IUCN प्रवाल भित्ति आकलन 2026: 96% जोखिम का वास्तविक अर्थ और भारत की चुनौती
IUCN के पहले वैश्विक पारिस्थितिकी तंत्र आकलन में 127 भित्ति क्षेत्र; 122 भविष्य में गंभीर संकटग्रस्त, 30 वर्तमान में; प्रवाल विज्ञान और संरक्षण।
प्रकाशन: 28 अक्टूबर 2026 · पाठ्यक्रम: GS-III: पर्यावरण, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन
चर्चा में क्यों?
अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने 22 अक्टूबर 2026 को गर्म, उथले समुद्री जल की प्रवाल भित्तियों का पहला वैश्विक रेड लिस्ट ऑफ इकोसिस्टम्स आकलन जारी किया। इसमें कुल 127 प्रवाल भित्ति पारिस्थितिकी क्षेत्र परखे गए। तापीय तनाव के भविष्य के अनुमान जोड़ने पर 122 क्षेत्र अर्थात् लगभग 96% वर्ष 2075 तक पारिस्थितिकी तंत्र के ढहने के अत्यंत ऊँचे जोखिम में आते हैं।
सबसे महत्त्वपूर्ण स्पष्टीकरण: 96 प्रतिशत प्रवाल भित्तियाँ आज समाप्त नहीं हो चुकी हैं। यह भविष्य के जोखिम का वैज्ञानिक वर्गीकरण है। अध्ययन 22 अक्टूबर का है, इसलिए इसे 28 अक्टूबर की ताज़ा घोषणा नहीं, बल्कि सप्ताह की प्रमुख पर्यावरण रिपोर्ट के रूप में रखा गया है।
आधिकारिक तथ्य: संक्षिप्त सार
- आकलन की संस्था: IUCN; उपकरण: रेड लिस्ट ऑफ इकोसिस्टम्स, प्रजाति रेड लिस्ट से अलग।
- कुल 127 प्रवाल पारिस्थितिकी क्षेत्र, संयुक्त क्षेत्रफल लगभग 1,88,362 वर्ग किलोमीटर।
- भविष्य के तापीय तनाव सहित 122/127 क्षेत्र (96%) घोर संकटग्रस्त; ये लगभग 99.8% आकलित भित्ति क्षेत्रफल को दर्शाते हैं।
- केवल पिछले 50 वर्षों के प्रेक्षित परिवर्तनों पर 30 क्षेत्र (24%) घोर संकटग्रस्त; 116 क्षेत्र (91%) किसी न किसी संकट श्रेणी में।
- पश्चिमी गैलापागोस का एक तंत्र ध्वस्त श्रेणी में; चार में पर्याप्त आँकड़ों का अभाव।
- समुद्री तापीय लहरें, अत्यधिक मत्स्यन, प्रदूषण और अवसादन प्रमुख दबाव हैं।
प्रजाति रेड लिस्ट बनाम पारिस्थितिकी तंत्र रेड लिस्ट
IUCN की प्रजाति रेड लिस्ट किसी वनस्पति या जीव की विलुप्ति के जोखिम को वर्गीकृत करती है। इसके विपरीत रेड लिस्ट ऑफ इकोसिस्टम्स (RLE) पूछती है कि क्या एक पूरा पारिस्थितिकी तंत्र अपनी विशिष्ट संरचना और कार्यप्रणाली खोकर ढह सकता है। प्रवाल भित्ति केवल प्रवाल नहीं—शैवाल, मछली, सूक्ष्मजीव, कैल्शियम कार्बोनेट ढाँचा, जल की गुणवत्ता और पारिस्थितिक संबंधों का संयुक्त तंत्र है।
घोर संकटग्रस्त (Critically Endangered) = अत्यधिक ऊँचा पतन जोखिम; ध्वस्त (Collapsed) = पारिस्थितिकी तंत्र का वास्तविक कार्यात्मक ढहना। इसलिए दोनों श्रेणियाँ समान नहीं।
रिपोर्ट के आँकड़े: वर्तमान और भविष्य अलग हैं
| आकलन आधार | निष्कर्ष |
|---|---|
| कुल अध्ययन | 127 क्षेत्र |
| पिछले 50 वर्षों के परिवर्तन से घोर संकट | 30 (24%) |
| पिछले 50 वर्षों में किसी न किसी खतरे में | 116 (91%) |
| भविष्य के तापीय जोखिम सहित घोर संकट | 122 (96%) |
| ध्वस्त पारिस्थितिकी तंत्र | पश्चिमी गैलापागोस—1 |
| अपर्याप्त आँकड़ा | 4 |
भविष्य के आकलन में IPCC के SSP2-4.5 परिदृश्य का तापीय दबाव शामिल है। यह वैज्ञानिक मॉडल है, आज की प्रत्यक्ष मृत्यु-गणना नहीं। इसीलिए 24% और 96% आँकड़े परस्पर विरोधी नहीं, अलग समय एवं आकलन के आधार हैं।
प्रवाल क्या हैं और उनकी भित्तियाँ कैसे बनती हैं?
प्रवाल छोटे समुद्री अकशेरुकी जीव हैं। रीफ बनाने वाले अनेक प्रवाल निडेरिया संघ से संबंधित होते हैं और कैल्शियम कार्बोनेट का ढाँचा बनाते हैं। अनेक प्रवालों की कोशिकाओं में जूजैंथेले कहलाने वाले प्रकाश-संश्लेषी सहजीवी शैवाल रहते हैं। ये शैवाल ऊर्जा और रंग प्रदान करते हैं; प्रवाल उन्हें संरक्षण तथा पोषक तत्व देते हैं।
विरंजन (Bleaching) तब दिखता है जब गर्मी या अन्य तनाव से प्रवाल के शैवाल या उनके रंगद्रव्य घट जाते हैं और सफेद कंकालीय ढाँचा दिखाई देता है। विरंजन का अर्थ तुरंत मृत्यु नहीं; तनाव घटने पर कुछ प्रवाल सुधर सकते हैं, लेकिन बार-बार लंबी ऊष्मा लहरें मृत्यु की संभावना बढ़ा देती हैं।
पारिस्थितिकी और आर्थिक महत्त्व
भित्तियाँ महासागर के अत्यल्प भू-क्षेत्रफल में होती हैं, लेकिन लगभग एक-चौथाई समुद्री मछली प्रजातियों को आश्रय देती हैं। ये मछुआरों की आजीविका, समुद्री खाद्य जाल, पर्यटन और तटीय लहरों के प्रभाव को कम करने के लिए आवश्यक हैं। तट पर प्राकृतिक ढाल कमजोर होने से तूफान, समुद्री कटाव और संपत्ति के नुकसान की आशंका बढ़ सकती है।
इसलिए प्रवाल संरक्षण केवल किसी सुंदर जीव या पर्यटन स्थल का प्रश्न नहीं: यह खाद्य सुरक्षा + आजीविका + आपदा जोखिम न्यूनीकरण + समुद्री जैव विविधता को जोड़ने वाली नीति है।
मुख्य खतरे: ताप, मत्स्यन और पोषक असंतुलन
IUCN के अनुसार पिछले 50 वर्षों का तापीय तनाव लगभग 77% प्रवाल पारिस्थितिकी क्षेत्रों को प्रभावित करता है। रिपोर्ट में 63% क्षेत्रों में प्रवाल, शैवाल और मछलियों के संतुलन में दबाव का उल्लेख है। शाकाहारी पैरटफिश जैसी मछलियाँ शैवाल नियंत्रित रखती हैं; इनके अत्यधिक दोहन से शैवाल प्रवालों के स्थान पर फैल सकते हैं। ग्रुपर जैसी शिकारी मछलियाँ भी खाद्य जाल को संतुलित करती हैं।
सीवेज, उर्वरक अपवाह तथा तटीय निर्माण से आने वाली गाद प्रवालों पर बैठ सकती है। समुद्री अम्लीकरण से कैल्शियम कार्बोनेट का निर्माण चुनौतीपूर्ण होता है। अत्यधिक मत्स्यन और स्थानीय प्रदूषण पर काबू पाना तात्कालिक है, जबकि बढ़ते समुद्री ताप को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक उत्सर्जन घटाना आवश्यक है।
भारत और विश्व के मानचित्र में महत्त्वपूर्ण क्षेत्र
- लक्षद्वीप: अरब सागर के प्रवाल एटॉल, द्वीपीय पारिस्थितिकी।
- अंडमान-निकोबार: बंगाल की खाड़ी–अंडमान सागर का विविध प्रवाल क्षेत्र।
- मन्नार की खाड़ी: तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट से संबंधित समृद्ध समुद्री पारिस्थितिकी।
- कच्छ की खाड़ी: गुजरात के तटीय एवं ज्वार प्रभावित प्रवाल।
- ग्रेट बैरियर रीफ: ऑस्ट्रेलिया; कोरल ट्राएंगल: पश्चिमी प्रशांत एवं दक्षिण-पूर्व एशिया; गैलापागोस: इक्वाडोर के प्रशांत क्षेत्र में।
परीक्षा में 'प्रवाल केवल गर्म समुद्रों में मिलते हैं' जैसा कथन भी सावधानी से पढ़ें; ठंडे गहरे पानी के प्रवाल भी होते हैं, पर यह विशेष आकलन गर्म, उथली-जल की भित्तियों पर केंद्रित है।
सुरक्षा और आगे की राह: दो स्तर जरूरी
स्थानीय स्तर: समुद्री संरक्षित क्षेत्र, अपशिष्ट जल उपचार, तटीय निर्माण पर निगरानी, मछली पकड़ने के वैज्ञानिक नियम, मत्स्य समुदायों की भागीदारी और प्रवाल का दीर्घकालीन प्रेक्षण। कुछ स्थानों पर प्रवाल नर्सरी या बायोरॉक जैसी बहाली तकनीकों का प्रयोग किया जा सकता है, लेकिन इन्हें सार्वभौमिक समाधान नहीं मानना चाहिए।
वैश्विक स्तर: समुद्री तापीय लहरों को सीमित करने के लिए ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में कमी और जलवायु अनुकूलन आवश्यक है। थर्मल रिफ्यूजिया अपेक्षाकृत कम तापीय दबाव वाले स्थान हो सकते हैं, लेकिन ये स्थायी सुरक्षा का वादा नहीं हैं। निष्कर्ष: भित्तियों की रक्षा के लिए स्थानीय प्रदूषण नियंत्रण और वैश्विक जलवायु कार्रवाई दोनों एक साथ जरूरी हैं।
प्रारंभिक परीक्षा की प्रमुख भूलें
- 96% = 2075 तक का जोखिम वर्गीकरण, अभी नष्ट हो चुकी भित्तियों की संख्या नहीं।
- 24% = प्रेक्षित परिवर्तनों के आधार पर घोर संकटग्रस्त श्रेणी, 91% = किसी भी खतरे में।
- प्रवाल जीव हैं; जूजैंथेले सहजीवी शैवाल।
- विरंजन और स्थायी मृत्यु समान नहीं।
- रेड लिस्ट ऑफ इकोसिस्टम्स को प्रजाति रेड लिस्ट से अलग समझें।
IUCN की विधि: 96 प्रतिशत का आँकड़ा आखिर कैसे निकला?
रिपोर्ट की पद्धति समझना उसके आँकड़े याद करने से भी महत्त्वपूर्ण है। IUCN की पारिस्थितिकी तंत्र रेड लिस्ट किसी प्रजाति के विलुप्त होने के बजाय पूरा पारिस्थितिकी तंत्र अपनी पहचान और प्रमुख पारिस्थितिक कार्यप्रणाली खोने की संभावना का मूल्यांकन करती है। यहाँ अध्ययन की इकाई एक-एक प्रवाल पॉलीप, एक पर्यटन स्थल या एक देश नहीं, बल्कि अलग प्रवाल पारिस्थितिकी क्षेत्र है।
वैज्ञानिकों ने 127 उष्ण और उथले जल के प्रवाल क्षेत्रों के लिए पिछले लगभग 50 वर्षों के प्रेक्षित परिवर्तन, वर्तमान स्थिति और भविष्य के समुद्री तापीय जोखिम का उपयोग किया। पहले केवल इतिहास और वर्तमान के आधार पर 30 क्षेत्र (24%) घोर संकटग्रस्त थे। जब अगले 50 वर्षों का तापीय दबाव जोड़ा गया तो 122 क्षेत्र (96%) घोर संकटग्रस्त वर्ग में आए। इसका अर्थ वर्तमान की संख्या गलत होना नहीं, बल्कि भविष्य का दबाव वर्तमान स्थिति को अत्यधिक खराब कर सकता है।
| शब्द | वास्तविक अर्थ |
|---|---|
| घोर संकटग्रस्त | पारिस्थितिकी पतन का अत्यधिक ऊँचा जोखिम |
| ध्वस्त | प्रमुख पहचान/कार्यप्रणाली का पहले ही गहरा क्षरण |
| अपर्याप्त आँकड़े | विश्वसनीय वर्गीकरण के लिए पर्याप्त जानकारी नहीं |
| 2075 तक जोखिम | परिदृश्य-आधारित संभावित भविष्य, पूर्वनिर्धारित नियति नहीं |
रिपोर्ट का आकलन 80 से अधिक देशों एवं क्षेत्रों तक फैला है, और 250 से अधिक विशेषज्ञों ने दस क्षेत्रीय समूहों में योगदान किया। इसलिए यह एक समुद्री तट पर किए गए निरीक्षण का परिणाम नहीं, बल्कि वैश्विक बहु-विशेषज्ञ आकलन है। आधिकारिक पद्धति एवं परिणाम।
प्रवाल जीवविज्ञान: पॉलीप से विशाल भित्ति तक
एक प्रवाल पॉलीप छोटा समुद्री जीव है। रीफ निर्माताओं के अनेक पॉलीप समूहों में रहते और अपने आसपास कैल्शियम कार्बोनेट का कठोर बाह्य ढाँचा बनाते हैं। पुरानी पीढ़ियों के ढाँचों पर नई पीढ़ियाँ बढ़ती हैं; बहुत लंबे समय में यही निर्माण विस्तृत भित्ति का रूप ले सकता है। जीवित प्रवाल, मृत कैल्शियम कार्बोनेट ढाँचा, सहजीवी शैवाल और उनसे जुड़े जीवों को एक साथ देखकर ही पारिस्थितिकी समझ आती है।
प्रकाश-संश्लेषी शैवाल की भूमिका: सामान्यतः जूजैंथेले कहे जाने वाले सहजीवी सूक्ष्म शैवाल सूर्य का प्रकाश लेकर जैविक ऊर्जा बनाते हैं। बदले में प्रवाल उन्हें सुरक्षित वातावरण तथा कार्बन डाइऑक्साइड और पोषक तत्त्व देते हैं। इसलिए सूर्य का प्रकाश, अपेक्षाकृत साफ समुद्री जल, उपयुक्त तापमान और संतुलित समुद्री रसायनिकी अनेक उथली उष्णकटिबंधीय भित्तियों के लिए अनुकूल रहते हैं। लेकिन प्रवाल की सभी प्रजातियाँ केवल इसी प्रकार के उथले गर्म पानी में नहीं पाई जातीं; गहरे और ठंडे पानी में भी कुछ प्रवाल होते हैं।
अम्लीकरण कैसे नुकसान करता है? वायुमंडलीय कार्बन डाइऑक्साइड समुद्री जल में घुलकर कार्बोनेट रसायनिकी बदलती है और समुद्री जल का pH घटा सकती है। यह प्रक्रिया कैल्शियम कार्बोनेट बनाने के लिए आवश्यक कार्बोनेट आयनों की उपलब्धता घटाती है। परिणामस्वरूप रीफ निर्माण और पहले से बने ढाँचे की स्थिरता को चुनौती हो सकती है। इसे केवल 'समुद्र पूरी तरह अम्ल बन गया' कहना वैज्ञानिक रूप से गलत है।
तीन प्रमुख भित्ति आकृतियाँ और मानचित्र पर पहचान
तटीय या फ्रिंजिंग भित्ति (Fringing reef): समुद्री तट के समीप लगभग सीधे विकसित होती है। अवरोधक भित्ति (Barrier reef): तट से कुछ दूरी पर विस्तृत भित्ति होती है और बीच में लैगून हो सकता है। वलयाकार प्रवाल द्वीप या एटॉल (Atoll): प्रायः गोलाकार/अर्ध-गोलाकार रीफ जो बीच में लैगून को घेरती है; कई एटॉल पुराने ज्वालामुखीय द्वीपों के धँसने और प्रवाल वृद्धि के लंबे भूवैज्ञानिक इतिहास से जुड़े हैं।
| भारतीय क्षेत्र | स्थिति और परीक्षा संबंध |
|---|---|
| लक्षद्वीप | अरब सागर—एटॉल, लैगून तथा द्वीपीय संवेदनशीलता |
| मन्नार की खाड़ी | भारत का दक्षिण-पूर्वी तट—समुद्री जैवमंडल और मत्स्य समुदाय |
| कच्छ की खाड़ी | गुजरात—ज्वार, तलछट और उद्योग/तटीय गतिविधियों का प्रभाव |
| अंडमान-निकोबार | बंगाल की खाड़ी एवं अंडमान सागर—विविध द्वीपीय प्रवाल समुदाय |
मानचित्र प्रश्न में ग्रेट बैरियर रीफ—ऑस्ट्रेलिया, कोरल ट्राएंगल—दक्षिण-पूर्व एशिया एवं पश्चिमी प्रशांत, लाल सागर—अफ्रीका और अरब प्रायद्वीप के बीच तथा गैलापागोस—प्रशांत महासागर में इक्वाडोर को स्पष्ट पहचानें। विश्व में कोई क्षेत्र संकटग्रस्त है तो इसका अर्थ उसके सभी स्थानों का समान रूप से नष्ट होना नहीं।
विरंजन के बाद क्या होता है? एक कारण-प्रभाव शृंखला
मान लीजिए गर्मियों में समुद्री तापमान सामान्य से लंबे समय तक ऊपर बना रहता है। प्रवाल और शैवाल का सहजीवी संबंध तनाव में आता है; शैवाल या उनके रंगद्रव्य घटते हैं और प्रवाल विरंजित दिखता है। इस समय प्रवाल जीवित हो सकता है लेकिन उसकी ऊर्जा आपूर्ति कमजोर हो जाती है। यदि तापमान जल्द सामान्य हो जाए तो कई प्रवालों में सहजीवन लौट सकता है। यदि ऊष्मा लहर लंबी या बारंबार हो, तो ऊतक क्षति, रोग और मृत्यु का जोखिम बढ़ता है।
भित्ति मरने या कमजोर होने पर उस पर शैवाल फैल सकते हैं; छोटी मछलियों के आश्रय कम होते हैं; बड़े शिकारी व मछुआरों की आजीविका प्रभावित होती है। जब लहरों को रोकने वाला जीवित और मजबूत रीफ कमजोर होता है, तो तटीय क्षरण और समुद्री आपदा का जोखिम भी बढ़ सकता है।
सकारात्मक प्रतिक्रिया का उदाहरण: शाकाहारी पैरटफिश शैवाल नियंत्रित रखती है। इनके अत्यधिक दोहन से शैवाल का विस्तार बढ़ सकता है, जिससे नए प्रवाल लार्वा का बसना कठिन होता है। इस तरह अत्यधिक मत्स्यन और तापीय तनाव एक-दूसरे के प्रभाव को बढ़ा सकते हैं। इसलिए जलवायु उपायों के साथ मत्स्यन प्रबंधन भी जरूरी है।
IUCN के अतिरिक्त खतरा-सूचक: 77%, 63%, 45% और 25%
आधिकारिक विश्लेषण के अनुसार बीते 50 वर्षों का समुद्री तापीय तनाव 77% प्रवाल पारिस्थितिकी क्षेत्रों पर बड़ा दबाव रहा है। 63% क्षेत्रों में प्रवाल, शैवाल और मछलियों का संतुलन प्रभावित पाया गया। 45% भित्ति तंत्र इतने छोटे या पृथक हैं कि एक बड़ा तूफान, रोग या विरंजन घटना भी भारी विनाशकारी हो सकती है। 25% क्षेत्रों में जीवित भित्ति का बहुत-सा हिस्सा पहले ही समाप्त हो गया है। ये सभी प्रतिशत अलग संकेतकों के हैं; इन्हें जोड़कर कुल विनाश प्रतिशत निकालना गलत होगा।
भविष्य के तापीय दबाव के लिए IPCC का SSP2-4.5 परिदृश्य लिया गया। इस अनुमान में अकेला तापीय तनाव ही लगभग 95% क्षेत्रों को घोर संकटग्रस्त वर्ग में पहुँचा सकता है। यह जोखिम-आकलन विभिन्न नीति और जलवायु परिस्थितियों के साथ बदल सकता है। इसके बावजूद वर्तमान चेतावनी गंभीर है: यदि विरंजन की घटनाओं के बीच पर्याप्त पुनर्प्राप्ति समय नहीं मिला, तो रीफ के जीवित रहने की क्षमता घटेगी।
परीक्षा चेतावनी: “95% ताप-जोखिम” और “96% कुल अंतिम वर्गीकरण” दो संबंधित, पर अलग आँकड़े हैं। साथ ही 99.8% भित्ति क्षेत्रफल का प्रतिनिधित्व करते 122 पारिस्थितिकी क्षेत्र हैं; क्षेत्रफल प्रतिशत और क्षेत्रों की संख्या का प्रतिशत एक जैसी इकाई नहीं।
संरक्षण की नीति: किस क्षेत्र में कौन-सा उपाय उपयोगी?
| परिस्थिति | प्राथमिक समाधान | सीमा |
|---|---|---|
| बार-बार विरंजन | वैश्विक उत्सर्जन कटौती, ताप निगरानी, स्थानीय तनाव घटाना | स्थानीय पुनर्स्थापना वैश्विक ताप को रोक नहीं सकती |
| शैवाल का अत्यधिक विस्तार | शाकाहारी मछलियों का संरक्षण, पोषक प्रदूषण नियंत्रण | मत्स्य आजीविका के वैकल्पिक उपाय आवश्यक |
| गाद और औद्योगिक अपवाह | तटीय भूमि उपयोग नियोजन, सीवेज उपचार और निगरानी | अनेक प्रदूषक स्रोतों में बहु-विभागीय समन्वय चाहिए |
| छोटी और पृथक भित्ति | संरक्षित क्षेत्र, प्राकृतिक पुनर्प्राप्ति क्षेत्रों की पहचान | एक बड़ी चरम घटना फिर भी भारी नुकसान पहुँचा सकती है |
| क्षतिग्रस्त, किन्तु पुनर्जीवित हो सकने वाली भित्ति | वैज्ञानिक परीक्षण सहित नर्सरी, प्रवाल प्रत्यारोपण | लागत, जैविक उपयुक्तता और दीर्घकालीन प्रभाव सीमित हो सकते हैं |
थर्मल रिफ्यूजिया वे संभावित स्थान हैं जहाँ तापीय दबाव तुलनात्मक रूप से कम हो सकता है। इन्हें संरक्षण की प्राथमिकता में रखना उपयोगी है, मगर जलवायु परिवर्तन के साथ उनकी उपयुक्तता भी बदल सकती है। बायोरॉक जैसी प्रवाल बहाली तकनीकें शोध एवं स्थानीय प्रयोग की श्रेणी में आती हैं; इन्हें समुद्री पारिस्थितिकी की सार्वभौमिक मरम्मत-तकनीक बताना अनुचित होगा।
मछुआरे, द्वीप समुदाय, पर्यटक और वैज्ञानिक सभी हितधारक हैं। निगरानी के लिए जीवित प्रवाल आवरण, मछली विविधता, समुद्री ताप, जल गुणवत्ता और पुनर्प्राप्ति की दर जैसे अलग-अलग संकेतक उपयोगी हैं। केवल समुद्री संरक्षित क्षेत्र का आकार सफलता का पूरा प्रमाण नहीं।
मुख्य परीक्षा में रिपोर्ट का उपयोग: आयाम और निष्कर्ष
पर्यावरणीय आयाम: समुद्री जैव विविधता, सहजीवन, भोजन शृंखला और समुद्र के तापीय तनाव का प्रभाव। आर्थिक आयाम: मत्स्य पालन, तटीय पर्यटन और जीविकोपार्जन पर संभावित असर। आपदा आयाम: प्रवालों की टूट-फूट से समुद्री लहरों, कटाव और तटीय बस्तियों की सुरक्षा कमजोर हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय आयाम: अलग-अलग देशों में मत्स्यन तथा प्रदूषण नियंत्रण का प्रयास पर्याप्त नहीं होगा यदि वैश्विक उत्सर्जन तेजी से बढ़ता रहा।
उत्तर में पहले 127 और 122 का तथ्य, फिर भित्ति का पारिस्थितिकी कार्य, उसके बाद तापीय विरंजन + स्थानीय दबाव, अंत में स्थान-विशिष्ट संरक्षण + उत्सर्जन में कटौती का दोहरे स्तर वाला समाधान लिखें।
एक संभावित निष्कर्ष: “प्रवाल भित्तियों का संरक्षण केवल समुद्र में अधिक संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की उपलब्धि नहीं; यह जलवायु स्थिरता, स्वस्थ खाद्य-जाल, तटीय समुदायों और प्रकृति की पुनरुत्थान क्षमता को एक साथ सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी है।”
प्रारंभिक परीक्षा: बहुविकल्पीय अभ्यास
ये स्वनिर्मित अभ्यास प्रश्न हैं; इन्हें वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं बताया गया है। उत्तर खोलकर व्याख्या पढ़ें।
प्रश्न 1. IUCN के वैश्विक प्रवाल आकलन के बारे में कथन:
- 127 उथले गर्म समुद्री प्रवाल पारिस्थितिकी क्षेत्रों का अध्ययन हुआ।
- भविष्य के तापीय जोखिम सहित 122 क्षेत्र घोर संकटग्रस्त पाए गए।
- इसका अर्थ है कि 122 क्षेत्र अभी पूरी तरह ध्वस्त हो चुके हैं।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- तीनों
सही उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: A — केवल 1 और 2। तीसरा गलत है। भविष्य के गंभीर जोखिम और वर्तमान में पारिस्थितिकी का ध्वस्त होना अलग श्रेणियाँ हैं।
प्रश्न 2. प्रवाल भित्ति एवं विरंजन के संबंध में:
- प्रवाल प्राणी हैं, पादप नहीं।
- अनेक प्रवालों में प्रकाश-संश्लेषी शैवाल का सहजीवन होता है।
- विरंजन होने पर सभी प्रवाल तुरंत मर जाते हैं।
- केवल 1
- केवल 2
- केवल 1 और 2
- तीनों
सही उत्तर और व्याख्या देखें
उत्तर: C — केवल 1 और 2। विरंजन पर कुछ प्रवाल तनाव घटने से स्वस्थ हो सकते हैं, हालांकि दीर्घकालीन तापीय तनाव से मृत्यु बढ़ती है।
प्रश्न 3. IUCN की 2026 की रिपोर्ट के संबंध में:
- 122/127 पारिस्थितिकी क्षेत्र भविष्य के जोखिम को मिलाकर घोर संकटग्रस्त हैं।
- 99.8% आकलित प्रवाल क्षेत्रफल इन 122 क्षेत्रों से संबंधित है।
- 96% का अर्थ वर्तमान में पूर्ण विनाश की प्रत्यक्ष गणना है।
- केवल 1 और 2
- केवल 2 और 3
- केवल 1 और 3
- तीनों
सही उत्तर और कारण देखें
उत्तर: A — केवल 1 और 2। 96% भविष्य सहित जोखिम-वर्गीकरण है, जबकि वास्तव में ध्वस्त दर्ज क्षेत्र पश्चिमी गैलापागोस है।
प्रश्न 4. प्रवाल जीवविज्ञान के संदर्भ में:
- कई रीफ निर्माताओं में कैल्शियम कार्बोनेट निर्माण होता है।
- विरंजन हमेशा तत्काल मृत्यु का समानार्थी है।
- समुद्री अम्लीकरण कार्बोनेट रसायनिकी बदलकर भित्ति निर्माण को कठिन बना सकता है।
- केवल 1 और 2
- केवल 1 और 3
- केवल 2 और 3
- तीनों
सही उत्तर और कारण देखें
उत्तर: B — केवल 1 और 3। विरंजन के बाद उपयुक्त परिस्थितियों में पुनर्प्राप्ति संभव है; पहले और तीसरे कथन वैज्ञानिक रूप से सही हैं।
प्रश्न 5. निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
- लक्षद्वीप — एटॉल
- ग्रेट बैरियर रीफ — ऑस्ट्रेलिया
- गैलापागोस — हिंद महासागर
- केवल 1
- केवल 2
- केवल 1 और 2
- तीनों
सही उत्तर और कारण देखें
उत्तर: C — केवल 1 और 2। गैलापागोस प्रशांत महासागर में इक्वाडोर से संबंधित द्वीपसमूह है; पहले दो युग्म सही हैं।
मुख्य परीक्षा: विश्लेषणात्मक अभ्यास
नीचे दिए प्रश्न मौलिक अभ्यास प्रश्न हैं। प्रत्येक उत्तर में परिचय, तथ्य व आधार, विश्लेषण, चुनौतियाँ, आगे की राह और निष्कर्ष का संतुलन रखें। दोनों प्रश्नों के विस्तृत आदर्श उत्तर नीचे उपलब्ध हैं।
- 15 अंक / 250 शब्द: प्रवाल भित्तियों के पारिस्थितिक और आर्थिक महत्त्व को स्पष्ट करते हुए IUCN के 2026 वैश्विक आकलन के आधार पर जोखिम, कारण एवं संरक्षण की रणनीति का विश्लेषण कीजिए।
- 10 अंक / 150 शब्द: समुद्री तापीय लहरें और अत्यधिक मत्स्यन प्रवाल–शैवाल–मछली के संतुलन को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
मुख्य परीक्षा के आदर्श उत्तर: दोनों अभ्यास प्रश्नों के अलग-अलग उत्तर प्रकाशित हैं।