UPSC CSE Mains · GS Paper 1
UPSC 2014
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प्रश्न
तक्षशिला विश्वविद्यालय विश्व के प्राचीनतम विश्वविद्यालयों में से एक था जिसके साथ विभिन्न शिक्षण-विषयों के अनेक प्रख्यात विद्वान(व्यक्तित्व) संबंधित थे। इसकी रणनीतिक अवस्थिति के कारण इसकी कीर्ति फैली, लेकिन नालंदा के विपरीत, इसे आधुनिक अभिप्राय में विश्वविद्यालय नहीं समझा जाता। चर्चा कीजिए।
प्रश्न की मांग
तक्षशिला की ख्याति, उससे जुड़े विद्वानों और उसकी भौगोलिक स्थिति को बताते हुए, संस्थागत और स्थापत्य रूप से उसकी तुलना नालंदा महाविहार से करना।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
- परिचय एवं रणनीतिक अवस्थिति: तक्षशिला (6ठी शती ई.पू. से 5वीं शती ई.) उत्तरापथ और मध्य-पश्चिम एशिया को जोड़ने वाले तीन प्रमुख व्यापारिक मार्गों के संगम पर स्थित था।
- प्रख्यात विद्वान: चाणक्य (कौटिल्य), पाणिनि (व्याकरण), चरक और जीवक (आयुर्वेद/चिकित्सा), वसुबंधु (बौद्ध दर्शन) और चंद्रगुप्त मौर्य इससे जुड़े थे।
- नालंदा के विपरीत तक्षशिला 'आधुनिक अर्थ में विश्वविद्यालय' क्यों नहीं था?
- स्थापत्य अंतर: नालंदा महाविहार एक चारदीवारी से घिरा हुआ केंद्रीकृत आवासीय परिसर (Campus with Viharas, Stupas, Library 'Dharmaganja', and Lecture halls) था; जबकि तक्षशिला में प्रारंभ में कोई एकीकृत महाविहार परिसर नहीं था, आचार्य अपने-अपने घरों/आश्रमों में स्वतंत्र रूप से पढ़ाते थे (बाद में कुषाण काल में धर्मराजिका, जूलियन और मोहरा मुरादु जैसे बौद्ध विहार बने)।
- प्रशासनिक अंतर: नालंदा में प्रवेश परीक्षा (द्वार-पंडित द्वारा), निश्चित पाठ्यक्रम, केंद्रीय कुलपति (जैसे शीलभद्र) और राजकीय ग्राम-अनुदान की व्यवस्था थी; जबकि तक्षशिला में गुरु ही स्वयं पाठ्यक्रम और शिक्षण शुल्क तय करता था तथा कोई औपचारिक डिग्री या केंद्रीकृत प्रशासन नहीं था।
- निष्कर्ष: तक्षशिला ने व्यक्तिगत गुरुकुल परंपरा के शिखर का और नालंदा ने संगठित महाविहार विश्वविद्यालय स्थापत्य का प्रतिनिधित्व किया।