तापीय लहरें, अत्यधिक मत्स्यन और प्रवाल संतुलन
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प्रश्न
समुद्री तापीय लहरें और अत्यधिक मत्स्यन प्रवाल–शैवाल–मछली के संतुलन को किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
यह अध्ययनसार का मौलिक अभ्यास प्रश्न है, वास्तविक UPSC विगत वर्ष प्रश्न नहीं।
आदर्श उत्तर
भूमिका: स्वस्थ प्रवाल भित्ति में प्रवाल पॉलीप, सहजीवी सूक्ष्म शैवाल और विभिन्न मछली समूह एक परस्पर निर्भर पारिस्थितिकी तंत्र बनाते हैं। तापीय लहरें तथा अत्यधिक मत्स्यन इस संतुलन को अलग-अलग रास्तों से तोड़ते हैं।
प्रभाव की शृंखला
- समुद्री गर्मी: ऊँचे ताप से प्रवाल सहजीवी शैवाल खो सकते हैं; विरंजन के साथ उनकी ऊर्जा आपूर्ति घटती है। लंबे तनाव से मृत्यु का खतरा बढ़ता है।
- अत्यधिक मत्स्यन: पैरटफिश जैसी शाकाहारी मछलियाँ घटने पर शैवाल का नियंत्रण कमजोर होता है। ग्रूपर जैसे शिकारी कम होने से खाद्य-जाल असंतुलित होता है।
- संयुक्त प्रभाव: अतिरिक्त शैवाल नए प्रवालों के बसने में बाधा डालते हैं; बार-बार विरंजन से भित्ति को पुनर्जीवित होने का समय नहीं मिलता।
IUCN, 2026 के अनुसार लगभग 63% आकलित प्रवाल पारिस्थितिकी क्षेत्रों में प्रवाल–शैवाल–मछली संतुलन प्रभावित है।
निष्कर्ष: उत्सर्जन में कटौती के साथ टिकाऊ मत्स्यन, जल प्रदूषण नियंत्रण और शाकाहारी मछलियों का संरक्षण भित्तियों की पुनर्प्राप्ति क्षमता बढ़ाते हैं।