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अभ्यास से समझ तक

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 160

एक सवाल हल कीजिए, उसका कारण समझिए, फिर आगे बढ़िए। करंट अफेयर्स, विषयवार अध्ययन और विगत वर्षों के प्रश्न अब एक जगह।

4666 प्रश्न संग्रह में3816 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित
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3181–3200 / 4666 प्रश्न

प्रश्न-संग्रह

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विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग ( Finance Commission) की सिफारिशों की प्रकृति के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?

संविधान के अनुच्छेद 280 के तहत वित्त आयोग ( Finance Commission) की सिफारिशों की प्रकृति के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

वित्त आयोग अनुच्छेद 280 के तहत सिफारिशें करता है; वे स्वयं कार्यपालिका की तरह कर वितरित नहीं करता और उसकी सिफारिशें स्वतः न्यायिक रूप से बाध्यकारी आदेश नहीं बनतीं। अनुच्छेद 281 के अनुसार राष्ट्रपति सिफारिशें तथा उन पर की गई कार्रवाई का व्याख्यात्मक ज्ञापन संसद के समक्ष रखवाते हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 285 के अंतर्गत संघ की संपत्ति को राज्य कराधान से छूट ( Exemption of Union property from State taxation) के संदर्भ में निम्नलि…

संविधान के अनुच्छेद 285 के अंतर्गत संघ की संपत्ति को राज्य कराधान से छूट ( Exemption of Union property from State taxation) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संघ की संपत्ति सभी राज्यीय और स्थानीय करों से तब तक मुक्त होगी जब तक कि संसद विधि द्वारा अन्यथा उपबंध न करे। Corporations) 2. यह छूट केवल संघ द्वारा प्रत्यक्ष रूप से धारित संपत्ति पर लागू होती है; केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली कंपनियों, निगमों ( या उपक्रमों की संपत्ति पर यह छूट स्वतः लागू नहीं होती। 3. राज्य सरकारें रेलवे की संपत्ति पर स्थानीय नगरपालिका कर ( Municipal taxes) लगा सकती हैं यदि संसद ने इसके लिए विशिष्ट रूप से विधि न बनाई हो। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

कथन 3 गलत है क्योंकि रेलवे संघ की प्रत्यक्ष संपत्ति है, अतः संसद की विशिष्ट अनुमति के बिना उस पर कोई स्थानीय कर नहीं लगाया जा सकता। कथन 1 और 2 सही हैं (सरकारी कंपनियां पृथक विधिक व्यक्ति होती हैं, अतः वे छूट की हकदार नहीं हैं)।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 289 के अंतर्गत राज्यों की संपत्ति और आय को केंद्रीय कराधान से छूट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी राज्…

संविधान के अनुच्छेद 289 के अंतर्गत राज्यों की संपत्ति और आय को केंद्रीय कराधान से छूट के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी राज्य की संपत्ति और आय को सामान्यतः केंद्रीय करों से छूट प्राप्त है। 2. यदि राज्य सरकार कोई व्यापारिक या वाणिज्यिक कार्य ( Trade or business) करती है, तो संसद विधि द्वारा उस व्यापार या उससे अर्जित आय पर कर लगा सकती है। 3. यदि संसद किसी व्यापार या व्यवसाय को राज्य के शासन का अभिन्न अंग घोषित करती है, तो उस पर केंद्र द्वारा कर नहीं लगाया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 289(1) राज्यों की संपत्ति/आय को संघ के करों से मुक्त करता है, किंतु 289(2) के तहत संसद राज्य के व्यापारिक कार्यों पर कर लगा सकती है, और 289(3) शासन से जुड़े व्यापार को छूट देने की शक्ति संसद को देता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 292 और 293 के तहत क्रमशः केंद्र और राज्यों की ऋण लेने की शक्तियों ( Borrowing Powers) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार…

संविधान के अनुच्छेद 292 और 293 के तहत क्रमशः केंद्र और राज्यों की ऋण लेने की शक्तियों ( Borrowing Powers) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. केंद्र सरकार भारत की संचित निधि की प्रतिभूति पर देश के भीतर और विदेशों से भी ऋण ले सकती है, संसद द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर। 2. राज्य सरकार केवल भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर ही ऋण ले सकती है, विदेशों से सीधे वाणिज्यिक ऋण नहीं ले सकती। 3. यदि किसी राज्य पर केंद्र सरकार का कोई पुराना ऋण बकाया है, तो वह राज्य केंद्र की पूर्व सहमति के बिना कोई नया ऋण नहीं ले सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 292 केंद्र को विदेशी ऋण की शक्ति देता है, जबकि 293 राज्यों को केवल घरेलू ऋण तक सीमित रखता है और बकाया केंद्रीय ऋण की स्थिति में केंद्र की पूर्व अनुमति अनिवार्य करता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 302 के अंतर्गत व्यापार और वाणिज्य पर प्रतिबंध लगाने की संसद की शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद व…

संविधान के अनुच्छेद 302 के अंतर्गत व्यापार और वाणिज्य पर प्रतिबंध लगाने की संसद की शक्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद विधि द्वारा राज्यों के बीच या राज्य के किसी भाग के भीतर व्यापार, वाणिज्य या समागम की स्वतंत्रता पर लोकहित में आवश्यक निर्बंधन लगा सकती है। 2. अनुच्छेद 303(1) के अनुसार, संसद को व्यापार और वाणिज्य के मामले में एक राज्य को दूसरे राज्य पर वरीयता ( Preference) देने या राज्यों के बीच भेदभाव करने का कोई अधिकार नहीं है। 3. अनुच्छेद 303(2) के तहत यदि भारत के किसी भाग में माल की भारी कमी ( Scarcity of goods) की स्थिति उत्पन्न हो, तो संसद राज्यों के बीच विभेदकारी कानून भी बना सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 302 संसद को लोकहित में निर्बंधन लगाने की शक्ति देता है, 303 भेदभाव पर रोक लगाता है किंतु माल की कमी की स्थिति में भेदभाव का अपवाद भी स्वीकार करता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 304 के तहत राज्य विधानमंडलों द्वारा व्यापार और वाणिज्य पर प्रतिबंध लगाने की शक्तियों के संदर्भ में कौन-सी शर्तें आवश्यक हैं? …

संविधान के अनुच्छेद 304 के तहत राज्य विधानमंडलों द्वारा व्यापार और वाणिज्य पर प्रतिबंध लगाने की शक्तियों के संदर्भ में कौन-सी शर्तें आवश्यक हैं? 1. राज्य विधानमंडल अन्य राज्यों से आयातित माल पर ऐसा कर लगा सकता है जो राज्य में निर्मित माल पर भी लगता हो, बशर्ते वह विभेदकारी ( Discriminatory) न हो [अनुच्छेद 304(a)]। 2. राज्य विधानमंडल लोकहित में व्यापार की स्वतंत्रता पर युक्तियुक्त निर्बंधन लगा सकता है [अनुच्छेद 304( )]। b b 3. अनुच्छेद 304( ) के तहत ऐसा कोई भी विधेयक राज्य विधानमंडल में राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश/सहमति के बिना पेश नहीं किया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 304 राज्यों को गैर-विभेदकारी कर लगाने तथा राष्ट्रपति की पूर्व मंजूरी से लोकहित में व्यापार पर युक्तियुक्त प्रतिबंध लगाने की अनुमति देता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 305 के तहत किन कानूनों को अनुच्छेद 301 और 303 के प्रावधानों से छू ट ( Saving of existing laws) प्राप्त है? 1. संविधान के प्रा…

संविधान के अनुच्छेद 305 के तहत किन कानूनों को अनुच्छेद 301 और 303 के प्रावधानों से छू ट ( Saving of existing laws) प्राप्त है? 1. संविधान के प्रारंभ से पहले के विद्यमान कानून ( Existing laws) 2. राज्य द्वारा किसी व्यापार, व्यवसाय या उद्योग का पूर्ण या आंशिक एकाधिकार ( State Monopoly) सृजित करने वाले कानून नीचे दिए गए कू ट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

उत्तर और पूरी व्याख्या

दोनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 305 पुराने विद्यमान कानूनों तथा सरकारी एकाधिकार ( State monopolies) वाले कानूनों को व्यापार की सामान्य स्वतंत्रता की बंदिशों से सुरक्षित रखता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 307 के अंतर्गत किस प्राधिकारी की नियुक्ति की परिकल्पना की गई है?

संविधान के अनुच्छेद 307 के अंतर्गत किस प्राधिकारी की नियुक्ति की परिकल्पना की गई है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

अनुच्छेद 307 संसद को यह शक्ति देता है कि वह विधि द्वारा व्यापार, वाणिज्य और समागम की स्वतंत्रता के प्रयोजनों को पूरा करने के लिए एक उपयुक्त प्राधिकारी की नियुक्ति करे (यद्यपि ऐसा कोई प्राधिकारी अभी तक गठित नहीं किया गया है)।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 31 C के दूसरे भाग को, जिसमें यह कहा गया था कि "कोई विधि जिसमें ऐसी नीति को प्रभावी करने की घोषणा हो, किसी न्यायालय में इस आधा…

संविधान के अनुच्छेद 31 C के दूसरे भाग को, जिसमें यह कहा गया था कि "कोई विधि जिसमें ऐसी नीति को प्रभावी करने की घोषणा हो, किसी न्यायालय में इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि वह ऐसी नीति को प्रभावी नहीं करती", उच्चतम न्यायालय ने किस मामले में असंवैधानिक घोषित किया था?

उत्तर और पूरी व्याख्या

C के शवानंद भारती मामले (1973) में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 31 के दूसरे भाग को इस आधार पर असंवैधानिक घोषित किया कि न्यायिक समीक्षा (Judicial Review ) संविधान का मूल ढांचा है और संसद अदालत के क्षेत्राधिकार को पूरी तरह नहीं छीन सकती।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) और अनुच्छेद 226 के मध्य तुलना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 32 …

संविधान के अनुच्छेद 32 (संवैधानिक उपचारों का अधिकार) और अनुच्छेद 226 के मध्य तुलना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है, जबकि अनुच्छेद 226 एक संवैधानिक शक्ति है, मौलिक अधिकार नहीं। 2. अनुच्छेद 32 के तहत उच्चतम न्यायालय केवल मौलिक अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी कर सकता है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय मौलिक अधिकारों के साथ-साथ किसी अन्य कानूनी अधिकार के लिए भी रिट जारी कर सकता है। 3. उच्चतम न्यायालय अपने रिट क्षेत्राधिकार के तहत राहत देने से मना नहीं कर सकता, जबकि उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार विवेकाधीन (Discretionary) होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 32 का दायरा विषय-वस्तु में संकीर्ण (केवल FRs ) किंतु भौगोलिक रूप से पूरे देश में विस्तृत है, जबकि 226 का दायरा कानूनी अधिकारों तक विस्तृत किंतु क्षेत्राधिकार राज्य तक सीमित और विवेकाधीन है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार की तुलना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 32 के तहत रिट …

संविधान के अनुच्छेद 32 और अनुच्छेद 226 के तहत रिट क्षेत्राधिकार की तुलना के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 32 के तहत रिट जारी करने की शक्ति स्वयं एक मूल अधिकार है, जबकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार विवेकाधीन ( Discretionary) है। 2. उच्च न्यायालय केवल मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए ही रिट जारी कर सकता है, किसी अन्य सामान्य विधिक अधिकार के लिए नहीं। 3. संसद किसी अन्य अधीनस्थ न्यायालय को भी अपने स्थानीय क्षेत्राधिकार में रिट जारी करने की शक्ति प्रदान कर सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय मूल अधिकारों के साथ-साथ 'किसी अन्य प्रयोजन' (अन्य सामान्य विधिक अधिकारों) के लिए भी रिट जारी कर सकता है, जिससे इसका दायरा अनुच्छेद 32 से अधिक विस्तृत है। कथन 1 और 3 सही हैं; अनुच्छेद 32 स्वयं मूल अधिकार है और संसद अनुच्छेद 32(3) के तहत अन्य अदालतों को रिट शक्ति दे सकती है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 33 के अंतर्गत संसद की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद विधि द्वारा सशस्त्र बलों, पुलिस बलों, औ…

संविधान के अनुच्छेद 33 के अंतर्गत संसद की शक्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद विधि द्वारा सशस्त्र बलों, पुलिस बलों, और आसूचना संगठनों ( Intelligence organisations) के सदस्यों के मौलिक अधिकारों को सीमित या समाप्त कर सकती है। 2. अनुच्छेद 33 के तहत कानून बनाने की शक्ति संसद और राज्य विधानमंडलों दोनों को समान रूप से प्राप्त है। 3. संसद द्वारा अनुच्छेद 33 के तहत बनाए गए कानूनों को किसी भी मौलिक अधिकार के उल्लंघन के आधार पर अदालत में चुनौती नहीं दी जा सकती। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

कथन 2 गलत है क्योंकि अनुच्छेद 33 के तहत कानून बनाने की अनन्य शक्ति केवल संसद ( Parliament) को है, राज्य विधानमंडलों को नहीं। कथन 1 और 3 सही हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 33 के तहत सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों और पुलिस बलों के सदस्यों के मूल अधिकारों को प्रतिबंधित करने की शक्ति किसे प्राप्त है?

संविधान के अनुच्छेद 33 के तहत सशस्त्र बलों, अर्धसैनिक बलों और पुलिस बलों के सदस्यों के मूल अधिकारों को प्रतिबंधित करने की शक्ति किसे प्राप्त है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

अनुच्छेद 33 के तहत सशस्त्र बलों, खुफिया एजेंसियों, पुलिस आदि के मूल अधिकारों को संशोधित/सीमित करने का कानून बनाने की अनन्य शक्ति केवल 'संसद' (Parliament) को प्राप्त है, राज्य विधानमंडलों को नहीं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 343 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है। 2. संविधान लागू होने के बाद 1…

संविधान के अनुच्छेद 343 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है। 2. संविधान लागू होने के बाद 15 वर्षों तक अंग्रेजी उन शासकीय प्रयोजनों के लिए जारी रह सकती थी जिनके लिए पहले उपयोग होती थी। 3. संसद को 15 वर्ष के बाद भी कानून द्वारा अंग्रेजी के प्रयोग की अनुमति देने की शक्ति दी गई। सही उत्तर चुनिए।

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 343(1) संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी घोषित करता है। अनुच्छेद 343(2) ने प्रारंभिक 15 वर्षों तक अंग्रेजी के प्रयोग को जारी रखा और 343(3) संसद को उसके बाद भी अंग्रेजी के प्रयोग के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 35 के तहत केवल संसद द्वारा बनाए जाने वाले मौलिक अधिकार संबंधी कानूनों में कौन-से विषय शामिल हैं? 1. किसी राज्य या केंद्रशासित…

संविधान के अनुच्छेद 35 के तहत केवल संसद द्वारा बनाए जाने वाले मौलिक अधिकार संबंधी कानूनों में कौन-से विषय शामिल हैं? 1. किसी राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में लोक नियोजन के लिए निवास की शर्त तय करना [अनुच्छेद 16(3)] 2. सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के अतिरिक्त अन्य न्यायालयों को रिट जारी करने की शक्ति देना [अनुच्छेद 32(3)] 3. अस्पृश्यता के आचरण को दंडनीय अपराध घोषित करना (अनुच्छेद 17) 4. मानव के दुर्व्यापार और बलात्श्रम को दंडनीय अपराध घोषित करना (अनुच्छेद 23) नीचे दिए गए कू ट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

उत्तर और पूरी व्याख्या

चारों विषय अनुच्छेद 35 के तहत केवल संसद की अनन्य विधायी क्षमता में आते हैं ताकि पूरे देश में मौलिक अधिकारों और उनके दंड प्रावधानों में एकरूपता बनी रहे।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 355 और अनुच्छेद 365 के मध्य संबंध और उनके संवैधानिक प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 355 स…

संविधान के अनुच्छेद 355 और अनुच्छेद 365 के मध्य संबंध और उनके संवैधानिक प्रभावों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 355 संघ पर यह कर्तव्य आरोपित करता है कि वह बाह्य आक्रमण और आंतरिक अशांति से प्रत्येक राज्य की रक्षा करे तथा यह सुनिश्चित करे कि राज्य का शासन संविधान के उपबंधों के अनुसार चलाया जाए। 2. अनुच्छेद 365 के अनुसार, यदि कोई राज्य केंद्र द्वारा अपनी कार्यपालिका शक्ति के प्रयोग में दिए गए वैध निर्देशों का पालन करने में विफल रहता है, तो राष्ट्रपति यह मान सकते हैं कि ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिसमें राज्य का शासन संविधान के अनुसार नहीं चलाया जा सकता। 3. अनुच्छेद 365 के तहत विफलता को अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) लगाने का एक वैध आधार माना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 355 केंद्र का सुरक्षा कर्तव्य तय करता है, जबकि अनुच्छेद 365 केंद्र के निर्देशों की अवज्ञा पर अनुच्छेद 356 के तहत संवैधानिक तंत्र की विफलता का विधिक आधार तैयार करता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) के दुरुपयोग को रोकने के संदर्भ में एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) मामले में उच्चतम न्यायालय के मार…

संविधान के अनुच्छेद 356 (राष्ट्रपति शासन) के दुरुपयोग को रोकने के संदर्भ में एस. आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) मामले में उच्चतम न्यायालय के मार्गदर्शक सिद्धांतों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति की उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा ( Judicial Review) के अधीन है। 2. संसद के दोनों सदनों द्वारा उद्घोषणा का अनुमोदन किए जाने से पहले राष्ट्रपति राज्य विधान सभा को केवल निलंबित ( Suspend) कर सकते हैं, उसे भंग ( Dissolve) नहीं कर सकते। 3. यदि न्यायालय उद्घोषणा को असंवैधानिक पाता है, तो उसके पास बर्खास्त सरकार को बहाल करने और भंग विधान सभा को पुनर्जीवित करने की शक्ति है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। बोम्मई निर्णय (1994) ने अनुच्छेद 356 की मनमानी पर कड़ा अंकुश लगाया और न्यायिक समीक्षा तथा संसदीय अनुमोदन से पूर्व विधान सभा भंग न करने की शर्त तय की।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 356 के तहत 'राष्ट्रपति शासन' (President's Rule) लगाए जाने के संवैधानिक आधारों के संदर्भ में विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 356 — रा…

संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत 'राष्ट्रपति शासन' (President's Rule) लगाए जाने के संवैधानिक आधारों के संदर्भ में विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 356 — राज्यपाल की रिपोर्ट पर या अन्यथा, यदि राष्ट्रपति संतुष्ट हों कि राज्य का शासन संविधान के अनुसार नहीं चलाया जा सकता। 2. अनुच्छेद 365 — यदि राज्य संघ के वैध संवैधानिक निर्देशों का पालन करने में विफल रहे, तो यह ऐसी संवैधानिक विफलता मानने का आधार बन सकता है। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (c) है। अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को राज्यपाल की रिपोर्ट पर ही निर्भर नहीं करता—वे 'or otherwise' प्राप्त सामग्री के आधार पर भी संतुष्ट हो सकते हैं। अनुच्छेद 365 संघ के वैध निर्देशों की अवहेलना को ऐसी स्थिति मानने का संवैधानिक आधार देता है जिसमें राज्य सरकार संविधान के अनुसार नहीं चलाई जा रही। फिर भी राष्ट्रपति शासन स्वतः नहीं लग जाता; उद्घोषणा न्यायिक समीक्षा और संसदीय अनुमोदन के अधीन रहती है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 360 के तहत 'वित्तीय आपातकाल' (Financial Emergency) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसकी घोषणा राष्ट्रपति तब…

संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत 'वित्तीय आपातकाल' (Financial Emergency) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इसकी घोषणा राष्ट्रपति तब कर सकते हैं जब भारत या उसके किसी हिस्से की वित्तीय स्थिरता या साख खतरे में हो। 2. संसद के दोनों सदनों द्वारा इसे 2 महीने के भीतर साधारण बहुमत से अनुमोदित किया जाना चाहिए। 3. एक बार अनुमोदित होने के बाद यह तब तक जारी रह सकता है जब तक इसे वापस न लिया जाए; हर छह महीने में पुनः अनुमोदन की आवश्यकता नहीं है। 4. वित्तीय आपातकाल के दौरान उच्चतम न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों सहित संघ/राज्य से वेतन पाने वाले व्यक्तियों के वेतन-भत्तों में कटौती संबंधी निर्देश दिए जा सकते हैं। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 360 का आधार भारत या उसके किसी भाग की वित्तीय स्थिरता अथवा credit पर खतरा है। उद्घोषणा को दो महीने में संसद की स्वीकृति चाहिए, लेकिन राष्ट्रीय आपातकाल की तरह प्रत्येक छह महीने नवीनीकरण नहीं चाहिए। इसके दौरान संघ राज्यों को वित्तीय औचित्य के सिद्धांतों का पालन करने के निर्देश दे सकता है और वेतन-भत्तों में कटौती संबंधी निर्देश भी संभव हैं, जिनमें उच्चतम और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश शामिल हो सकते हैं। भारत में अब तक वित्तीय आपातकाल लागू नहीं किया गया है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनसंविधान के अनुच्छेद 365 के अनुसार, यदि कोई राज्य केंद्र सरकार द्वारा दिए गए वैध कार्यकारी निर्देशों (Directions) का पालन करने में विफल रहता है, त…

संविधान के अनुच्छेद 365 के अनुसार, यदि कोई राज्य केंद्र सरकार द्वारा दिए गए वैध कार्यकारी निर्देशों (Directions) का पालन करने में विफल रहता है, तो:

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। अनुच्छेद 365 यह नहीं कहता कि निर्देश न मानते ही राष्ट्रपति शासन स्वतः लग जाएगा; वह राष्ट्रपति को यह मानने का संवैधानिक आधार देता है कि राज्य सरकार संविधान के अनुसार नहीं चलाई जा रही। इसके बाद अनुच्छेद 356 के तहत उद्घोषणा की जा सकती है, पर वह न्यायिक समीक्षा सहित अन्य संवैधानिक नियंत्रणों के अधीन होगी। इसलिए इसे 'automatic dismissal' समझना गलत है।