LIVEUPSC CSE 2027 & BPSC • नोट्स • समसामयिकी • PYQ • Tests
इस पृष्ठ में
अभ्यास प्रश्न • GS-III

एग्री-वोल्टिक्स और छोटे किसानों की सुरक्षा

अक्षर आकार
हिंदी आवाज़ तैयार हो रही है…
15 अंकशब्द-सीमा: 250 शब्द24 अक्टूबर 2026

प्रश्न

“एग्री-वोल्टिक्स भारत में भूमि-प्रतिस्पर्धा को भूमि-सहउत्पादकता में बदल सकता है, परंतु छोटे किसानों की सुरक्षा के बिना यह मॉडल असमानता भी बढ़ा सकता है।” विश्लेषण कीजिए।

आदर्श उत्तर

भूमिका: एग्री-वोल्टिक्स (AgriPV) में एक ही कृषि भूमि पर खेती और सौर विद्युत उत्पादन साथ किए जाते हैं। सरकार के 2026 के पृष्ठभूमि-पत्र में भारत की तकनीकी क्षमता लगभग 3,000–14,000 गीगावाट तथा भौगोलिक सूचना प्रणाली (GIS) से छाँटी गई संभावित उपयुक्त कृषि भूमि लगभग 47.35 मिलियन हेक्टेयर बताई गई है। इसलिए यह भूमि-प्रतिस्पर्धा को भूमि-सहउत्पादकता में बदल सकता है।

संभावनाएँ

  • आय का विविधीकरण: फसल के साथ बिजली बिक्री अथवा उचित पट्टा-आय किसान को मौसम और मूल्य-जोखिम से कुछ सुरक्षा दे सकती है।
  • संसाधन दक्षता: उपयुक्त फसल-पैनल विन्यास में आंशिक छाया ताप-दबाव और मिट्टी की नमी के ह्रास को घटा सकती है; स्थानीय सौर ऊर्जा सिंचाई की ऊर्जा आवश्यकता भी पूरी कर सकती है।
  • भूमि संरक्षण: कृषि जारी रहने से अलग सौर पार्कों के लिए कृषि भूमि को गैर-कृषि उपयोग में बदलने का दबाव घट सकता है।

छोटे किसानों के लिए जोखिम

अगस्त 2025 तक भारत में केवल 36 परिचालित परियोजनाएँ थीं, जिनकी कुल क्षमता 37.54 मेगावाट थी। ऊँचे अथवा झुके ढाँचे सामान्य भूमि-आधारित सौर परियोजनाओं की तुलना में लगभग 25–30% महँगे हो सकते हैं। छोटे किसानों के लिए ऋण, ग्रिड संपर्क और मोलभाव की शक्ति कठिनाई बने रह सकते हैं। असंतुलित अनुबंधों में परियोजना विकासकर्ता का नियंत्रण बढ़ सकता है; पट्टेदार और महिला कृषक भूमि-स्वामित्व आधारित मॉडल से बाहर छूट सकते हैं।

आगे की राह

किसान उत्पादक संगठन (FPO) और सहकारी समूहों के सामूहिक मॉडल, रियायती वित्त, फसल-विशिष्ट ICAR/NISE मानक, पारदर्शी नमूना पट्टा-समझौते, खेती जारी रखने की मापनीय शर्त और किसान के भूमि-अधिकार की सुरक्षा आवश्यक है।

निष्कर्ष: एग्री-वोल्टिक्स की सफलता स्थापित मेगावाट से नहीं, संयुक्त भूमि-उत्पादकता, किसान की शुद्ध आय और कृषि की निरंतरता से मापी जानी चाहिए।

संदर्भ