चक्रवात अर्णब: मानसून-पश्चात तीव्रता और तटीय आपदा-लचीलापन
प्रश्न
मानसून-पश्चात काल (अक्टूबर–नवंबर) में बंगाल की खाड़ी उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के तीव्र घनीभवन का केंद्र क्यों बन जाती है? भारत के पूर्वी तटीय राज्यों में चक्रवात प्रबंधन को ‘जीवन रक्षा’ से आगे बढ़ाकर ‘आजीविका एवं अवसंरचना संरक्षण’ तक ले जाने के लिए आवश्यक उपायों की विवेचना कीजिए।
आदर्श उत्तर
भूमिका: 26 अक्टूबर 2026 को ‘अर्णब’ बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान था। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने इसके 27 अक्टूबर को अति भीषण चक्रवाती तूफान बनने तथा 28 अक्टूबर को बापटला–विशाखापत्तनम के बीच आंध्र प्रदेश–यानम तट पार करने का पूर्वानुमान दिया। यह घटना मानसून-पश्चात बंगाल की खाड़ी की उच्च चक्रवात-संवेदनशीलता को रेखांकित करती है।
तीव्र घनीभवन के कारण
- समुद्री ऊष्मा: मानसून लौटने के बाद भी समुद्री सतह का तापमान और ऊपरी महासागरीय ऊष्मा चक्रवात को पर्याप्त ऊर्जा देती है।
- अनुकूल वायुमंडलीय दशाएँ: अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का दक्षिण की ओर खिसकना, पर्याप्त आर्द्रता और अपेक्षाकृत कम ऊर्ध्वाधर पवन-कतरन चक्रवाती परिसंचरण को संगठित करती है।
- अवरोधक परत: नदियों से आया मीठा जल सतह पर कम-लवणता वाली परत बनाता है, जिससे नीचे के ठंडे जल का मिश्रण घट सकता है और ऊपरी समुद्री ऊष्मा बनी रहती है।
जीवन रक्षा से आर्थिक लचीलापन
- विद्युत, दूरसंचार, अस्पताल, बंदरगाह और जल-प्रणालियों को चक्रवात-रोधी मानकों के अनुरूप बनाया जाए तथा वैकल्पिक व्यवस्था और त्वरित पुनर्बहाली योजना तैयार हो।
- मैंग्रोव, तटीय रेत-टीलों और आर्द्रभूमियों जैसे प्राकृतिक जैविक सुरक्षा-कवच के साथ वैज्ञानिक तटीय क्षेत्र-नियमन अपनाया जाए।
- धान, मत्स्य और जलीय कृषि के लिए अग्रिम चेतावनी, फसल व मत्स्य बीमा तथा उपग्रह-आधारित त्वरित क्षति-आकलन किया जाए।
- शहरी जल-निकासी, बाढ़-मैदान संरक्षण और स्थानीय निकायों के निकासी–राहत–पुनर्बहाली अभ्यास को मजबूत किया जाए।
निष्कर्ष: सेंडाई रूपरेखा (Sendai Framework) की भावना के अनुरूप लक्ष्य केवल मृत्यु घटाना नहीं, बल्कि आजीविका, आवश्यक सेवाओं और परिसंपत्तियों की शीघ्र पुनर्बहाली सुनिश्चित करना होना चाहिए।