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स्वदेशी AIP प्रणाली: कलवरी-श्रेणी पनडुब्बियों के लिए STW-2 चरण

DRDO-NMRL की स्वदेशी वायु-स्वतंत्र प्रणोदन प्रणाली, फॉस्फोरिक अम्ल ईंधन सेल, ऑनबोर्ड हाइड्रोजन और कलवरी-श्रेणी पनडुब्बियों की जलमग्न सहनशक्ति का अध्ययन।

25 अक्टूबर 2026

चर्चा में क्यों?

24 अक्टूबर 2026 को हजीरा, गुजरात में DRDO की नौसेना सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला (NMRL) द्वारा विकसित स्वदेशी वायु-स्वतंत्र प्रणोदन (Air Independent Propulsion—AIP) ऊर्जा मॉड्यूल के ‘Setting to Work Phase-2’ चरण का उद्घाटन हुआ। अगले चरण में मॉड्यूल को विद्युत उत्पादन के लिए सक्रिय कर नौसेना मानकों के अनुसार परीक्षण किया जाएगा।

AIP क्या है?

डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों को बैटरी चार्ज करने के लिए सामान्यतः डीजल इंजन चलाना पड़ता है, जिसके लिए वायुमंडलीय ऑक्सीजन चाहिए। इससे उन्हें समय-समय पर स्नॉर्कलिंग करनी पड़ती है और पहचान का जोखिम बढ़ता है। AIP बिना वायुमंडलीय ऑक्सीजन के लंबे समय तक विद्युत उपलब्ध कराकर जलमग्न सहनशक्ति और गोपनीयता बढ़ाता है।

भारतीय प्रणाली की तकनीक

  • प्रमुख विकासकर्ता: DRDO की NMRL।
  • तकनीक: स्वदेशी फॉस्फोरिक अम्ल ईंधन सेल (PAFC)।
  • विशेषता: हाइड्रोजन को बड़े उच्च-दाब भंडार में ले जाने के बजाय पनडुब्बी पर ही उत्पन्न करने वाला ऑनबोर्ड हाइड्रोजन जनरेटर।
  • ईंधन सेल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन से विद्युत उत्पन्न करता है; चलती यांत्रिक प्रणालियों की कम आवश्यकता इसे शांत संचालन के लिए उपयुक्त बनाती है।

कलवरी-श्रेणी से संबंध

ऊर्जा मॉड्यूल के परीक्षण के बाद इसे मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड को कलवरी-श्रेणी की पनडुब्बी में एकीकरण के लिए सौंपने का लक्ष्य है। रक्षा मंत्रालय ने दिसंबर 2024 में AIP प्लग के निर्माण और एकीकरण के लिए MDL के साथ लगभग ₹1,990 करोड़ का अनुबंध किया था।

रणनीतिक महत्व

हिंद महासागर में पनडुब्बी-रोधी निगरानी बढ़ने के बीच अधिक समय तक जलमग्न रहना जीवित रहने की क्षमता और गुप्त गश्त के लिए महत्वपूर्ण है। स्वदेशी AIP विदेशी निर्भरता घटाता है और पनडुब्बी डिजाइन, ईंधन सेल, सुरक्षा और समुद्री प्रणाली एकीकरण में घरेलू औद्योगिक क्षमता बढ़ाता है।

सीमाएँ और चुनौतियाँ

AIP परमाणु प्रणोदन का विकल्प नहीं है। यह डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों की जलमग्न अवधि बढ़ाता है, पर ऊर्जा घनत्व, गति और बहुत लंबी तैनाती में परमाणु पनडुब्बियों की क्षमता अलग रहती है। मौजूदा पनडुब्बी में AIP प्लग का एकीकरण संरचनात्मक संतुलन, सुरक्षा और प्रमाणन की दृष्टि से जटिल है।

वास्तविक UPSC PYQ

UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2015 में ईंधन सेल के संदर्भ में पूछा गया था कि शुद्ध हाइड्रोजन उपयोग करने पर ऊष्मा और जल उप-उत्पाद होते हैं, क्या छोटे उपकरणों में इसका उपयोग संभव है और विद्युत AC या DC के रूप में निकलती है। सही विकल्प: केवल पहला कथन।

प्रारंभिक परीक्षा अभ्यास

प्रश्न. AIP के बारे में कौन-सा कथन सही है? (a) यह केवल परमाणु पनडुब्बियों के लिए है (b) यह डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बी की वायुमंडलीय ऑक्सीजन पर निर्भरता घटाता है (c) यह सोनार को निष्क्रिय करता है (d) यह केवल सतह पर काम करता है

उत्तर

(b)।

मुख्य परीक्षा अभ्यास प्रश्न

स्वदेशी AIP प्रणाली भारतीय नौसेना की पारंपरिक पनडुब्बियों की परिचालन क्षमता और रक्षा आत्मनिर्भरता को कैसे बढ़ा सकती है? इसकी तकनीकी सीमाओं का भी उल्लेख कीजिए।

10 अंक · 150 शब्द · GS-III

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स्रोत और संदर्भ