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अभ्यास से समझ तक

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 152

एक सवाल हल कीजिए, उसका कारण समझिए, फिर आगे बढ़िए। करंट अफेयर्स, विषयवार अध्ययन और विगत वर्षों के प्रश्न अब एक जगह।

4666 प्रश्न संग्रह में3816 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित
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सत्र में प्रश्नों की संख्या

3021–3040 / 4666 प्रश्न

प्रश्न-संग्रह

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विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति (अनुच्छेद 123) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति अध्यादेश केवल तभी प्रख्यापि…

राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति (अनुच्छेद 123) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति अध्यादेश केवल तभी प्रख्यापित कर सकते हैं जब संसद के दोनों सदनों में से कोई एक सदन या दोनों सदन सत्र में न हों। 2. राष्ट्रपति का यह समाधान कि ऐसी परिस्थितियां विद्यमान हैं जिनके कारण तुरंत कार्रवाई करना आवश्यक हो गया है, न्यायिक समीक्षा से परे नहीं है। 3. अध्यादेश की शक्ति संसद की विधायी शक्ति के सह-विस्तृत ( Co-extensive) है, अर्थात राष्ट्रपति केवल उन्हीं विषयों पर अध्यादेश ला सकते हैं जिन पर संसद कानून बना सकती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 123 के तहत अध्यादेश संसद के सत्र में न होने पर जारी होता है, संसद की शक्ति के सह-विस्तृत है, और कू पर मामले (1970) के बाद से राष्ट्रपति का समाधान दुर्भावना के आधार पर न्यायिक समीक्षा योग्य है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति (अनुच्छेद 123) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति अध्यादेश तब जारी कर सकते है…

राष्ट्रपति की अध्यादेश जारी करने की शक्ति (अनुच्छेद 123) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति अध्यादेश तब जारी कर सकते हैं जब संसद के दोनों सदनों में से कम-से-कम एक सदन सत्र में न हो और तत्काल कार्रवाई आवश्यक हो। 2. अध्यादेश का प्रभाव संसद द्वारा बनाए गए अधिनियम के समान होता है। 3. संसद के पुनः समवेत होने के छह सप्ताह बाद अध्यादेश समाप्त हो जाता है, यदि उसे पहले निरस्त न किया जाए या विधायी रूप न दिया जाए। 4. अध्यादेश द्वारा संविधान में संशोधन किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (a) है। अनुच्छेद 123 अध्यादेश को अस्थायी विधायी साधन बनाता है, न कि संविधान संशोधन का विकल्प। राष्ट्रपति तभी अध्यादेश जारी कर सकते हैं जब दोनों सदन एक साथ सत्र में न हों और तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता हो। अध्यादेश संसद के कानून जैसी शक्ति रखता है, पर पुनःसमवेत संसद के छह सप्ताह बाद समाप्त हो जाता है। अनुच्छेद 368 की विशेष संशोधन प्रक्रिया को अध्यादेश से दरकिनार नहीं किया जा सकता।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रपति की वीटो शक्तियों (Veto Powers — अनुच्छेद 111) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आत्यंतिक वीटो (Absolute Veto) में राष्…

राष्ट्रपति की वीटो शक्तियों (Veto Powers — अनुच्छेद 111) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आत्यंतिक वीटो (Absolute Veto) में राष्ट्रपति विधेयक पर सहमति रोक देते हैं और विधेयक समाप्त हो जाता है। 2. निलंबनकारी वीटो (Suspensive Veto) में राष्ट्रपति गैर-धन विधेयक को पुनर्विचार के लिए लौटा सकते हैं; संसद उसे पुनः पारित कर दे तो राष्ट्रपति को सहमति देनी होती है। 3. धन विधेयक और संविधान संशोधन विधेयक पर निलंबनकारी वीटो उपलब्ध नहीं है। 4. जेबी वीटो (Pocket Veto) में राष्ट्रपति विधेयक को अनिश्चितकाल तक लंबित रख सकते हैं क्योंकि संविधान समय-सीमा निर्धारित नहीं करता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 111 सामान्य विधेयक पर राष्ट्रपति को सहमति, असहमति या पुनर्विचार के लिए वापसी का विकल्प देता है; धन विधेयक वापस नहीं किया जा सकता। संविधान संशोधन विधेयक पर 24वें संशोधन के बाद राष्ट्रपति को सहमति देनी ही होती है। भारतीय संविधान राष्ट्रपति के लिए निर्णय की समय-सीमा नहीं देता, इसलिए Pocket Veto की व्यावहारिक संभावना रहती है। पुनः पारित साधारण विधेयक पर राष्ट्रपति की सहमति बाध्यकारी हो जाती है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रपति के 'परिस्थितिगत विवेक' (Situational Discretion) के उदाहरणों में निम्नलिखित में से कौन-से शामिल हो सकते हैं? 1. त्रिशंकु लोकसभा की स्थि…

राष्ट्रपति के 'परिस्थितिगत विवेक' (Situational Discretion) के उदाहरणों में निम्नलिखित में से कौन-से शामिल हो सकते हैं? 1. त्रिशंकु लोकसभा की स्थिति में प्रधानमंत्री की नियुक्ति। 2. ऐसे मंत्रिमंडल को पद छोड़ने के लिए बाध्य करना जिसने लोकसभा का विश्वास खो दिया हो लेकिन इस्तीफा न दे। 3. लोकसभा में बहुमत खो चुकी मंत्रिपरिषद की सलाह पर लोकसभा भंग करने से इंकार करना और वैकल्पिक सरकार की संभावना तलाशना। उपर्युक्त में से कौन-से शामिल हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। सामान्य स्थिति में राष्ट्रपति मंत्रिपरिषद की सलाह से बंधे रहते हैं, पर अस्पष्ट बहुमत या सरकार के विश्वास खोने जैसी असाधारण राजनीतिक स्थितियों में सीमित परिस्थितिगत विवेक सामने आता है। राष्ट्रपति का लक्ष्य अपना राजनीतिक विकल्प थोपना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि प्रधानमंत्री लोकसभा का विश्वास रखता हो। त्रिशंकु सदन में किसे आमंत्रित किया जाए और पराजित मंत्रिपरिषद की विघटन-सलाह स्वीकार की जाए या वैकल्पिक सरकार की संभावना देखी जाए—ये इसी श्रेणी के उदाहरण हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रपति के अभिभाषण पर 'धन्यवाद प्रस्ताव' (Motion of Thanks) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति प्रत्येक आम चुनाव के …

राष्ट्रपति के अभिभाषण पर 'धन्यवाद प्रस्ताव' (Motion of Thanks) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राष्ट्रपति प्रत्येक आम चुनाव के बाद प्रथम सत्र और प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र के आरंभ में दोनों सदनों को एक साथ संबोधित करते हैं। 2. अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर लोकसभा और राज्यसभा में अलग-अलग चर्चा और मतदान होता है। 3. यदि लोकसभा धन्यवाद प्रस्ताव पारित नहीं करती, तो इसे सरकार की गंभीर संसदीय पराजय माना जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 87 राष्ट्रपति के विशेष अभिभाषण को आम चुनाव के बाद प्रथम सत्र तथा प्रत्येक वर्ष के प्रथम सत्र से जोड़ता है—इसे 'वित्तीय वर्ष' तक सीमित समझना ठीक नहीं। राष्ट्रपति दोनों सदनों की संयुक्त उपस्थिति को संबोधित करते हैं, लेकिन Motion of Thanks पर दोनों सदन अलग-अलग विचार करते हैं। लोकसभा में इसका पराजित होना सरकार के लिए विश्वास-संबंधी गंभीर राजनीतिक हार माना जाता है, क्योंकि अभिभाषण सरकार की नीतियों और कार्यक्रमों को प्रस्तुत करता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित सभी विवादों और शंकाओं की जाँच और अंतिम निर्णय किसके द्वारा किया जाता है?

राष्ट्रपति के चुनाव से संबंधित सभी विवादों और शंकाओं की जाँच और अंतिम निर्णय किसके द्वारा किया जाता है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। अनुच्छेद 71(1) राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव से उत्पन्न सभी संदेहों और विवादों का निर्णय सर्वोच्च न्यायालय को सौंपता है, और उसका निर्णय अंतिम होता है। निर्वाचन आयोग चुनाव की प्रक्रिया संचालित करता है, लेकिन चुनाव-विवाद का न्यायिक निर्णायक नहीं है। इसलिए 'चुनाव कौन कराता है' और 'चुनाव विवाद कौन तय करता है'—इन दोनों भूमिकाओं को अलग समझना चाहिए।

BPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2018राष्ट्रपति के संबंध में सही कथन चुनिए।
राष्ट्रपति के संबंध में सही कथन चुनिए।
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(b) वह संसद का अंग है

व्याख्या

  • BPSC की अंतिम Series-A उत्तर-कुंजी के अनुसार सही उत्तर (b) वह संसद का अंग है है।
UPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2023राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में कथनों पर विचार कीजिए: यदि चुनाव सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शून्य घोषित हो जाए तो निर्णय से पहले किए गए सभी राष्ट्रपति…
राष्ट्रपति चुनाव के संबंध में कथनों पर विचार कीजिए:
  1. यदि चुनाव सर्वोच्च न्यायालय द्वारा शून्य घोषित हो जाए तो निर्णय से पहले किए गए सभी राष्ट्रपति कार्य अमान्य हो जाते हैं।
  2. कुछ विधानसभाओं के भंग होने के कारण राष्ट्रपति चुनाव स्थगित किया जा सकता है।
  3. राष्ट्रपति को विधेयक पर निर्णय देने के लिए संविधान निश्चित समय-सीमा देता है।

कितने कथन सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(d) कोई नहीं

क्यों?

  • राष्ट्रपति चुनाव अमान्य होने पर पहले किए गए आधिकारिक कार्य स्वतः अमान्य नहीं होते।
  • रिक्त विधानसभाएँ चुनाव स्थगित करने का आधार नहीं हैं और राष्ट्रपति की assent के लिए सामान्यतः कोई निश्चित समय-सीमा नहीं है।
विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रपति चुनाव में मतों के मूल्य (Value of Vote) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एक विधायक (MLA) के मत का मूल्य राज्य की जनसं…

राष्ट्रपति चुनाव में मतों के मूल्य (Value of Vote) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. एक विधायक (MLA) के मत का मूल्य राज्य की जनसंख्या को विधानसभा के कुल निर्वाचित सदस्यों की संख्या और 1000 के गुणनफल से भाग देकर निकाला जाता है। 2. विभिन्न राज्यों के विधायकों के मत का मूल्य अलग-अलग हो सकता है क्योंकि यह राज्य की जनसंख्या पर निर्भर करता है। 3. संसद के सभी निर्वाचित सदस्यों (MPs) के मतों का मूल्य एक समान होता है। 4. जब तक 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना के प्रासंगिक आँकड़े प्रकाशित नहीं हो जाते, राष्ट्रपति चुनाव के लिए 1971 की जनगणना का आधार लागू रहता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 55 राष्ट्रपति चुनाव में राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व की समानता और संघ-राज्यों के बीच समतुल्यता का प्रयास करता है। MLA के मत का मूल्य 1971 की जनसंख्या और निर्वाचित विधानसभा सदस्यों पर आधारित सूत्र से निकाला जाता है; इसलिए राज्यों में मूल्य अलग हो सकता है। सभी निर्वाचित सांसदों के मत का मूल्य समान रहता है। 84वें संशोधन के बाद 1971 की जनगणना का आधार तब तक जारी है जब तक 2026 के बाद की पहली जनगणना के प्रासंगिक आँकड़े प्रकाशित न हो जाएँ।

UPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2018राष्ट्रपति चुनाव में:हर राज्य के विधायक के वोट का मूल्य अलग हो सकता है।लोकसभा सांसद का वोट राज्यसभा सांसद से अधिक मूल्य का होता है।
राष्ट्रपति चुनाव में:
  1. हर राज्य के विधायक के वोट का मूल्य अलग हो सकता है।
  2. लोकसभा सांसद का वोट राज्यसभा सांसद से अधिक मूल्य का होता है।
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(a) केवल 1

क्यों?

  • सभी निर्वाचित सांसदों के वोट का मूल्य समान होता है; विधायक का मूल्य राज्यवार बदलता है।
BPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2024राष्ट्रपति चुने जाने से पहले लोकसभा अध्यक्ष रह चुके निम्नलिखित व्यक्तियों में कौन थे?
राष्ट्रपति चुने जाने से पहले लोकसभा अध्यक्ष रह चुके निम्नलिखित व्यक्तियों में कौन थे?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(c) नीलम संजीव रेड्डी

क्यों?

  • नीलम संजीव रेड्डी 1967–69 और 1977 में लोकसभा अध्यक्ष रहे; बाद में 1977 में भारत के राष्ट्रपति बने।
विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नामांकन (Nomination) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के नामांकन (Nomination) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। राष्ट्रपति पद के वैध नामांकन के लिए कम-से-कम 50 निर्वाचक प्रस्तावक और 50 निर्वाचक अनुमोदक होने चाहिए। जमानत राशि ₹15,000 है, ₹25,000 नहीं। जमानत जब्ती का नियम भी विकल्प (d) में गलत दिया गया है—कानून में एक-छठे से जुड़ा मानदंड लागू होता है। इसलिए संख्या याद रखने का आसान तरीका है: राष्ट्रपति 50+50, उपराष्ट्रपति 20+20; दोनों के लिए जमानत ₹15,000।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment — अनुच्छेद 61) की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महाभियोग का आरोप संसद के किसी भ…

राष्ट्रपति पर महाभियोग (Impeachment — अनुच्छेद 61) की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महाभियोग का आरोप संसद के किसी भी सदन में शुरू किया जा सकता है। 2. प्रस्ताव पर उस सदन के कम-से-कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर होने चाहिए और राष्ट्रपति को 14 दिन का नोटिस दिया जाना चाहिए। 3. प्रस्ताव को प्रत्येक सदन में उस सदन की कुल सदस्य संख्या के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से पारित होना आवश्यक है। 4. संसद के मनोनीत सदस्य महाभियोग की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं, यद्यपि वे राष्ट्रपति के निर्वाचन में भाग नहीं लेते। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 61 के तहत आरोप किसी भी सदन से शुरू हो सकता है। नोटिस पर कम-से-कम एक-चौथाई सदस्यों के हस्ताक्षर और 14 दिन की सूचना आवश्यक है। प्रत्येक सदन में कुल सदस्य संख्या के दो-तिहाई बहुमत की शर्त अत्यंत कठोर है। एक महत्वपूर्ण अंतर यह है कि मनोनीत सांसद राष्ट्रपति चुनाव में वोट नहीं देते, लेकिन महाभियोग में भाग ले सकते हैं; वहीं राज्य विधानसभाएँ राष्ट्रपति चुनाव में भाग लेती हैं पर महाभियोग में नहीं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) की उद्घोषणा के संसदीय अनुमोदन और अवधि के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?

राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) की उद्घोषणा के संसदीय अनुमोदन और अवधि के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। राष्ट्रपति शासन की उद्घोषणा को दो महीने के भीतर दोनों सदनों से साधारण बहुमत द्वारा अनुमोदित कराना होता है। अनुमोदन के बाद यह छह-छह महीने के विस्तार से अधिकतम तीन वर्ष तक चल सकता है। लेकिन एक वर्ष से आगे बढ़ाने के लिए 44वें संशोधन ने दो समवर्ती शर्तें लगाईं: संबंधित क्षेत्र में राष्ट्रीय आपातकाल प्रभावी हो और निर्वाचन आयोग चुनाव कराने में कठिनाई प्रमाणित करे। यहाँ 'और' महत्वपूर्ण है—दोनों शर्तें चाहिए, केवल कोई एक नहीं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) लागू होने पर राज्य प्रशासन पर निम्नलिखित में से क्या प्रभाव पड़ता है? 1. राष्ट्रपति राज्य मंत्रिपरिषद के कार्यों क…

राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) लागू होने पर राज्य प्रशासन पर निम्नलिखित में से क्या प्रभाव पड़ता है? 1. राष्ट्रपति राज्य मंत्रिपरिषद के कार्यों को समाप्त कर सकते हैं और राज्यपाल राष्ट्रपति की ओर से प्रशासन चलाते हैं। 2. राज्य विधानसभा को निलंबित रखा जा सकता है या संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार भंग किया जा सकता है। 3. राज्य विधानमंडल की विधायी शक्तियाँ संसद द्वारा या संसद के प्राधिकार के तहत प्रयोग की जा सकती हैं। 4. संबंधित राज्य के उच्च न्यायालय की संवैधानिक शक्तियाँ निलंबित हो जाती हैं और सर्वोच्च न्यायालय उन्हें अपने हाथ में ले लेता है। उपर्युक्त में से कौन-से प्रभाव सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (a) है। राष्ट्रपति शासन में राज्य की कार्यपालिका राष्ट्रपति के नियंत्रण में आती है और राज्यपाल उनके प्रतिनिधि के रूप में प्रशासन चलाते हैं। राज्य विधानमंडल की शक्तियाँ संसद को स्थानांतरित हो सकती हैं तथा विधानसभा suspended animation में रखी या बाद में भंग की जा सकती है। लेकिन अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को उच्च न्यायालय की शक्तियाँ अपने हाथ में लेने की अनुमति नहीं देता; न्यायपालिका की स्वतंत्र स्थिति बनी रहती है। इसलिए कथन 4 स्पष्ट रूप से गलत है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रपति शासन (President's Rule — अनुच्छेद 356) और एस.आर. बोम्मई वाद (1994) के दिशानिर्देशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. …

राष्ट्रपति शासन (President's Rule — अनुच्छेद 356) और एस.आर. बोम्मई वाद (1994) के दिशानिर्देशों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 356 के तहत जारी उद्घोषणा संसद के दोनों सदनों द्वारा 2 महीने के भीतर साधारण बहुमत से अनुमोदित होनी चाहिए। 2. संसद द्वारा अनुमोदन मिलने से पूर्व राष्ट्रपति राज्य विधानसभा को भंग नहीं कर सकते, केवल निलंबित रख सकते हैं। 3. यदि न्यायालय अनुच्छेद 356 की उद्घोषणा को असंवैधानिक पाता है, तो वह बर्खास्त राज्य सरकार और भंग विधानसभा को पुनर्स्थापित कर सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। एस.आर. बोम्मई वाद (1994) के अनुसार अनुच्छेद 356 की न्यायिक समीक्षा की जा सकती है; संसद के दोनों सदनों की मंजूरी मिलने तक विधानसभा को केवल निलंबित रखा जा सकता है, भंग नहीं किया जा सकता; और दुर्भावनापूर्ण बर्खास्तगी पाए जाने पर न्यायालय सरकार को बहाल कर सकता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) का मुख्य दायित्व क्या है?

राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (NIDM) का मुख्य दायित्व क्या है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

NIDM Disaster Management Act की धारा 42 के तहत आपदा प्रबंधन में प्रशिक्षण, अनुसंधान, दस्तावेजीकरण और क्षमता निर्माण का प्रमुख संस्थान है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) का गठन किस कानून की धारा 44 के तहत हुआ?

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) का गठन किस कानून की धारा 44 के तहत हुआ?

उत्तर और पूरी व्याख्या

NDRF Disaster Management Act, 2005 की धारा 44 के तहत प्राकृतिक और मानव-निर्मित आपदाओं में विशेषज्ञ प्रतिक्रिया के लिए गठित है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रीय आपातकाल ( National Emergency — अनुच्छेद 352) के प्रभाव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैसे ही युद्ध या बाह्य आक्रमण …

राष्ट्रीय आपातकाल ( National Emergency — अनुच्छेद 352) के प्रभाव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जैसे ही युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर आपातकाल की उद्घोषणा होती है, अनुच्छेद 19 के तहत मूल अधिकार स्वतः निलंबित हो जाते हैं। Armed Rebellion) के आधार पर घोषित आपातकाल के दौरान अनुच्छेद 19 के अधिकार स्वतः निलंबित नहीं होते हैं। 2. सशस्त्र विद्रोह ( 3. 44वें संविधान संशोधन के पश्चात किसी भी परिस्थिति में अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त अधिकारों को निलंबित नहीं किया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 358 के तहत युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर आपातकाल घोषित होने पर अनुच्छेद 19 स्वतः निलंबित होता है, लेकिन सशस्त्र विद्रोह के मामले में नहीं। 44वें संशोधन द्वारा अनुच्छेद 359 में संशोधन कर अनुच्छेद 20 और 21 को निलंबन से पूरी तरह सुरक्षित कर दिया गया।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनराष्ट्रीय आपातकाल का मूल अधिकारों पर प्रभाव के संदर्भ में अनुच्छेद 358 और 359 के अंतर पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 358 केवल युद्ध या बाह्य आक्रमण …

राष्ट्रीय आपातकाल का मूल अधिकारों पर प्रभाव के संदर्भ में अनुच्छेद 358 और 359 के अंतर पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 358 केवल युद्ध या बाह्य आक्रमण के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लागू होने पर अनुच्छेद 19 के संरक्षण को स्वतः प्रभावित करता है; सशस्त्र विद्रोह के आधार पर नहीं। 2. अनुच्छेद 359 राष्ट्रपति को आदेश द्वारा निर्दिष्ट मूल अधिकारों के न्यायालयीय प्रवर्तन को निलंबित करने की शक्ति देता है, किंतु अनुच्छेद 20 और 21 के प्रवर्तन को निलंबित नहीं किया जा सकता। 3. अनुच्छेद 358 का प्रभाव संबंधित आपातकाल की अवधि से जुड़ा है, जबकि अनुच्छेद 359 का प्रभाव राष्ट्रपति के आदेश में निर्दिष्ट अवधि और क्षेत्र तक रहता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 358 केवल युद्ध या बाह्य आक्रमण वाले आपातकाल में अनुच्छेद 19 पर लागू होता है; armed rebellion वाले आपातकाल में नहीं। अनुच्छेद 359 स्वयं मूल अधिकार को समाप्त नहीं करता, बल्कि राष्ट्रपति के आदेश में निर्दिष्ट अधिकारों के प्रवर्तन हेतु न्यायालय जाने के अधिकार को निलंबित कर सकता है। 44वें संशोधन के बाद अनुच्छेद 20 और 21 को इस प्रक्रिया से भी सुरक्षित रखा गया है। साथ ही अनुच्छेद 358 के संरक्षण का लाभ केवल आपातकाल से संबंधित कानून/कार्यकारी कार्रवाई को मिलता है—यह बारीकी UPSC के लिए महत्वपूर्ण है।