BPSC Mains · GS Paper 1
69वीं BPSC
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प्रश्न
प्राचीन काल में पूर्वी भारत के गुफा चित्र।
प्रश्न की मांग
पश्चिमी भारत (अजंता/कार्ले) से अलग, पूर्वी भारत (बिहार, ओडिशा, झारखंड/छत्तीसगढ़) में विकसित शैलकृत गुफा स्थापत्य और चित्रकला का कालानुक्रमिक विवरण देना।
उत्तर-लेखन रूपरेखा
- परिचय: भारत में शैलकृत गुफा स्थापत्य का जन्म पूर्वी भारत (बिहार) में ही तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व में हुआ और यह मौर्य काल से गुप्त काल तक बौद्ध, जैन और आजीवक परंपराओं के केंद्र के रूप में विकसित हुआ।
- बिहार की गुफा परंपरा:
- राजगीर की सप्तपर्णी गुफा (प्रथम बौद्ध संगीति स्थल)।
- बराबर और नागार्जुनी की गुफाएँ (जहानाबाद — अशोक व दशरथ द्वारा आजीवक संप्रदाय हेतु निर्मित, चमकदार मौर्य पॉलिश और लोमस ऋषि का चैत्य-मेहराब)।
- राजगीर की 'सोन भंडार गुफाएँ' (3री–4थी शती ई. — मुनि वैरदेव द्वारा जैन तपस्वियों के लिए निर्मित, चौमुखी जैन तीर्थंकर शिल्प)।
- भागलपुर (कहलगाँव) की बटेश्वर स्थान शैलकृत गुफाएँ।
- ओडिशा की जैन गुफा परंपरा:
- भुवनेश्वर के निकट 'उदयगिरि और खंडगिरि गुफाएँ' (1ली शती ई.पू., कलिंग नरेश खारवेल): हाथीगुम्फा अभिलेख, दोमंजिला रानी गुम्फा, गणेश गुम्फा और अनंत गुम्फा।
- पूर्वी भारत की गुफा चित्रकला:
- ओडिशा के क्योंझर जिले में स्थित 'सीताबिंजी' (Sitabhinji - रावण छाया शैलश्रय, 4थी–6ठी शती ई.) का राजसी जुलूस का भित्ति-चित्र, तथा छत्तीसगढ़ (सरगुजा) की 'जोगीमारा और सीताबेंगरा' गुफाएँ (मौर्योत्तर काल के प्राचीनतम भित्ति-चित्र और नाट्यशाला)।
- निष्कर्ष: पूर्वी भारत की गुफाओं ने ही तकनीकी रूप से काष्ठ से प्रस्तर तक्षण और पॉलिश की वह विधि विकसित की, जिसने बाद में पश्चिमी घाट (भाजा, कार्ले, अजंता) की गुफाओं को प्रेरित किया।