RBI डेटा केंद्र और वित्तीय साइबर प्रतिरोधक क्षमता
प्रश्न
भारत की तीव्र डिजिटल वित्तीय वृद्धि के संदर्भ में केंद्रीय बैंक के डेटा केंद्रों में भौगोलिक वैकल्पिकता और साइबर क्षमता-निर्माण को वित्तीय स्थिरता के आवश्यक घटक के रूप में समझाइए।
आदर्श उत्तर
भूमिका: भुवनेश्वर में भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का नया डेटा केंद्र और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान भारत की भुगतान एवं निपटान अवसंरचना को सुरक्षित, लचीला, विस्तार-योग्य और भविष्य-तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
भौगोलिक वैकल्पिकता का महत्व: RTGS, NEFT तथा अन्य अत्यावश्यक प्रणालियों में अलग-अलग स्थानों पर वैकल्पिक डेटा केंद्र होने से एक ही स्थान की विफलता, प्राकृतिक आपदा अथवा लंबे व्यवधान का जोखिम घटता है। उच्च उपलब्धता वाली संरचना व्यवसाय निरंतरता और वित्तीय विश्वास को मजबूत करती है।
साइबर क्षमता-निर्माण: फिरौती-आधारित हमले, आपूर्ति-श्रृंखला हमले, कृत्रिम बुद्धिमत्ता से बनी नकली पहचान, फिशिंग और भविष्य के क्वांटम जोखिम केवल हार्डवेयर से नहीं रुकते। समर्पित संस्थान RBI तथा व्यापक बैंकिंग-वित्तीय क्षेत्र के कर्मचारियों को उन्नत साइबर रक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी और उद्यम प्रौद्योगिकी का प्रशिक्षण दे सकता है।
आगे की राह: ‘शून्य-विश्वास’ सुरक्षा संरचना, तृतीय-पक्ष जोखिम लेखा-परीक्षण, नियमित आक्रमण-अभ्यास, ऑफलाइन अपरिवर्तनीय बैकअप, परखी हुई आपदा-पुनर्बहाली व्यवस्था और पूरे वित्तीय क्षेत्र में घटना-सूचना साझाकरण को संस्थागत रूप देना चाहिए।
निष्कर्ष: डिजिटल वित्त में परिचालन लचीलापन स्वयं वित्तीय स्थिरता का हिस्सा है; वैकल्पिक डेटा केंद्र और प्रशिक्षित साइबर मानव संसाधन उसकी दो पूरक सुरक्षा परतें हैं।