हानि एवं क्षति कोष (FRLD), नेपाल और वैश्विक जलवायु न्याय
प्रश्न
नेपाल के लिए हानि एवं क्षति प्रतिक्रिया कोष (FRLD) द्वारा 21.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर अस्थायी रूप से अलग किया जाना एक प्रक्रियात्मक उपलब्धि है, किंतु यह वैश्विक जलवायु वित्त की अपर्याप्तता और पहुँच संबंधी चुनौतियों को भी उजागर करता है। आगामी COP31 के संदर्भ में विकासशील देशों के लिए जलवायु न्याय की चुनौतियों का परीक्षण कीजिए।
आदर्श उत्तर
भूमिका: COP27 में स्थापित और COP28 में परिचालित हानि एवं क्षति प्रतिक्रिया कोष (Fund for Responding to Loss and Damage—FRLD) के बोर्ड ने 22 अक्टूबर 2026 को नेपाल की भोटेकोशी बाढ़ के बाद 21.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर अस्थायी रूप से अलग किए। यह अंतिम संवितरण नहीं है, बल्कि बारबाडोस कार्यान्वयन व्यवस्था (Barbados Implementation Modalities) के अंतर्गत सामान्य आवेदन-अवधि के बाहर वित्तीय अनुरोध की अनुमति देने वाली पहली आपदा-विशिष्ट प्रतिक्रिया है।
महत्व
- हानि एवं क्षति की बहस को घोषणाओं से वास्तविक वित्तीय प्रतिक्रिया की दिशा में ले जाने वाला संस्थागत कदम।
- अत्यधिक संवेदनशील विकासशील देशों के लिए तेज और देश-केंद्रित पहुँच की मिसाल।
जलवायु न्याय की चुनौतियाँ
- वित्त का अपर्याप्त आकार: 15 मार्च 2026 तक कोष में केवल 822.06 मिलियन अमेरिकी डॉलर की प्रतिबद्धताएँ थीं, जो बढ़ती जलवायु आपदाओं की तुलना में बहुत कम हैं।
- स्वैच्छिक योगदान पर निर्भरता: नियमित और पूर्वानुमेय पुनर्पूंजीकरण के अभाव में सहायता अनिश्चित रहती है।
- जटिल पहुँच-प्रक्रिया: छोटे और प्रशासनिक क्षमता से कमजोर देशों के लिए परियोजना-तैयारी, वित्तीय नियम और मध्यस्थ संस्थाएँ बाधा बन सकती हैं।
- ऋण का खतरा: जलवायु-जनित क्षति की भरपाई नया कर्ज नहीं बननी चाहिए; अनुदान और प्रत्यक्ष पहुँच को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
- गैर-आर्थिक हानि: संस्कृति, आजीविका, जैव विविधता और विस्थापन की क्षति का मौद्रिक मूल्यांकन कठिन है।
COP31 की दिशा
नियमित पुनर्पूंजीकरण, सरल एवं त्वरित सहायता-खिड़की, प्रत्यक्ष पहुँच, अनुदान-प्रधान वित्त तथा ‘प्रदूषक भुगतान करे’ सिद्धांत पर आधारित नए वित्तीय स्रोतों पर सहमति बढ़नी चाहिए।
निष्कर्ष: नेपाल का निर्णय प्रतीकात्मक शुरुआत है; जलवायु न्याय तभी सार्थक होगा जब वित्त पर्याप्त, त्वरित, सुलभ और ऋण-मुक्त हो।