उसका कारण समझिए, फिर आगे बढ़िए। करंट अफेयर्स, विषयवार अध्ययन और विगत वर्षों के प्रश्न अब एक जगह।

4666 प्रश्न संग्रह में3816 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित
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सत्र में प्रश्नों की संख्या

2521–2540 / 4666 प्रश्न

प्रश्न-संग्रह

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विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनएम. सी. मेहता बनाम भारत संघ (विभिन्न पर्यावरण मामले) में उच्चतम न्यायालय ने स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को किस अनुच्छेद का अभिन्न अंग माना?

एम. सी. मेहता बनाम भारत संघ (विभिन्न पर्यावरण मामले) में उच्चतम न्यायालय ने स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार को किस अनुच्छेद का अभिन्न अंग माना?

उत्तर और पूरी व्याख्या

Article 21 की विस्तृत न्यायिक व्याख्या में स्वच्छ पर्यावरण को जीवन के अधिकार से जोड़ा गया है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनएल. चंद्र कु मार बनाम भारत संघ (1997) मामले में अधिकरणों ( Tribunals) के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय की 7- न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने क्या व्यव…

एल. चंद्र कु मार बनाम भारत संघ (1997) मामले में अधिकरणों ( Tribunals) के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय की 7- न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने क्या व्यवस्था दी?

उत्तर और पूरी व्याख्या

एल. चंद्र कु मार मामले (1997) में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि उच्च न्यायालय का पर्यवेक्षी क्षेत्राधिकार मूल ढांचा है, अतः अधिकरणों के आदेशों के विरुद्ध अपील पहले उच्च न्यायालय की खंडपीठ में ही होगी, सीधे उच्चतम न्यायालय में नहीं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनएस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) मामले में धर्मनिरपेक्षता ( Secularism) के संदर्भ में 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने क्या व्यवस्था दी थी? 1. …

एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) मामले में धर्मनिरपेक्षता ( Secularism) के संदर्भ में 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने क्या व्यवस्था दी थी? 1. धर्मनिरपेक्षता भारतीय संविधान का एक आधारभूत लक्षण ( Basic Feature) है। 2. यदि कोई राज्य सरकार धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध कार्य करती है या सांप्रदायिकता को बढ़ावा देती है, तो उसे अनुच्छेद 356 के तहत बर्खास्त किया जा सकता है। 3. राजनीति और धर्म को एक-दूसरे से पूरी तरह अलग रखा जाना चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल को धार्मिक अपीलों के आधार पर चुनाव नहीं लड़ना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। बोम्मई मामले में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि धर्मनिरपेक्षता मूल ढांचा है और इसके उल्लंघन पर राज्य सरकार के विरुद्ध अनुच्छेद 356 की कार्रवाई वैध है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनएस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ मामला (1994) में उच्चतम न्यायालय ने निम्नलिखित में से किन विशेषताओं को संविधान के 'मूल ढांचे' का हिस्सा माना? 1. संघ…

एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ मामला (1994) में उच्चतम न्यायालय ने निम्नलिखित में से किन विशेषताओं को संविधान के 'मूल ढांचे' का हिस्सा माना? 1. संघवाद (Federalism) 2. पंथनिरपेक्षता (Secularism) 3. लोकतंत्र (Democracy) 4. सामाजिक न्याय (Social Justice) नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

उत्तर और पूरी व्याख्या

बोम्मई मामले (1994) में नौ न्यायाधीशों की पीठ ने संघवाद, पंथनिरपेक्षता, लोकतंत्र, कानून का शासन और सामाजिक न्याय को मूल ढांचे का अविभाज्य अंग माना।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनएस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ मामला (1994) में उच्चतम न्यायालय ने संघवाद के संबंध में क्या ऐतिहासिक निर्णय दिया था?

एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ मामला (1994) में उच्चतम न्यायालय ने संघवाद के संबंध में क्या ऐतिहासिक निर्णय दिया था?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। एस.आर. बोम्मई निर्णय ने स्पष्ट किया कि संघवाद भारतीय संविधान की मूल संरचना का हिस्सा है। इसका अर्थ है कि संसद संविधान संशोधन की शक्ति का उपयोग करके संघीय चरित्र को नष्ट नहीं कर सकती। इसी निर्णय ने अनुच्छेद 356 के प्रयोग को न्यायिक समीक्षा के अधीन माना और राज्यों को केंद्र की मात्र प्रशासनिक शाखा मानने की सोच को अस्वीकार किया।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनएस. आर. बोम्मई मामले (1994) में उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 356 के प्रयोग के संबंध में निर्धारित सिद्धांतों में निम्नलिखित में से कौन-सा शामि…

एस. आर. बोम्मई मामले (1994) में उच्चतम न्यायालय द्वारा अनुच्छेद 356 के प्रयोग के संबंध में निर्धारित सिद्धांतों में निम्नलिखित में से कौन-सा शामिल नहीं है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। बोम्मई निर्णय का केंद्रीय सिद्धांत यह है कि बहुमत का परीक्षण राजभवन में राज्यपाल के निजी आकलन से नहीं, विधानसभा के पटल पर होना चाहिए। न्यायालय ने अनुच्छेद 356 की उद्घोषणा को न्यायिक समीक्षा के अधीन माना और असंवैधानिक उद्घोषणा होने पर सरकार/विधानसभा की बहाली की शक्ति स्वीकार की। इसलिए बिना floor test के केवल व्यक्तिपरक संदेह पर राष्ट्रपति शासन की सिफारिश बोम्मई सिद्धांत के विपरीत है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनएस. पी. आनंद बनाम एच. डी. देवेगौड़ा मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री पद के संबंध में क्या व्यवस्था दी थी?

एस. पी. आनंद बनाम एच. डी. देवेगौड़ा मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री पद के संबंध में क्या व्यवस्था दी थी?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। सर्वोच्च न्यायालय ने S.P. Anand v. H.D. Deve Gowda में 6 नवंबर 1996 को स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 75(5) का 'मंत्री' शब्द प्रधानमंत्री को भी समाहित करता है। इसलिए कोई गैर-सांसद व्यक्ति प्रधानमंत्री नियुक्त हो सकता है, लेकिन यदि वह लगातार छह महीने तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं बनता तो पद पर नहीं रह सकता। इस निर्णय को AIR 1997 में रिपोर्ट किया गया, जिससे कई पुस्तकों में वर्ष 1997 लिखा मिलता है; निर्णय की वास्तविक तारीख 1996 है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनऑटोमोबाइल ट्रांसपोर्ट (राजस्थान) बनाम राजस्थान राज्य (1962) मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित प्रतिकरात्मक कर ( Compensatory Tax) के सि…

ऑटोमोबाइल ट्रांसपोर्ट (राजस्थान) बनाम राजस्थान राज्य (1962) मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रतिपादित प्रतिकरात्मक कर ( Compensatory Tax) के सिद्धांत का क्या अर्थ था?

उत्तर और पूरी व्याख्या

ऑटोमोबाइल ट्रांसपोर्ट मामले (1962) में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रतिकरात्मक या विनियामक कर (Regulatory Compensatory taxes / जैसे मोटर वाहन कर जो सड़कों की सुविधा के बदले लिए जाते हैं) अनुच्छेद 301 के तहत व्यापार की स्वतंत्रता में बाधा नहीं हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनकथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए: कथन (A): संविधान निर्माताओं ने नीति निदेशक तत्वों को न्यायालय द्वारा गैर-प्रवर्तनीय (Non-enforceable) बनाया। …

कथन (A) और कारण (R) पर विचार कीजिए: कथन (A): संविधान निर्माताओं ने नीति निदेशक तत्वों को न्यायालय द्वारा गैर-प्रवर्तनीय (Non-enforceable) बनाया। कारण (R): स्वतंत्रता प्राप्ति के समय नवजात भारतीय राज्य के पास इन सभी सामाजिक-आर्थिक अधिकारों को तुरंत लागू करने के लिए पर्याप्त वित्तीय और भौतिक संसाधन उपलब्ध नहीं थे। सही कूट का चयन कीजिए:

उत्तर और पूरी व्याख्या

दोनों सही हैं और व्याख्या भी सही है। वित्तीय संसाधनों की कमी और देश की व्यापक सामाजिक विविधता के कारण इन्हें नैतिक व राजनीतिक रूप से बाध्यकारी बनाया गया, विधिक रूप से नहीं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनकथन (A): 1853 के चार्टर एक्ट ने कंपनी के भारतीय शासन को किसी निश्चित 20-वर्षीय अवधि के लिए नवीनीकृत नहीं किया। कारण (R): इससे ब्रिटिश संसद को भवि…

कथन (A): 1853 के चार्टर एक्ट ने कंपनी के भारतीय शासन को किसी निश्चित 20-वर्षीय अवधि के लिए नवीनीकृत नहीं किया। कारण (R): इससे ब्रिटिश संसद को भविष्य में कंपनी के शासन को समाप्त करने की अधिक स्वतंत्रता मिली। सही विकल्प चुनिए।

उत्तर और पूरी व्याख्या

दोनों कथन सही हैं और कारण, कथन की व्याख्या करता है। 1853 में पूर्ववर्ती चार्टरों की तरह निश्चित अवधि के लिए कंपनी का शासन नवीनीकृत नहीं किया गया। इससे यह संकेत मिला कि संसद कंपनी के भारतीय प्रशासन को जब चाहे बदल या समाप्त कर सकती है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनकम्युनल अवार्ड, 1932 और पूना पैक्ट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कम्युनल अवार्ड ने दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्…

कम्युनल अवार्ड, 1932 और पूना पैक्ट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कम्युनल अवार्ड ने दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन की व्यवस्था की थी। 2. गांधीजी ने इसका विरोध करते हुए यरवदा जेल में उपवास किया। 3. पूना पैक्ट ने पृथक निर्वाचन बनाए रखा और आरक्षित सीटें घटा दीं। सही कथन कौन-से हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

कथन 1 और 2 सही हैं, जबकि कथन 3 गलत है। पूना पैक्ट ने दलित वर्गों के लिए पृथक निर्वाचन के स्थान पर संयुक्त निर्वाचन के भीतर आरक्षित सीटों की व्यवस्था स्वीकार की। प्रांतीय विधानमंडलों में आरक्षित सीटों की संख्या कम नहीं हुई, बल्कि कम्युनल अवार्ड की 71 सीटों की तुलना में बढ़कर 148 हुई।

UPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2020कल्याणकारी राज्य के आदर्श की घोषणा संविधान के किस भाग में है?
कल्याणकारी राज्य के आदर्श की घोषणा संविधान के किस भाग में है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(a) नीति-निदेशक तत्व

क्यों?

  • नीति-निदेशक तत्व कल्याणकारी राज्य की दिशा बताते हैं।
विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनकस्तूरी लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (1965) का ऐतिहासिक सिद्धांत क्या था?

कस्तूरी लाल बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (1965) का ऐतिहासिक सिद्धांत क्या था?

उत्तर और पूरी व्याख्या

कस्तूरी लाल ने sovereign/non-sovereign functions का भेद अपनाया था। बाद की संवैधानिक-अपकृत्य न्यायशास्त्र ने इस प्रतिरक्षा को काफी संकुचित किया है, इसलिए इसे आज पूर्ण सरकारी immunity नहीं समझना चाहिए।

UPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2018कानून और स्वतंत्रता का सबसे उपयुक्त संबंध क्या है?
कानून और स्वतंत्रता का सबसे उपयुक्त संबंध क्या है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(b) कानून न हों तो स्वतंत्रता भी सुरक्षित नहीं

क्यों?

  • न्यायपूर्ण कानून स्वतंत्रता की रक्षा के लिए आवश्यक ढाँचा देते हैं।
UPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2021कानून लागू करने में कार्यपालिका/प्रशासन को अनियंत्रित और दिशाहीन विवेकाधिकार देने वाला विधान किस अनुच्छेद का उल्लंघन करता है?
कानून लागू करने में कार्यपालिका/प्रशासन को अनियंत्रित और दिशाहीन विवेकाधिकार देने वाला विधान किस अनुच्छेद का उल्लंघन करता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(a) अनुच्छेद 14

क्यों?

  • अनुच्छेद 14 मनमानी राज्य कार्रवाई के विरुद्ध समानता का संरक्षण देता है।
विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनकानूनों के संबंध में 'Presumption of Constitutionality' का सामान्य अर्थ क्या है?

कानूनों के संबंध में 'Presumption of Constitutionality' का सामान्य अर्थ क्या है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (a) है। संवैधानिक न्यायशास्त्र में विधायिका के प्रति संस्थागत सम्मान के कारण सामान्य presumption रहता है कि कानून वैध है, जब तक चुनौती में पर्याप्त आधार न दिखाया जाए। लेकिन यह अंधी प्रतिरक्षा नहीं है—Fundamental Rights, manifest arbitrariness, suspect classifications या proportionality जैसे क्षेत्रों में burden और scrutiny की प्रकृति अलग हो सकती है। राष्ट्रपति की assent किसी कानून को constitutional challenge से नहीं बचाती और review के लिए कोई पाँच-वर्षीय प्रतीक्षा अवधि नहीं होती।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनकिन मामलों में UPSC से परामर्श आवश्यक नहीं है? 1. पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान। 2. सेवाओं में SC/ST दावों पर अनुच्छेद 335 के तहत विचार…

किन मामलों में UPSC से परामर्श आवश्यक नहीं है? 1. पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण का प्रावधान। 2. सेवाओं में SC/ST दावों पर अनुच्छेद 335 के तहत विचार। 3. केंद्रीय सेवाओं में भर्ती-पद्धति पर सामान्य परामर्श।

उत्तर और पूरी व्याख्या

अनुच्छेद 320(4) आरक्षण संबंधी अनुच्छेद 16(4) और SC/ST दावों संबंधी अनुच्छेद 335 के विषयों में लोक सेवा आयोग से परामर्श की अनिवार्यता को हटाता है। भर्ती-पद्धति सामान्यतः अनुच्छेद 320 के परामर्श-क्षेत्र में आती है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनकिस अधिनियम ने पहली बार केंद्रीय और प्रांतीय विषयों को अलग कर प्रांतीय शासन पर केंद्रीय नियंत्रण कुछ कम किया?

किस अधिनियम ने पहली बार केंद्रीय और प्रांतीय विषयों को अलग कर प्रांतीय शासन पर केंद्रीय नियंत्रण कुछ कम किया?

उत्तर और पूरी व्याख्या

भारत सरकार अधिनियम, 1919 ने केंद्रीय और प्रांतीय विषयों के बीच अधिक स्पष्ट विभाजन किया। इससे प्रांतीय विधानमंडलों को अपने क्षेत्र के विषयों पर कानून बनाने का बड़ा दायरा मिला। इसी अधिनियम ने प्रांतीय विषयों को आगे आरक्षित और हस्तांतरित वर्गों में बाँटकर द्वैध शासन लागू किया।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनकिस अधिनियम ने पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और कार्यकारी कार्यों में स्पष्ट पृथक्करण की दिशा में व्यवस्था की?

किस अधिनियम ने पहली बार गवर्नर-जनरल की परिषद के विधायी और कार्यकारी कार्यों में स्पष्ट पृथक्करण की दिशा में व्यवस्था की?

उत्तर और पूरी व्याख्या

1853 का चार्टर एक्ट सही उत्तर है। इसने गवर्नर-जनरल की परिषद में विधायी कार्य के लिए अतिरिक्त सदस्यों को जोड़कर कार्यपालिका और विधायिका के कार्यों में संस्थागत अंतर को अधिक स्पष्ट किया। इसी कारण इसे केंद्रीय विधायी परिषद के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है।

BPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2023किस अनुच्छेद के अंतर्गत सभापति/अध्यक्ष सदन के किसी सदस्य को उसकी मातृभाषा में बोलने की अनुमति दे सकता है?
किस अनुच्छेद के अंतर्गत सभापति/अध्यक्ष सदन के किसी सदस्य को उसकी मातृभाषा में बोलने की अनुमति दे सकता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(c) अनुच्छेद 120(1)

क्यों?

  • अनुच्छेद 120(1) संसद की कार्यवाही में भाषा से संबंधित है और पीठासीन अधिकारी सदस्य को मातृभाषा में बोलने की अनुमति दे सकता है।