वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 148
एक सवाल हल कीजिए, उसका कारण समझिए, फिर आगे बढ़िए। करंट अफेयर्स, विषयवार अध्ययन और विगत वर्षों के प्रश्न अब एक जगह।
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2941–2960 / 4666 प्रश्न
प्रश्न-संग्रह
प्रश्न खोलकर हल करेंमूल अधिकारों (भाग III) और राज्य के नीति निदेशक तत्वों (भाग IV) में संशोधन किस प्रक्रिया द्वारा किया जा सकता है?
मूल अधिकारों (भाग III) और राज्य के नीति निदेशक तत्वों (भाग IV) में संशोधन किस प्रक्रिया द्वारा किया जा सकता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
मूल अधिकारों, नीति निदेशक तत्वों तथा उन सभी उपबंधों में संशोधन जो प्रथम और तृतीय श्रेणी में शामिल नहीं हैं, संसद के विशेष बहुमत द्वारा किया जाता है।
मूल अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों के मध्य टकराव के ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित मामलों का सही कालानुक्रम क्या है?
मूल अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों के मध्य टकराव के ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित मामलों का सही कालानुक्रम क्या है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
चंपाकम दोराईराजन मामला (1951) → गोलकनाथ मामला (1967) → केशवानंद भारती मामला (1973) → मिनर्वा मिल्स मामला (1980)।
मूल अधिकारों की आलोचना के संदर्भ में आलोचकों द्वारा लगाए गए प्रमुख आक्षेपों में निम्नलिखित में से कौन-से शामिल हैं? 1. व्यापक सीमाएं और अत्यधिक अ…
मूल अधिकारों की आलोचना के संदर्भ में आलोचकों द्वारा लगाए गए प्रमुख आक्षेपों में निम्नलिखित में से कौन-से शामिल हैं? 1. व्यापक सीमाएं और अत्यधिक अपवाद (Too many restrictions and exceptions) 2. सामाजिक और आर्थिक अधिकारों (जैसे काम का अधिकार, सामाजिक सुरक्षा) की अनुपस्थिति 3. शब्दावली की अत्यधिक जटिलता एवं वकीलों का स्वर्ग (Lawyer's Paradise) 4. निवारक निरोध का प्रावधान जो लोकतांत्रिक सिद्धांतों के प्रतिकूल है नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
उत्तर और पूरी व्याख्या
आलोचकों ने भाग III की आलोचना में ये सभी बिंदु उठाए थे—सर आइवर जेनिंग्स ने इसे 'वकीलों का स्वर्ग' कहा, कई आलोचकों ने कहा कि अधिकार एक हाथ से दिए गए और दूसरे हाथ से छीन लिए गए, तथा निवारक निरोध का प्रावधान तानाशाही है।
मूल अधिकारों के संदर्भ में 'आच्छादन का सिद्धांत' (Doctrine of Eclipse) और 'पृथक्करणीयता का सिद्धांत' (Doctrine of Severability) का प्रत्यक्ष संबं…
मूल अधिकारों के संदर्भ में 'आच्छादन का सिद्धांत' (Doctrine of Eclipse) और 'पृथक्करणीयता का सिद्धांत' (Doctrine of Severability) का प्रत्यक्ष संबंध किस अनुच्छेद से है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
अनुच्छेद 13 से दोनों सिद्धांत जुड़े हैं: यदि कोई कानून मूल अधिकारों के असंगत है, तो असंगति की मात्रा तक वह शून्य होगा (पृथक्करणीयता) तथा मूल अधिकारों के लागू होने पर वह कानून सुप्त/आच्छादित हो जाता है (आच्छादन)।
मूल भारतीय संविधान के हिंदी संस्करण का सुलेखन किसने किया?
मूल भारतीय संविधान के हिंदी संस्करण का सुलेखन किसने किया?
उत्तर और पूरी व्याख्या
मूल संविधान के हिंदी संस्करण का सुलेखन वसंत कृष्ण वैद्य ने किया। प्रेम बिहारी नारायण रायज़ादा ने अंग्रेज़ी संस्करण को हस्तलिखित किया था। नंदलाल बोस और शांतिनिकेतन के कलाकार मुख्यतः कलात्मक सज्जा और अलंकरण से जुड़े थे।
मूल संरचना के सिद्धांत ( Doctrine of Basic Structure) के ऐतिहासिक विकास से संबंधित निम्नलिखित वादों का सही कालानुक्रमिक क्रम क्या है?
मूल संरचना के सिद्धांत ( Doctrine of Basic Structure) के ऐतिहासिक विकास से संबंधित निम्नलिखित वादों का सही कालानुक्रमिक क्रम क्या है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
→ → → सही कालानुक्रम है: शंकरी प्रसाद वाद (1951) सज्जन सिंह वाद (1965) गोलकनाथ वाद (1967) के शवानंद भारती वाद (1973) → मिनर्वा मिल्स वाद (1980)। मिनर्वा मिल्स में न्यायालय ने न्यायिक समीक्षा और संसद की सीमित संशोधन शक्ति को मूल संरचना का हिस्सा माना।
मूल संविधान (Original Constitution) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से प्रावधान शामिल नहीं था/थे? 1. मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) 2.…
मूल संविधान (Original Constitution) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा/से प्रावधान शामिल नहीं था/थे? 1. मौलिक कर्तव्य (Fundamental Duties) 2. प्रशासनिक अधिकरण (Administrative Tribunals) 3. नगरपालिकाएं (Municipalities - भाग IX-A) 4. सहकारी समितियां (Co-operative Societies - भाग IX-B) नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:
उत्तर और पूरी व्याख्या
ये चारों मूल संविधान में नहीं थे। मौलिक कर्तव्य व अधिकरण 42वें संशोधन (1976), नगरपालिकाएं 74वें संशोधन (1992) तथा सहकारी समितियां 97वें संशोधन (2011) द्वारा जोड़ी गईं।
मूल संविधान के पन्नों के कलात्मक अलंकरण से किनका सीधा संबंध था? 1. नंदलाल बोस 2. बेओहर राममनोहर सिन्हा 3. अबनिंद्रनाथ टैगोर
मूल संविधान के पन्नों के कलात्मक अलंकरण से किनका सीधा संबंध था? 1. नंदलाल बोस 2. बेओहर राममनोहर सिन्हा 3. अबनिंद्रनाथ टैगोर
उत्तर और पूरी व्याख्या
नंदलाल बोस के निर्देशन में शांतिनिकेतन के कलाकारों ने मूल संविधान का कलात्मक अलंकरण किया। बेओहर राममनोहर सिन्हा इस कार्य से सीधे जुड़े थे और मूल प्रस्तावना की सज्जा में उनकी विशेष भूमिका थी। दिए गए विकल्पों में अबनिंद्रनाथ टैगोर इस संविधान-अलंकरण टीम के सदस्य के रूप में नहीं आते।
मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) के ऐतिहासिक मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. न्य…
मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) के ऐतिहासिक मामले में उच्चतम न्यायालय द्वारा दिए गए निर्णय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 21 के तहत 'विधि द्वारा स्थापित प्रक्रिया' ( Procedure established by law) का अर्थ वस्तुतः 'विधि की सम्यक प्रक्रिया' ( Due process of law) ही है। 2. न्यायालय ने प्रतिपादित किया कि अनुच्छेद 14, 19 और 21 परस्पर अनन्य ( Mutually exclusive) नहीं हैं, बल्कि वे एक स्वर्ण त्रिभुज (Golden Triangle) बनाते हैं। 3. विदेश यात्रा करने का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक अभिन्न अंग है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। मेनका गांधी वाद (1978) ने अनुच्छेद 21 की संकीर्ण व्याख्या (ए.के . गोपालन 1950) को पलटते हुए माना कि प्रक्रिया केवल वैधानिक ही नहीं, बल्कि उचित, निष्पक्ष और युक्तियुक्त ( Just fair and reasonable , , ) होनी चाहिए। इसने अनुच्छेद 14, 19 और 21 के बीच स्वर्णिम त्रिभुज की अवधारणा स्थापित की।
मेनका गांधी बनाम भारत संघ मामला (1978) किस संदर्भ में भारतीय संवैधानिक विधि का मील का पत्थर माना जाता है?
मेनका गांधी बनाम भारत संघ मामला (1978) किस संदर्भ में भारतीय संवैधानिक विधि का मील का पत्थर माना जाता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
मेनका गांधी बनाम भारत संघ (1978) में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 21 की संकीर्ण व्याख्या को अस्वीकार करते हुए कहा कि जीवन या व्यक्तिगत स्वतंत्रता से वंचित करने वाली प्रक्रिया 'उचित, न्यायसंगत और निष्पक्ष' होनी चाहिए। इससे भारतीय संवैधानिक विधि में न्यायसंगत प्रक्रिया (due process) जैसा व्यापक संरक्षण विकसित हुआ।
मौलिक अधिकारों ( Part III) और राज्य के नीति निदेशक तत्वों (Part IV) के मध्य संवैधानिक वरीयता और न्यायिक टकराव के ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम…
मौलिक अधिकारों ( Part III) और राज्य के नीति निदेशक तत्वों (Part IV) के मध्य संवैधानिक वरीयता और न्यायिक टकराव के ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपकम दोरैराजन बनाम मद्रास राज्य (1951) मामले में उच्चतम न्यायालय ने व्यवस्था दी कि मौलिक अधिकार और नीति निदेशक तत्वों के बीच टकराव की स्थिति में मौलिक अधिकार प्रभावी होंगे। C 2. 25वें संविधान संशोधन अधिनियम (1971) द्वारा अनुच्छेद 31 अंतःस्थापित कर यह प्रावधान किया गया कि अनुच्छेद 39( ) और b c 39( ) के नीति निदेशक तत्वों को लागू करने वाली विधि को अनुच्छेद 14 और 19 के उल्लंघन के आधार पर शून्य नहीं माना जाएगा। 3. मिनर्वा मिल्स बनाम भारत संघ (1980) मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने माना कि संविधान मौलिक अधिकारों और नीति निदेशक तत्वों के बीच संतुलन के आधारभूत स्तंभ पर टिका हुआ है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
C तीनों कथन सही हैं। चंपकम दोरैराजन (1951) में मौलिक अधिकारों को वरीयता मिली, 25वें संशोधन ने 31 जोड़ा जिसे के शवानंद भारती में आंशिक रूप से वैध माना गया, और मिनर्वा मिल्स (1980) में दोनों के संतुलन को मूल ढांचा माना गया।
मौलिक अधिकारों के अतिरिक्त किन भागों में मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा, 1948 के सिद्धांत परिलक्षित होते हैं?प्रस्तावनानीति-निदेशक तत्वमौलिक कर्त…
- प्रस्तावना
- नीति-निदेशक तत्व
- मौलिक कर्तव्य
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- तीनों में मानव गरिमा, सामाजिक न्याय और सामुदायिक दायित्वों के सिद्धांत दिखते हैं।
मौलिक अधिकारों पर युक्तियुक्त प्रतिबंध की समीक्षा करते समय किन बातों को ध्यान में रखा जाता है?सामान्य जनता का हित सुरक्षित होप्रचलित सामाजिक मूल्…
- सामान्य जनता का हित सुरक्षित हो
- प्रचलित सामाजिक मूल्य और सामाजिक आवश्यकताएँ बाधक न हों
- नीति-निदेशक तत्वों को नज़रअंदाज़ किया जा सकता है
- सामूहिक हित अधिक महत्त्वपूर्ण नहीं है
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- BPSC की अंतिम कुंजी के अनुसार कथन 1 और 2 सही हैं; युक्तियुक्तता में सार्वजनिक हित और सामाजिक संदर्भ दोनों महत्त्वपूर्ण हैं।
मौलिक कर्तव्यों की कानूनी स्थिति (Legal Status) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
मौलिक कर्तव्यों की कानूनी स्थिति (Legal Status) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
मौलिक कर्तव्य स्वयं अप्रवर्तनीय हैं, लेकिन संसद विधि बनाकर इनके उल्लंघन पर दंड निर्धारित कर सकती है (जैसे राष्ट्रगौरव अपमान निवारण अधिनियम, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम आदि)। साथ ही, ये केवल भारतीय नागरिकों पर लागू होते हैं।
मौलिक कर्तव्यों के महत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ये नागरिकों को सचेत करते हैं कि अपने अधिकारों का प्रयोग करते समय उन्हे…
मौलिक कर्तव्यों के महत्व के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ये नागरिकों को सचेत करते हैं कि अपने अधिकारों का प्रयोग करते समय उन्हें अपने देश, समाज और साथी नागरिकों के प्रति अपने कर्तव्यों का भी ध्यान रखना चाहिए। 2. ये असामाजिक गतिविधियों और राष्ट्रविरोधी प्रवृत्तियों के विरुद्ध एक चेतावनी के रूप में कार्य करते हैं। 3. अदालतें किसी कानून की संवैधानिक वैधता का निर्धारण करते समय मौलिक कर्तव्यों को ध्यान में रख सकती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने 1992 में माना कि किसी कानून की तर्कसंगतता की जांच करते समय अनुच्छेद 51A के कर्तव्यों को ध्यान में रखा जा सकता है।
मौलिक कर्तव्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल संविधान में 10 मौलिक कर्तव्य शामिल थे। 2. 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा …
मौलिक कर्तव्यों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मूल संविधान में 10 मौलिक कर्तव्य शामिल थे। 2. 42वें संविधान संशोधन 1976 द्वारा संविधान में एक नया भाग IV-Aऔर अनुच्छेद 51A जोड़ा गया। 3. 86वें संविधान संशोधन 2002 द्वारा 11वां मौलिक कर्तव्य जोड़ा गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
कथन 1 गलत है क्योंकि मूल संविधान (1950) में कोई मौलिक कर्तव्य नहीं था। 42वें संशोधन (1976) द्वारा पहली बार 10 कर्तव्य जोड़े गए थे।
मौलिक कर्तव्यों के संदर्भ में:संविधान ने इन्हें लागू कराने के लिए विशिष्ट विधायी प्रक्रिया प्रदान की है।ये कानूनी कर्तव्यों के समरूप/सहसंबद्ध हैं…
- संविधान ने इन्हें लागू कराने के लिए विशिष्ट विधायी प्रक्रिया प्रदान की है।
- ये कानूनी कर्तव्यों के समरूप/सहसंबद्ध हैं।
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- अंतिम UPSC कुंजी में दोनों कथन गलत माने गए।
यदि ‘एक राज्य एक चुनाव’ लागू किया जाए, तो भारतीय संविधान के किस अनुच्छेद में संशोधन की आवश्यकता होगी?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- BPSC की अंतिम कुंजी में विकल्प E स्वीकार किया गया है।
यदि उपराष्ट्रपति अपने पद से त्यागपत्र देना चाहे, तो वह अपना त्यागपत्र किसे संबोधित करता है?
यदि उपराष्ट्रपति अपने पद से त्यागपत्र देना चाहे, तो वह अपना त्यागपत्र किसे संबोधित करता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (c) है। अनुच्छेद 67(a) के अनुसार उपराष्ट्रपति अपने हस्ताक्षरयुक्त लेख द्वारा राष्ट्रपति को संबोधित करके पद त्याग सकता है। तुलना के लिए राष्ट्रपति अपना त्यागपत्र उपराष्ट्रपति को देता है, जबकि उपराष्ट्रपति राष्ट्रपति को। इन संवैधानिक पदों के resignation recipient को जोड़ी के रूप में याद रखना उपयोगी है।
यदि किसी क्षेत्र को भारत के संविधान की पाँचवीं अनुसूची के अंतर्गत लाया जाए, तो उसका प्रमुख परिणाम क्या है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- पाँचवीं अनुसूची अनुसूचित क्षेत्रों और अनुसूचित जनजातियों के प्रशासन एवं संरक्षण से जुड़ी है।
- राज्यपाल भूमि-हस्तांतरण जैसे विषयों पर विशेष विनियम बना सकते हैं।