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मौलिक अभ्यास प्रश्न • GS-I/III

भूजल संकट: तकनीक, समुदाय और कृषि का समन्वय

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15 अंकशब्द-सीमा: 250 शब्द28 अक्टूबर 2026

प्रश्न

भारत में भूजल संकट के समाधान के लिए भू-स्थानिक तकनीक, समुदाय आधारित प्रबंधन और कृषि जल-दक्षता के समन्वय की आवश्यकता है। ‘पुनः भरण’ ऐप के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।

यह अध्ययनसार का मौलिक अभ्यास प्रश्न है, वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।

आदर्श उत्तर

भूमिका: भारत में भूजल पेयजल, कृषि और उद्योग का महत्त्वपूर्ण आधार है, लेकिन अंधाधुंध दोहन तथा असमान वर्षा से क्षेत्रीय संकट बढ़ता है। अक्टूबर 2026 में प्रारंभ ‘पुनः भरण’ ऐप संभावित कृत्रिम पुनर्भरण स्थल खोजने के लिए भू-स्थानिक सूचनाएँ उपलब्ध कराता है।

समन्वित रणनीति क्यों आवश्यक?

  • भू-स्थानिक तकनीक: वर्षा, ढाल, जलस्तर, भूजल उत्पादन और जलनिकासी संबंधी परतों से उपयुक्त स्थल चुने जा सकते हैं। ऐप आसपास तीन किलोमीटर तक संभावित पुनर्भरण क्षेत्र तथा संरचनाएँ पहचानने में सहायता देता है।
  • स्थानीय वैज्ञानिक जाँच: उपग्रह और मानचित्र से प्राप्त सुझावों का स्थल-निरीक्षण, जलभृत की पारगम्यता तथा जल गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही निर्माण होना चाहिए।
  • समुदाय की भागीदारी: ग्राम सभा जल-बजट, स्थानीय जलस्रोतों के रखरखाव, भूजल निगरानी और साझा उपयोग नियमों में शामिल हो। इससे संरचनाओं की दीर्घकालीन उपयोगिता बढ़ती है।
  • कृषि जल-दक्षता: सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण, जल-अनुकूल फसल चक्र तथा सिंचाई समय-सारणी से जल की माँग घटानी होगी। केवल पुनर्भरण, बढ़ते दोहन को नहीं रोक सकता।

प्रमुख चुनौतियाँ एवं उपाय

कठोर शैलों की सीमित भंडारण क्षमता, शहरी प्रदूषण, गाद जमना, भूमि-अधिकार विवाद और वास्तविक जल बचत का मापन कठिनाई पैदा करते हैं। जिला-स्तर की तकनीकी सहायता, सार्वजनिक जलस्तर निगरानी, जल गुणवत्ता सुरक्षा, मनरेगा से उपयुक्त संरचनाओं का रखरखाव तथा अटल भूजल जैसी सामुदायिक पहलों का संयोजन उपयोगी होगा।

निष्कर्ष: ‘पुनः भरण’ को केवल मानचित्र-आधारित निर्माण कार्यक्रम नहीं, बल्कि वैज्ञानिक पुनर्भरण, जिम्मेदार दोहन और स्थानीय जल-शासन का साधन बनाना आवश्यक है।

आधिकारिक संदर्भ