कृत्रिम भूजल पुनर्भरण: स्थल चयन के कारक और सीमाएँ
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प्रश्न
कृत्रिम भूजल पुनर्भरण के स्थल चयन को प्रभावित करने वाले भौतिक कारकों और प्रमुख तकनीकी सीमाओं की चर्चा कीजिए।
यह अध्ययनसार का मौलिक अभ्यास प्रश्न है, वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।
आदर्श उत्तर
भूमिका: कृत्रिम भूजल पुनर्भरण में वर्षाजल या अन्य स्वच्छ जल को वैज्ञानिक ढंग से जलभृत में पहुँचाया जाता है। इसकी सफलता सही स्थल पर निर्भर करती है।
भौतिक कारक
- भूगर्भ एवं मिट्टी: रेत, बजरी, दरारदार शैल तथा मिट्टी की पारगम्यता जल प्रवेश की दर निर्धारित करती है।
- स्थलाकृति: ढाल, जलनिकासी और नालों का स्वरूप बहाव की मात्रा तथा उपयुक्त संरचना तय करते हैं।
- जलभृत स्थिति: मौजूदा जलस्तर, खाली भंडारण स्थान, शैल की मोटाई और वर्षा का मौसमी वितरण देखना पड़ता है।
- गुणवत्ता: दूषित वर्षाजल, सीवेज या औद्योगिक अपवाह को सीधे जलभृत तक पहुँचाना जोखिमपूर्ण है।
तकनीकी सीमाएँ
भू-स्थानिक मानचित्र भूमिगत दरारों की स्थिति नहीं बताते। गाद से संरचनाएँ बंद हो सकती हैं; कुछ क्षेत्रों में जलभराव या प्रदूषण बढ़ सकता है। ऐप की स्थल-सिफारिश अंतिम तकनीकी स्वीकृति नहीं है।
निष्कर्ष: मानचित्र, भूभौतिकी, मैदानी परीक्षण, जल गुणवत्ता निगरानी और नियमित रखरखाव का संयोजन ही टिकाऊ पुनर्भरण सुनिश्चित करता है।