ऑपरेशन ट्राइडेंट: नार्को-हवाला तंत्र और आंतरिक सुरक्षा
प्रश्न
“मादक पदार्थ तस्करी का प्रभावी प्रतिरोध केवल सीमा पर जब्ती से संभव नहीं; इसके वित्तीय और आपूर्ति-तंत्र का विघटन भी आवश्यक है।” पूर्वोत्तर भारत के संदर्भ में विश्लेषण कीजिए।
आदर्श उत्तर
भूमिका: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के नेतृत्व वाले ऑपरेशन ट्राइडेंट में असम, मिजोरम और मणिपुर के 38 स्थानों पर समन्वित कार्रवाई की गई। सरकारी विवरण के अनुसार लगभग ₹100 करोड़ के हवाला लेनदेन, 1,424 बैंक खातों पर रोक, ₹17.82 करोड़ की संपत्ति कुर्की, 500 डेटोनेटर, ₹12 लाख नकद और 18 गिरफ्तारियाँ सामने आईं। इससे नशीले पदार्थों के विरुद्ध नीति का केवल जब्ती-केंद्रित दृष्टिकोण से आगे बढ़कर पूरे तंत्र और वित्तीय प्रवाह पर प्रहार करने की दिशा स्पष्ट होती है।
पूर्वोत्तर में बदलती चुनौती
- सीमा-पार तंत्र: म्यांमार की अस्थिरता, कठिन भूगोल और भारत–म्यांमार–बांग्लादेश मार्ग सिंथेटिक मादक पदार्थों और हेरोइन की तस्करी को सुगम बनाते हैं।
- धन की परतें: हवाला, मुखौटा संस्थाएँ, दूसरों के नाम के बैंक खाते और डिजिटल माध्यम अवैध आय के स्रोत को छिपाकर आपूर्ति-श्रृंखला चलाते हैं।
- संगठित अपराध का मेल: अवैध वित्त, विस्फोटक और संगठित अपराध के संभावित संबंध आंतरिक सुरक्षा जोखिम बढ़ाते हैं; प्रत्येक संबंध को साक्ष्य-आधारित जाँच से स्थापित करना आवश्यक है।
‘पैसे के स्रोत तक पहुँचना’ क्यों आवश्यक?
सीमा पर खेप पकड़ना प्रायः वाहक को रोकता है, पर वित्तीय जाँच गिरोह की कार्यशील पूँजी, संपत्ति, सहायक तंत्र और सरगनाओं पर प्रहार करती है। इसलिए NCB, प्रवर्तन निदेशालय (ED), वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-IND), राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI), बैंकों और राज्य पुलिस की साझा खुफिया व्यवस्था निर्णायक है।
आगे की राह
- चार-स्तरीय नार्को समन्वय तंत्र (NCORD) को वास्तविक समय की वित्तीय खुफिया जानकारी और संदिग्ध खातों की विश्लेषण-प्रणाली से जोड़ा जाए।
- पूर्ववर्ती रसायनों, सीमा-पार परिवहन और अंध-जाल/डिजिटल भुगतान के सुरागों की लक्षित निगरानी की जाए।
- सीमा प्रबंधन के साथ नशा-मुक्ति, मांग में कमी और सीमावर्ती आजीविका विकल्प बढ़ाए जाएँ।
- म्यांमार और बांग्लादेश के साथ त्वरित सूचनात्मक सहयोग बढ़ाया जाए।
निष्कर्ष: सफल रणनीति मादक पदार्थ, धन और आपूर्ति—तीनों तंत्रों को एक साथ तोड़ने में है।