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अभ्यास से समझ तक

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 140

एक सवाल हल कीजिए, उसका कारण समझिए, फिर आगे बढ़िए। करंट अफेयर्स, विषयवार अध्ययन और विगत वर्षों के प्रश्न अब एक जगह।

4666 प्रश्न संग्रह में3816 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित
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सत्र में प्रश्नों की संख्या

2781–2800 / 4666 प्रश्न

प्रश्न-संग्रह

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UPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2026भारत की संसद में सदस्यों द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: अतारांकित प्रश्न ऐसे प्रश्न हैं, जिन पर कोई…
भारत की संसद में सदस्यों द्वारा पूछे जाने वाले प्रश्नों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
  1. अतारांकित प्रश्न ऐसे प्रश्न हैं, जिन पर कोई सदस्य सदन में मौखिक उत्तर चाहता है।
  2. तारांकित प्रश्न ऐसे प्रश्न हैं, जिन पर कोई सदस्य लिखित उत्तर चाहता है।
  3. किसी अतारांकित प्रश्न पर कोई अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछा जा सकता है।

उपर्युक्त कथनों पर आधारित निम्नलिखित निष्कर्षो में से कौन-सा सही है?

उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(c) केवल एक कथन सही है

व्याख्या

  • कथन 1 गलत: अतारांकित प्रश्न का उत्तर लिखित रूप में दिया जाता है।
  • कथन 2 गलत: तारांकित प्रश्न का उत्तर सदन में मौखिक रूप से दिया जाता है।
  • कथन 3 सही: अतारांकित प्रश्न पर अनुपूरक प्रश्न नहीं पूछे जाते; अनुपूरक प्रश्न तारांकित प्रश्न के मौखिक उत्तर के बाद संभव हैं।
परीक्षा नोट: Starred = मौखिक + अनुपूरक संभव; Unstarred = लिखित + अनुपूरक नहीं।
UPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2023भारत के अनुसूचित क्षेत्रों के संबंध में कथनों पर विचार कीजिए: किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने की अधिसूचना राष्ट्रपति के आदेश से होती …
भारत के अनुसूचित क्षेत्रों के संबंध में कथनों पर विचार कीजिए:
  1. किसी क्षेत्र को अनुसूचित क्षेत्र घोषित करने की अधिसूचना राष्ट्रपति के आदेश से होती है।
  2. जिला सबसे बड़ी और गाँवों का समूह सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई हो सकती है।
  3. मुख्यमंत्री प्रतिवर्ष केंद्र को प्रशासनिक रिपोर्ट भेजते हैं।

कितने कथन सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(b) केवल दो

क्यों?

  • अनुसूचित क्षेत्र राष्ट्रपति के आदेश से अधिसूचित होते हैं और प्रशासनिक इकाई जिला से गाँव-समूह तक हो सकती है।
  • वार्षिक रिपोर्ट राज्यपाल राष्ट्रपति को भेजता है, मुख्यमंत्री नहीं।
विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के उपराष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल (Electoral College — अनुच्छेद 66) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

भारत के उपराष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल (Electoral College — अनुच्छेद 66) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। उपराष्ट्रपति का निर्वाचन राष्ट्रपति से अलग है। अनुच्छेद 66 के अनुसार इसमें लोकसभा और राज्यसभा—दोनों सदनों के निर्वाचित तथा मनोनीत सदस्य भाग लेते हैं। राज्य विधानसभाओं या विधान परिषदों के सदस्य इसमें भाग नहीं लेते। राष्ट्रपति चुनाव में मनोनीत सांसद वोट नहीं देते और राज्य विधानसभाएँ शामिल होती हैं; उपराष्ट्रपति चुनाव में ठीक उलटा ढाँचा है—यही सबसे महत्वपूर्ण तुलना है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के उपराष्ट्रपति के वेतन और भत्तों के संदर्भ में क्या प्रावधान है?

भारत के उपराष्ट्रपति के वेतन और भत्तों के संदर्भ में क्या प्रावधान है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (a) है। संविधान उपराष्ट्रपति को उसके उपराष्ट्रपति पद के लिए अलग वेतन नहीं देता। वह राज्यसभा का पदेन सभापति है और उसी हैसियत में निर्धारित वेतन व भत्ते प्राप्त करता है। जब वह कार्यवाहक राष्ट्रपति बनता है, तब राज्यसभा सभापति का वेतन नहीं बल्कि राष्ट्रपति पद से संबंधित वेतन-भत्ते प्राप्त करता है। इसलिए पद और कार्य के आधार पर भुगतान की प्रकृति बदलती है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ( CAG — अनुच्छेद 148) की स्वतंत्रता की संवैधानिक सुरक्षा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. CA…

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ( CAG — अनुच्छेद 148) की स्वतंत्रता की संवैधानिक सुरक्षा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. CAG को पद की सुरक्षा प्राप्त है और उसे केवल उसी रीति और आधारों पर हटाया जा सकता है जैसे सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को। 2. वह अपना पद छोड़ने के बाद भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी भी अन्य पद का पात्र नहीं होता है। 3. CAG के कार्यालय का प्रशासनिक व्यय, वेतन और भत्ते भारत की संचित निधि पर भारित होते हैं और इन पर संसद में मतदान नहीं होता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 148 के तहत कै ग को सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान पद सुरक्षा प्राप्त है; सेवानिवृत्ति के बाद वह किसी भी सरकारी पद के लिए अयोग्य होता है; और उसका वेतन व कार्यालय व्यय संचित निधि पर भारित होता है। <PARSED TEXT FOR PAGE: 16 / 16> प्र. सं. सही उत्तर Explanation grounded in M. Laxmikanth) व्याख्या (

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ( CAG) के संवैधानिक पद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. CAG को उसी रीति से और उन्हीं आधारों …

भारत के नियंत्रक एवं महालेखापरीक्षक ( CAG) के संवैधानिक पद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. CAG को उसी रीति से और उन्हीं आधारों पर पद से हटाया जा सकता है जिस रीति और आधारों पर उच्चतम न्यायालय के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है (अनुच्छेद 148)। 2. पद त्यागने के बाद CAG भारत सरकार या किसी राज्य सरकार के अधीन किसी अन्य पद का पात्र नहीं होता। 3. CAG के कार्यालय का प्रशासनिक व्यय, वेतन और भत्ते भारत की संचित निधि पर भारित (Charged upon Consolidated Fund of India) होते हैं, जिन पर संसद में मतदान नहीं होता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। संविधान का अनुच्छेद 148 CAG को स्वतंत्र बनाए रखने के लिए कार्यकाल की सुरक्षा, पुनः नियुक्ति पर रोक, और संचित निधि पर भारित व्यय की गारंटी देता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के निर्वाचन आयोग ( Election Commission of India — अनुच्छेद 324) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ( CE…

भारत के निर्वाचन आयोग ( Election Commission of India — अनुच्छेद 324) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ( CEC) और अन्य निर्वाचन आयुक्तों के पास समान शक्तियां, वेतन और भत्ते होते हैं जो सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान हैं। 2. मुख्य निर्वाचन आयुक्त को उसी रीति से हटाया जा सकता है जिस रीति से सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाया जाता है। 3. अन्य निर्वाचन आयुक्तों को मुख्य निर्वाचन आयुक्त की सिफारिश के बिना पद से नहीं हटाया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। टी.एन. शेषन वाद (1995) के अनुसार मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को समान शक्तियां व वेतन प्राप्त हैं। CEC को पद से हटाने की प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश के समान है और अन्य आयुक्तों को केवल CEC की सिफारिश पर ही हटाया जा सकता है (अनुच्छेद 324(5))।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India—अनुच्छेद 324) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्…

भारत के निर्वाचन आयोग (Election Commission of India—अनुच्छेद 324) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों के लिए मतदाता सूची और चुनाव संचालन का अधीक्षण, निदेशन और नियंत्रण निर्वाचन आयोग में निहित है। 2. पंचायतों और नगरपालिकाओं के चुनाव भी भारत का निर्वाचन आयोग कराता है। 3. यह केंद्र और राज्यों के लिए एक साझा अखिल भारतीय संवैधानिक निकाय है। सही कथन चुनिए।

उत्तर और पूरी व्याख्या

अनुच्छेद 324 के तहत संसद, राज्य विधानमंडलों, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनाव भारत के निर्वाचन आयोग के अधीन हैं। पंचायत और नगरपालिका चुनाव अलग राज्य निर्वाचन आयोगों द्वारा अनुच्छेद 243K और 243ZA के तहत कराए जाते हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के मतदान व्यवहार के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. जाति ऐतिहासिक रूप से प्रभावशाली कारक रही है। 2. विकास, शासन और कल्याणकारी योजनाएँ भी मतद…

भारत के मतदान व्यवहार के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. जाति ऐतिहासिक रूप से प्रभावशाली कारक रही है। 2. विकास, शासन और कल्याणकारी योजनाएँ भी मतदाता विकल्प को प्रभावित करती हैं। 3. करिश्माई नेतृत्व का प्रभाव केवल लोकसभा चुनाव तक सीमित है।

उत्तर और पूरी व्याख्या

कथन 3 गलत है। नेतृत्व का प्रभाव राष्ट्रीय, राज्य और स्थानीय—सभी स्तरों पर हो सकता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के महान्यायवादी ( Attorney General for India) के कार्यालय के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महान्यायवादी को संसद के दोनों सदन…

भारत के महान्यायवादी ( Attorney General for India) के कार्यालय के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महान्यायवादी को संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार है, लेकिन मतदान का अधिकार नहीं है। 2. वह संसद की किसी भी समिति, जिसमें उसे सदस्य के रूप में नामित किया गया हो, में भाग ले सकता है। 3. उसे संसद सदस्य के समान सभी विशेषाधिकार और उन्मुक्तियां ( Privileges and immunities) प्राप्त होती हैं। 4. वह सरकार का पूर्णकालिक परामर्शदाता होता है और उसे निजी विधिक वकालत करने से पूरी तरह प्रतिबंधित किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

कथन 4 गलत है क्योंकि महान्यायवादी सरकारी कर्मचारी (पूर्णकालिक) नहीं होता; उसे निजी विधिक वकालत करने की अनुमति होती है, बशर्ते वह भारत सरकार के विरुद्ध किसी मामले में खड़ा न हो। कथन 1, 2 और 3 सही हैं (अनुच्छेद 88 और 105)।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के महान्यायवादी ( Attorney General for India) के संवैधानिक पद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 76 के तहत राष्ट्रपत…

भारत के महान्यायवादी ( Attorney General for India) के संवैधानिक पद के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 76 के तहत राष्ट्रपति द्वारा उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के योग्य व्यक्ति को महान्यायवादी नियुक्त किया जाता है। 2. वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यन्त पद धारण करता है और संविधान में उसका कोई निश्चित कार्यकाल या पारिश्रमिक तय नहीं है। 3. उसे संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही में बोलने और भाग लेने का अधिकार है, किंतु मत देने ( Right to vote) का अधिकार नहीं है (अनुच्छेद 88)। 4. वह एक पूर्णकालिक सरकारी कर्मचारी नहीं है और उसे निजी विधिक वकालत ( Private legal practice) करने से रोका नहीं गया है, बशर्ते वह भारत सरकार के खिलाफ कोई मामला न ले। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

चारों कथन सही हैं। महान्यायवादी देश का सर्वोच्च कानून अधिकारी है जिसे संसदीय विशेषाधिकार प्राप्त हैं, वह सरकारी वकील नहीं बल्कि भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार है और सरकार की अनुमति से निजी वकालत कर सकता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के महान्यायवादी (Attorney General of India—अनुच्छेद 76) के लिए कौन-सी योग्यता आवश्यक है?

भारत के महान्यायवादी (Attorney General of India—अनुच्छेद 76) के लिए कौन-सी योग्यता आवश्यक है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

अनुच्छेद 76 के अनुसार महान्यायवादी बनने के लिए व्यक्ति में सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश बनने की योग्यता होनी चाहिए। उसका निश्चित संवैधानिक कार्यकाल नहीं है और वह राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है।

UPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2022भारत के महान्यायवादी और सॉलिसिटर जनरल के संदर्भ में: दोनों ही संसद की बैठकों में भाग लेने वाले सरकार के एकमात्र विधि अधिकारी हैं।संविधान के अनुसा…
भारत के महान्यायवादी और सॉलिसिटर जनरल के संदर्भ में:
  1. दोनों ही संसद की बैठकों में भाग लेने वाले सरकार के एकमात्र विधि अधिकारी हैं।
  2. संविधान के अनुसार सरकार के त्यागपत्र पर महान्यायवादी को भी त्यागपत्र देना अनिवार्य है।
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(d) न तो 1, न ही 2

क्यों?

  • संसदीय कार्यवाही में भाग लेने का संवैधानिक अधिकार महान्यायवादी को है; सॉलिसिटर जनरल का पद संवैधानिक नहीं।
  • महान्यायवादी राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करता है; सरकार बदलने पर त्यागपत्र संवैधानिक अनिवार्यता नहीं।
BPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2018भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति कौन करता है?
भारत के महान्यायवादी की नियुक्ति कौन करता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(b) भारत के राष्ट्रपति

व्याख्या

  • BPSC की अंतिम Series-A उत्तर-कुंजी के अनुसार सही उत्तर (b) भारत के राष्ट्रपति है।
BPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2025भारत के महान्यायवादी के बारे में कौन-सा कथन सही है?
भारत के महान्यायवादी के बारे में कौन-सा कथन सही है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(a) वे राष्ट्रपति को विधिक मामलों पर सलाह देते हैं

क्यों?

  • महान्यायवादी भारत सरकार के सर्वोच्च विधि अधिकारी हैं और राष्ट्रपति को विधिक विषयों पर सलाह देते हैं; उन्हें संसद में बोलने/भाग लेने का अधिकार भी है, पर मतदान का नहीं।
विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के राष्ट्रपति और राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत प्राप्त व्यक्तिगत उन्मुक्तियों ( Personal Immunities) के संदर्भ में निम्नलिखित क…

भारत के राष्ट्रपति और राज्यपाल को संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत प्राप्त व्यक्तिगत उन्मुक्तियों ( Personal Immunities) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वे अपने पद की शक्तियों और कर्तव्यों के प्रयोग में किए गए किसी कार्य के लिए किसी भी न्यायालय के प्रति उत्तरदायी नहीं हैं। 2. उनके कार्यकाल के दौरान उनके विरुद्ध किसी भी न्यायालय में कोई आपराधिक कार्यवाही ( Criminal proceedings) शुरू नहीं की जा सकती और न ही जारी रखी जा सकती है। 3. उनके कार्यकाल के दौरान उनकी गिरफ्तारी या कारावास के लिए किसी न्यायालय से कोई वारंट जारी नहीं किया जा सकता। 4. उनके द्वारा व्यक्तिगत हैसियत से किए गए कार्यों के लिए 2 महीने की पूर्व लिखित सूचना दिए बिना कोई दीवानी मुकदमा दायर नहीं किया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

चारों कथन सही हैं। अनुच्छेद 361 राष्ट्रपति और राज्यपाल को आपराधिक मामलों में पूर्ण उन्मुक्ति तथा दीवानी मामलों में 2 महीने के नोटिस की शर्त के साथ संरक्षण प्रदान करता है।

UPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2025भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: इस शक्ति के प्रयोग पर सीमित न्यायिक समीक्षा संभव है।राष्ट्रपति…
भारत के राष्ट्रपति की क्षमादान शक्ति के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
  1. इस शक्ति के प्रयोग पर सीमित न्यायिक समीक्षा संभव है।
  2. राष्ट्रपति इसे केंद्र सरकार की सलाह के बिना स्वतंत्र रूप से प्रयोग कर सकते हैं।
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(a) केवल 1

क्यों?

  • अनुच्छेद 72 के अंतर्गत क्षमादान शक्ति पूर्णतः न्यायिक समीक्षा से परे नहीं है; दुर्भावना, मनमानी आदि पर समीक्षा संभव है।
  • राष्ट्रपति संवैधानिक रूप से मंत्रिपरिषद की सहायता और सलाह पर कार्य करते हैं; इसलिए कथन 2 गलत है।
विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के राष्ट्रपति के चुनाव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद के दोनों सदनों के मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल ( E…

भारत के राष्ट्रपति के चुनाव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद के दोनों सदनों के मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल ( Electoral College) का हिस्सा होते हैं। 2. राज्यों की विधान परिषदों ( Legislative Councils) के निर्वाचित सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में मतदान करने के पात्र नहीं होते हैं। 3. सभी राज्यों की विधानसभाओं के सदस्यों के मतों का कुल मूल्य संसद के दोनों सदनों के सभी निर्वाचित सदस्यों के कुल मत मूल्य के बराबर होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

कथन 1 गलत है क्योंकि संसद के दोनों सदनों के केवल 'निर्वाचित' सदस्य ही निर्वाचक मंडल में शामिल होते हैं, मनोनीत सदस्य नहीं। कथन 2 और 3 सही हैं; विधान परिषदों के सदस्य भाग नहीं लेते, और सभी विधायकों के मतों का कुल मूल्य सभी सांसदों के कुल मत मूल्य के बराबर होता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल (Electoral College — अनुच्छेद 54) में निम्नलिखित में से कौन-कौन शामिल होते हैं? 1. संसद के दोनों सदनों के निर…

भारत के राष्ट्रपति के निर्वाचक मंडल (Electoral College — अनुच्छेद 54) में निम्नलिखित में से कौन-कौन शामिल होते हैं? 1. संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य। 2. राज्यों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य। 3. दिल्ली और पुडुचेरी केंद्रशासित प्रदेशों की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य। 4. संसद और राज्य विधानसभाओं के मनोनीत सदस्य तथा राज्य विधान परिषदों के सदस्य। नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए:

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (a) है। अनुच्छेद 54 के अनुसार राष्ट्रपति के चुनाव में संसद के दोनों सदनों के केवल निर्वाचित सदस्य तथा राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्रशासित प्रदेशों—दिल्ली और पुडुचेरी—की विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्य भाग लेते हैं। मनोनीत सांसद, मनोनीत विधायक और विधान परिषदों के सदस्य इस निर्वाचन मंडल का हिस्सा नहीं होते। UPSC में सबसे सामान्य जाल यही है कि राज्यसभा और लोकसभा के मनोनीत सदस्यों को भी शामिल मान लिया जाए।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनभारत के राष्ट्रपति के पद की रिक्ति (Vacancy) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सामान्य कार्यकाल समाप्त होने वाली रिक्ति को भरने क…

भारत के राष्ट्रपति के पद की रिक्ति (Vacancy) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सामान्य कार्यकाल समाप्त होने वाली रिक्ति को भरने के लिए चुनाव कार्यकाल समाप्त होने से पहले पूरा किया जाना चाहिए। 2. यदि कार्यकाल समाप्त होने तक नया राष्ट्रपति निर्वाचित नहीं हो पाता, तो उपराष्ट्रपति स्वतः कार्यवाहक राष्ट्रपति बन जाते हैं। 3. मृत्यु, त्यागपत्र, हटाए जाने या अन्य कारण से आकस्मिक रिक्ति होने पर छह महीने के भीतर चुनाव कराया जाना चाहिए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। अनुच्छेद 62 सामान्य रिक्ति के चुनाव को कार्यकाल समाप्त होने से पहले पूरा करने और आकस्मिक रिक्ति को छह महीने के भीतर भरने का निर्देश देता है। कथन 2 गलत है, क्योंकि अनुच्छेद 56(1)(c) के अनुसार निवर्तमान राष्ट्रपति अपना पाँच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी तब तक पद पर बने रहते हैं जब तक उत्तराधिकारी पद ग्रहण न कर ले। उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति तभी बनते हैं जब वास्तव में पद रिक्त हो।