विकसित ग्राम स्वराज योजना और विकेंद्रीकरण के तीन F
प्रश्न
PM विकसित ग्राम स्वराज योजना स्थानीय स्वशासन के ‘तीन F’ को किस सीमा तक मजबूत कर सकती है? विश्लेषण कीजिए।
यह अध्ययनसार का मौलिक अभ्यास प्रश्न है, वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।
आदर्श उत्तर
भूमिका: 73वें संविधान संशोधन से पंचायतों को संवैधानिक आधार मिला, पर वास्तविक स्वशासन कार्य, धन और कर्मचारियों (तीन F) के हस्तांतरण पर निर्भर है। अक्टूबर 2026 में स्वीकृत प्रधानमंत्री विकसित ग्राम स्वराज योजना संस्थागत क्षमता मजबूत करती है।
तीन F पर संभावित प्रभाव
- कार्य: ग्राम पंचायत विकास योजना, स्थानीय जरूरतों का आकलन और निर्वाचित प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण 11वीं अनुसूची के 29 विषयों पर बेहतर नियोजन में सहायक हो सकते हैं।
- वित्त: डिजिटल लेखांकन, ऑनलाइन लेखापरीक्षा और सार्वजनिक निगरानी उपलब्ध अनुदानों का प्रभावी उपयोग तथा वित्तीय अनुशासन बढ़ा सकते हैं।
- कर्मचारी: लगभग 32 लाख प्रतिनिधियों और संबंधित हितधारकों की क्षमता-वृद्धि से कार्यान्वयन, पारदर्शिता और प्रशासनिक कौशल सुधर सकते हैं।
सीमाएँ
- ₹7,395.55 करोड़ का परिव्यय स्वतंत्र वैधानिक अधिकार हस्तांतरण नहीं है; वास्तविक विकेंद्रीकरण राज्यों के निर्णय पर निर्भर रहेगा।
- कर्मियों की कमी, सीमित वित्तीय स्वायत्तता और विभागीय नियंत्रण पंचायतों की क्षमता बाधित कर सकते हैं।
- डिजिटल विभाजन तथा ग्राम सभा में महिलाओं और वंचित समुदायों की अपर्याप्त भागीदारी अपेक्षित परिणाम घटा सकती है।
- अधिकार बनाम प्रशिक्षण: बेहतर प्रशिक्षण से पंचायत की कार्य-कुशलता बढ़ेगी, किंतु विभागीय योजनाओं पर अंतिम नियंत्रण, राजस्व जुटाने की शक्ति और कर्मचारियों की तैनाती राज्य के पास रहने पर स्वशासन सीमित रहेगा।
आगे की राह
राज्य पंचायतों के कार्य स्पष्ट करें, राज्य वित्त आयोग की अनुशंसाएँ लागू करें और प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करें। ग्राम सभा की भागीदारी तथा सामाजिक लेखापरीक्षा को परिणाम-सूचकों से मापा जाए।
निष्कर्ष: योजना तीन F के बेहतर उपयोग की क्षमता बढ़ाती है; वास्तविक अधिकार, संसाधन और कर्मी देना राज्यों का अनिवार्य अगला कदम है।