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BPSC Mains · GS Paper 1

70वीं BPSC

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7 अंकसंक्षिप्त टिप्पणीबौद्ध और जैन स्थापत्य

प्रश्न

मौर्यकालीन कला एवं स्थापत्यकला।

प्रश्न की मांग

मौर्य कला के दोनों रूपों (दरबारी/राजकीय कला और लोक कला), काष्ठ से प्रस्तर संक्रमण, स्तूप, स्तंभ और गुफा स्थापत्य (बाराबर) की विशेषताओं को स्पष्ट करना तथा बौद्ध धर्म (एवं आजीवक सहिष्णुता) और बिहार के संदर्भ में इसका मूल्यांकन करना।

उत्तर-लेखन रूपरेखा

  • परिचय: चौथी-तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्य साम्राज्य के अधीन भारतीय कला में लकड़ी और मिट्टी के स्थान पर 'स्थायी पाषाण स्थापत्य' का युगांतरकारी प्रारंभ हुआ।
  • मौर्य कला का द्वि-स्तरीय वर्गीकरण (आनंद कुमारस्वामी के अनुसार):

(क) राजकीय / दरबारी कला (Court Art):

  • राजप्रासाद एवं नगर स्थापत्य: पाटलिपुत्र (बुलंदीबाग की काष्ठ प्राचीर और कुम्हरार का 80 स्तंभों वाला सभा-मंडप)।
  • एकाश्म स्तंभ (Monolithic Pillars): चुनार के बलुआ पत्थर से बने, दर्पण जैसी चमकदार पॉलिश और घंटाकृति शीर्ष युक्त स्तंभ—बिहार में लौरिया नंदनगढ़ (सिंह), लौरिया अरेराज, रामपुरवा (वृषभ व सिंह) और वैशाली (बसाढ़-बखरा) तथा सारनाथ और साँची।
  • स्तूप स्थापत्य: बुद्ध के अवशेषों पर साँची, सारनाथ, भरहुत और वैशाली के स्तूपों का निर्माण (अण्ड, मेधि, हर्मिका, यष्टि, छत्र)।
  • शैलकृत गुफा स्थापत्य: बिहार के जहानाबाद में बराबर (सुदामा, लोमस ऋषि, कर्ण चौपड़, विश्व झोपड़ी — अशोक) और नागार्जुनी (गोपिका, वापीयक, वडथिका — दशरथ) की ग्रेनाइट गुफाएँ।

(ख) लोक कला (Popular / Folk Art):

  • स्वतंत्र यक्ष-यक्षिणी प्रतिमाएँ: दीदारगंज (पटना) की चामरधारिणी यक्षिणी, परखम (मथुरा) का यक्ष, और पटना (लोहानीपुर) से प्राप्त नग्न जैन तीर्थंकर धड़।
  • मृण्मूर्तियाँ (Terracotta): बुलंदीबाग से प्राप्त नर्तकी व मातृदेवी की मूर्तियाँ।
  • बौद्ध धर्म के साथ संबंध एवं धार्मिक सहिष्णुता:
  • स्तूपों, धम्म-स्तंभों, धर्मचक्र, सिंह/हाथी/अश्व/वृषभ प्रतीकों और धौली के शैलकृत हाथी में बौद्ध दर्शन की गहरी छाप है।
  • तथापि, बराबर की गुफाएँ आजीवकों को दान देना और लोहानीपुर की जैन मूर्ति दिखाती हैं कि मौर्य कला संकीर्ण रूप से केवल बौद्ध नहीं बल्कि सर्वधर्म-समभाव पर आधारित थी।
  • निष्कर्ष: मौर्य कला ने बिहार को प्राचीन भारत की सांस्कृतिक राजधानी बनाया और परवर्ती शुंग-सातवाहन-गुप्त स्थापत्य की आधारशिला रखी।