प्रवाल भित्तियाँ: महत्त्व, संकट और संरक्षण
प्रश्न
प्रवाल भित्तियों के पारिस्थितिक और आर्थिक महत्त्व को स्पष्ट करते हुए IUCN के 2026 वैश्विक आकलन के आधार पर जोखिम, कारण एवं संरक्षण की रणनीति का विश्लेषण कीजिए।
यह अध्ययनसार का मौलिक अभ्यास प्रश्न है, वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।
आदर्श उत्तर
भूमिका: प्रवाल भित्तियाँ समुद्र तल के अत्यंत छोटे भाग पर फैली होने के बावजूद लगभग एक-चौथाई समुद्री मछली प्रजातियों को सहारा देती हैं। IUCN के अक्टूबर 2026 आकलन में 127 में से 122 उथली गर्म जल की प्रवाल पारिस्थितिकी इकाइयाँ भविष्य के तापीय जोखिम सहित घोर संकटग्रस्त वर्ग में रखी गईं। यह भविष्य का जोखिम है, वर्तमान पूर्ण विनाश नहीं।
पारिस्थितिक एवं आर्थिक महत्त्व
- जैव विविधता: प्रवाल मछलियों, अकशेरुकी जीवों और संपूर्ण समुद्री खाद्य-जाल के लिए आवास तथा प्रजनन-स्थल हैं।
- आजीविका: तटीय मत्स्य पालन, भोजन और समुद्री पर्यटन को समर्थन मिलता है।
- तटीय सुरक्षा: भित्तियाँ तरंग-ऊर्जा घटाकर तटों को क्षरण तथा बाढ़ से बचाने में सहयोग करती हैं।
जोखिम एवं कारण
समुद्री तापीय लहरें सहजीवी शैवाल को प्रभावित कर विरंजन और मृत्यु का जोखिम बढ़ाती हैं। अत्यधिक मत्स्यन शाकाहारी मछलियाँ घटाकर शैवाल विस्तार बढ़ाता है; प्रदूषण, तलछट तथा अनियंत्रित पर्यटन पुनर्प्राप्ति कठिन करते हैं। IUCN के अनुसार केवल प्रेक्षित ऐतिहासिक परिवर्तन लेने पर 24% इकाइयाँ घोर संकटग्रस्त थीं; भविष्य का तापीय दबाव जोड़ने से यह 96% हुआ।
संरक्षण की रणनीति
- ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन घटाकर समुद्र का बढ़ता ताप नियंत्रित करना।
- मत्स्यन नियमन, सीवेज उपचार, पोषक प्रदूषण और तटीय निर्माण दबाव घटाना।
- ताप-सहनशील भित्तियों की रक्षा तथा वैज्ञानिक निगरानी और स्थानीय समुदाय आधारित संरक्षण बढ़ाना।
- लक्षद्वीप, मन्नार की खाड़ी और अंडमान-निकोबार जैसे भारतीय क्षेत्रों में स्थान-विशिष्ट योजना बनाना।
निष्कर्ष: प्रवाल संरक्षण के लिए वैश्विक जलवायु कार्रवाई और स्थानीय पारिस्थितिक प्रबंधन दोनों अनिवार्य हैं।