स्वदेशी AIP और पनडुब्बी क्षमता
प्रश्न
स्वदेशी AIP प्रणाली भारतीय नौसेना की पारंपरिक पनडुब्बियों की परिचालन क्षमता और रक्षा आत्मनिर्भरता को कैसे बढ़ा सकती है? इसकी तकनीकी सीमाओं का भी उल्लेख कीजिए।
आदर्श उत्तर
डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए समय-समय पर सतह के निकट आना पड़ता है, जिससे उनकी पहचान का जोखिम बढ़ता है। Air Independent Propulsion (AIP) प्रणाली इस निर्भरता को घटाकर लंबे समय तक जलमग्न रहने में सहायता करती है।
परिचालन लाभ: स्वदेशी फॉस्फोरिक एसिड ईंधन-कोशिका आधारित AIP कलवरी-श्रेणी पनडुब्बियों की गोपनीयता, समुद्री निगरानी और sea-denial क्षमता बढ़ा सकती है। अधिक जलमग्न अवधि से विरोधी की पनडुब्बी-रोधी निगरानी से बचने की संभावना बढ़ती है।
आत्मनिर्भरता: स्वदेशी ऊर्जा मॉड्यूल, हाइड्रोजन उत्पादन, एकीकरण और जीवनचक्र समर्थन विदेशी निर्भरता तथा दीर्घकालिक रखरखाव जोखिम घटाते हैं।
सीमाएँ: AIP परमाणु प्रणोदन जितनी शक्ति या लगभग असीमित endurance नहीं देता। ईंधन भंडारण, सुरक्षा, अतिरिक्त भार/स्थान, retrofit integration और रखरखाव जटिलताएँ भी महत्त्वपूर्ण हैं।
अतः AIP को बेहतर बैटरी, सेंसर और नेटवर्कयुक्त समुद्री युद्ध क्षमता के साथ एकीकृत करना होगा।