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मौलिक अभ्यास प्रश्न • GS-II

निर्वाचन आयोग: स्वायत्तता, न्यायिक समीक्षा और पारदर्शिता

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10 अंकशब्द-सीमा: 150 शब्द29 अक्टूबर 2026

प्रश्न

निर्वाचन आयोग की स्वायत्तता के साथ न्यायिक समीक्षा और प्रशासनिक पारदर्शिता क्यों आवश्यक है?

यह अध्ययनसार का मौलिक अभ्यास प्रश्न है, वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।

आदर्श उत्तर

भूमिका: अनुच्छेद 324 निर्वाचन आयोग को स्वतंत्र चुनाव प्रबंधन का संवैधानिक आधार देता है। संस्थागत स्वायत्तता का अर्थ न्यायिक या सार्वजनिक उत्तरदायित्व से मुक्ति नहीं है।

पूरक भूमिकाएँ

  • स्वायत्तता: मतदाता सूची, मतदान और निष्पक्ष प्रशासन के निर्णय राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रहें।
  • न्यायिक समीक्षा: मनमानी, अधिकार-ह्रास या कानून-विरोधी निर्वाचन निर्णय संवैधानिक कसौटी पर जाँचे जा सकें।
  • पारदर्शिता: पुनरीक्षण के मानदंड, नागरिक नोटिस, कारणयुक्त आदेश और सुधार-प्रक्रिया सार्वजनिक हों।
  • जवाबदेही: शिकायत निवारण, अपील, निष्पक्ष सुनवाई तथा मतदाताओं की गोपनीयता सुरक्षित रहे।
  • प्रौद्योगिकी का संतुलन: डिजिटल त्रुटि-संकेत को जाँच का साधन बनाया जाए, स्वतः विलोपन का आधार नहीं; प्रत्येक प्रभावित मतदाता को निर्णय चुनौती देने का प्रभावी अवसर मिले।

उदाहरण: 2026 में SIR की ‘तार्किक विसंगति’ संबंधी न्यायालयीय टिप्पणियाँ दिखाती हैं कि डेटा-जाँच और उचित सुनवाई जरूरी हैं; टिप्पणियों को अंतिम निर्णय न माना जाए।

निष्कर्ष: आयोग की निर्णयगत स्वतंत्रता, न्यायिक नियंत्रण और नागरिक-केंद्रित पारदर्शिता परस्पर विरोधी नहीं, बल्कि निष्पक्ष चुनाव के आधार हैं।

आधिकारिक संदर्भ तथा स्रोत