UPSC CSE Mains · GS Paper 1
UPSC 2014
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प्रश्न
गांधार मूर्तिकला रोमनों की उतनी ही ऋणी थी जितनी कि वह यूनानियों की थी। स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न की मांग
गांधार कला पर यूनानी (Greek) प्रभाव के साथ-साथ रोमन साम्राज्य (Roman Empire) के व्यापारिक और कलात्मक प्रभाव की समान भूमिका को सिद्ध करना।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
- परिचय: कुषाण काल में रोमन साम्राज्य के साथ घनिष्ठ व्यापारिक और राजनयिक संबंधों के कारण गांधार कला केवल प्राचीन यूनानी (हेलेनिस्टिक) परंपरा तक सीमित नहीं रही, बल्कि उस पर समकालीन रोमन कला का भी गहरा प्रभाव पड़ा।
- यूनानी (Greek) ऋण: अपोलो जैसी मुखाकृति, शारीरिक सौष्ठव, लहरदार बाल, हेराक्लीज़ के रूप में वज्रपाणि और कोरिंथियन स्तंभ-शीर्ष।
- रोमन (Roman) ऋण:
- रोमन टोगा (Toga): बुद्ध की संघाटी की मोटी और भारी समानांतर सिलवटें रोमन सम्राटों के 'टोगा' वस्त्र से सीधे प्रेरित हैं।
- कथात्मक उभारदार पट्टियाँ (Narrative Reliefs): स्तूपों के आधार पर बुद्ध के जीवन की घटनाओं को अलग-अलग चौकोर पैनलों में कालानुक्रमिक ढंग से तराशने की पद्धति 'रोमन ताबूतों' (Roman Sarcophagi) और विजय-स्तंभों से ली गई थी।
- यथार्थवादी व्यक्ति-चित्रण (Realistic Portraiture): यूनानी आदर्शवाद के विपरीत चेहरे के यथार्थवादी भाव, मूँछें और वृद्धावस्था/पीड़ा का सजीव अंकन रोमन यथार्थवाद की देन है।
- ट्रिटन (Tritons) और समुद्री देवता तथा स्टुको (चूना-प्लास्टर) तकनीक का रोमन अलेक्जेंड्रिया से गांधार में आगमन।
- निष्कर्ष: इस प्रकार गांधार कला को केवल 'ग्रीको-बुद्धिस्ट' कहना अधूरा है; यह वास्तव में 'ग्रीको-रोमन-बुद्धिस्ट' कला संश्लेषण का प्रतिफल थी।