वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 128
एक सवाल हल कीजिए, उसका कारण समझिए, फिर आगे बढ़िए। करंट अफेयर्स, विषयवार अध्ययन और विगत वर्षों के प्रश्न अब एक जगह।
छोटे कदम, बेहतर तैयारी
विषय चुनकर शुरू करें। उत्तर के साथ व्याख्या पढ़ें और कठिन प्रश्न दोहराएँ।
2541–2560 / 4666 प्रश्न
प्रश्न-संग्रह
प्रश्न खोलकर हल करेंकिस अनुसूची के तहत जनजातीय भूमि का निजी पक्ष को खनन हेतु हस्तांतरण शून्य घोषित किया जा सकता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- अनुसूचित क्षेत्रों और जनजातीय हितों की सुरक्षा पाँचवीं अनुसूची से जुड़ी है।
किस आयोग ने सुझाव दिया कि राज्यपाल राज्य के बाहर का प्रतिष्ठित, निष्पक्ष और हाल की सक्रिय राजनीति से दूर व्यक्ति होना चाहिए?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- यह सरकारिया आयोग की प्रमुख सिफारिशों में था।
किस राज्य में पंचायत व्यवस्था नहीं है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- 73वें संशोधन के विशेष अपवादों के कारण प्रश्न बहुविकल्पीय था; BPSC ने ‘एक से अधिक/कोई नहीं’ विकल्प स्वीकार किया।
किस संविधान संशोधन द्वारा एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए लोकसभा और विधानसभाओं में नामांकन संबंधी प्रावधान समाप्त किया गया?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- 104वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 ने एंग्लो-इंडियन नामांकन की व्यवस्था समाप्त की।
किस संविधान संशोधन ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद का आकार लोकसभा की कुल सदस्य संख्या के 15% तक सीमित किया?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 ने प्रधानमंत्री सहित केंद्रीय मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा के 15% तक सीमित की।
किस संवैधानिक उपचार को ‘postmortem’ भी कहा जाता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- BPSC की अंतिम उत्तर-कुंजी के अनुसार सही उत्तर (c) उत्प्रेषण है।
किसी दल को किसी राज्य में State Party के रूप में मान्यता मिलने के मानदंडों में कौन-से शामिल हैं? 1. विधानसभा में 6% वैध मत + कम-से-कम 2 सीटें। 2.…
किसी दल को किसी राज्य में State Party के रूप में मान्यता मिलने के मानदंडों में कौन-से शामिल हैं? 1. विधानसभा में 6% वैध मत + कम-से-कम 2 सीटें। 2. उस राज्य से लोकसभा चुनाव में 6% वैध मत + कम-से-कम 1 लोकसभा सीट। 3. विधानसभा की कम-से-कम 3% सीटें या 3 सीटें, जो अधिक हो। 4. लोकसभा या विधानसभा चुनाव में राज्य के कुल वैध मतों का कम-से-कम 8%, भले सीट न जीते।
उत्तर और पूरी व्याख्या
चारों State Party मान्यता के वैकल्पिक मानदंडों में शामिल हैं। इसके अतिरिक्त लोकसभा में राज्य को आवंटित प्रत्येक 25 सीटों या उसके अंश पर कम-से-कम एक सीट जीतने का एक और मानदंड भी है।
किसी देश के संविधान का मुख्य उद्देश्य किस विकल्प से सबसे बेहतर व्यक्त होता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- संविधान शासन-संस्थाओं की रचना के साथ उनकी शक्तियों और सीमाओं को निर्धारित करता है।
- संवैधानिकता का मूल उद्देश्य सत्ता को नियमों और अधिकारों से बाँधना है।
किसी राज्य की मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से किसके प्रति उत्तरदायी होती है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
व्याख्या
- अनुच्छेद 164(2) के अनुसार राज्य की मंत्रिपरिषद सामूहिक रूप से राज्य की विधान सभा के प्रति उत्तरदायी होती है।
किसी विधायी अधिनियम या कार्यपालिका कार्रवाई की Judicial Review किन आधारों पर की जा सकती है? 1. वह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करे। 2. कानून बनाने व…
किसी विधायी अधिनियम या कार्यपालिका कार्रवाई की Judicial Review किन आधारों पर की जा सकती है? 1. वह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करे। 2. कानून बनाने वाला प्राधिकारी अपनी विधायी क्षमता से बाहर चला गया हो। 3. वह संविधान के किसी अन्य बाध्यकारी प्रावधान के प्रतिकूल हो। उपर्युक्त में से कौन-से आधार मान्य हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (d) है। Judicial Review का उद्देश्य केवल Fundamental Rights की रक्षा तक सीमित नहीं है। कोई कानून legislative competence से बाहर हो—जैसे Union/State Lists की संवैधानिक सीमा का उल्लंघन—तो भी वह चुनौती योग्य है। इसी तरह संविधान के अन्य mandatory provisions, federal limitations, procedural constitutional requirements या Basic Structure से टकराव भी review का आधार बन सकते हैं। कार्यपालिका की कार्रवाई भी constitutional और statutory limits के अधीन रहती है।
किसी समुदाय को अनुसूचित जनजाति घोषित करने के लिए माने जाने वाले मानदंड हैं: 1. आदिम लक्षणों के संकेत 2. विशिष्ट संस्कृति 3. व्यापक समुदाय से संपर…
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- BPSC की अंतिम कुंजी में चारों मानदंड सही माने गए हैं।
किसे किसी देश की ‘सामाजिक पूँजी’ का हिस्सा माना जाएगा?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- सामाजिक पूँजी विश्वास, नेटवर्क और सहयोग जैसी सामाजिक संस्थाओं से बनती है।
कृष्ण कु मार सिंह बनाम बिहार राज्य (2017) मामले में उच्चतम न्यायालय की 7-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अध्यादेश शक्ति पर क्या युगांतकारी निर्णय द…
कृष्ण कु मार सिंह बनाम बिहार राज्य (2017) मामले में उच्चतम न्यायालय की 7-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने अध्यादेश शक्ति पर क्या युगांतकारी निर्णय दिया? 1. अध्यादेश प्रख्यापित करने की शक्ति का प्रयोग अनिवार्य रूप से विधायिका के प्रति जवाबदेह होना चाहिए और अध्यादेश को विधायिका के पटल पर रखना एक अनिवार्य संवैधानिक आवश्यकता है। 2. अध्यादेश को विधायिका के पटल पर न रखना एक गंभीर संवैधानिक उल्लंघन है। 3. अध्यादेश के समाप्त हो जाने पर उसके तहत सृजित सभी अधिकार स्वतः समाप्त हो जाते हैं, जब तक कि लोकहित में उन्हें अपरिवर्तनीय न माना जाए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। 2017 के 7-न्यायाधीशों के फैसले ने कार्यपालिका द्वारा अध्यादेशों के दुरुपयोग पर सख्त सीमाएं तय कीं और सदन के पटल पर रखने को अनिवार्य घोषित किया।
के . एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017) मामले में उच्चतम न्यायालय की 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के निर्णय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर …
के . एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ (2017) मामले में उच्चतम न्यायालय की 9-न्यायाधीशों की संविधान पीठ के निर्णय के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. न्यायालय ने सर्वसम्मति से निर्णय दिया कि निजता का अधिकार ( Right to Privacy) संविधान के भाग III के तहत एक अंतर्निहित मौलिक अधिकार है। 2. निजता का अधिकार मुख्य रूप से अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार से उत्पन्न होता है। 3. न्यायालय ने माना कि निजता का अधिकार एक पूर्ण ( Absolute) अधिकार है और राज्य इस पर कोई भी प्रतिबंध नहीं लगा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
कथन 3 गलत है क्योंकि न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अन्य मौलिक अधिकारों की तरह निजता का अधिकार भी निरपेक्ष नहीं है; इसे वैधता, विधिपूर्ण उद्देश्य (वैध राज्य हित) और आनुपातिकता ( Proportionality ) के परीक्षण के आधार पर सीमित किया जा सकता है। कथन 1 और 2 सही हैं।
के शब सिंह मामला (विशेष संदर्भ 1 of 1964 / Presidential Reference) में उच्चतम न्यायालय ने संसदीय विशेषाधिकारों बनाम न्यायपालिका और मौलिक अधिकारों…
के शब सिंह मामला (विशेष संदर्भ 1 of 1964 / Presidential Reference) में उच्चतम न्यायालय ने संसदीय विशेषाधिकारों बनाम न्यायपालिका और मौलिक अधिकारों पर क्या युगांतकारी निर्णय दिया? 1. सदन द्वारा किसी गैर-सदस्य को सदन की अवमानना ( Contempt of House) के लिए जेल भेजने पर, न्यायालय को अनुच्छेद 226 या 32 के तहत बंदी प्रत्यक्षीकरण ( Habeas Corpus) याचिका सुनने का अधिकार है। 2. न्यायालय के न्यायाधीश और याचिकाकर्ता का वकील सदन के समक्ष अवमानना के दोषी नहीं माने जा सकते क्योंकि वे अपने संवैधानिक कर्तव्यों का पालन कर रहे होते हैं। 3. सदन के विशेषाधिकार नागरिकों के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार (अनुच्छेद 21) के अधीन हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। 1964 के राष्ट्रपति संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि विधायिका निरपेक्ष नहीं है; नागरिक अनुच्छेद 21 के तहत अदालत जा सकते हैं और जज या वकील पर विशेषाधिकार हनन का आरोप नहीं लगाया जा सकता।
के शवानंद भारती बनाम के रल राज्य (1973) मामले में प्रतिपादित मूल संरचना के सिद्धांत ( Basic Structure Doctrine) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर…
के शवानंद भारती बनाम के रल राज्य (1973) मामले में प्रतिपादित मूल संरचना के सिद्धांत ( Basic Structure Doctrine) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. सर्वोच्च न्यायालय की अब तक की सबसे बड़ी 13-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 7:6 के बहुमत से यह ऐतिहासिक निर्णय दिया। 2. न्यायालय ने माना कि अनुच्छेद 368 संसद को संविधान में संशोधन करने की शक्ति देता है, किंतु यह शक्ति असीमित नहीं है और संसद संविधान की मूल संरचना को नष्ट या विकृत नहीं कर सकती। 3. न्यायालय ने गोलकनाथ मामले (1967) के उस निर्णय को उलट दिया जिसमें कहा गया था कि संसद मौलिक अधिकारों में कोई संशोधन नहीं कर सकती। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। 24 अप्रैल 1973 को आए इस निर्णय ने संसद की संशोधन शक्ति को स्वीकार किया किंतु मूल ढांचे के सिद्धांत द्वारा उस पर अंकुश लगाया।
के शवानंद भारती वाद (1973) के ऐतिहासिक फैसले के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह अब तक की सबसे बड़ी 13 न्यायाधीशों की संविधान पी…
के शवानंद भारती वाद (1973) के ऐतिहासिक फैसले के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह अब तक की सबसे बड़ी 13 न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा 7:6 के बहुमत से दिया गया निर्णय था। 2. न्यायालय ने 24वें संविधान संशोधन की वैधता को बरकरार रखा लेकिन माना कि संसद संविधान की मूल संरचना को नष्ट नहीं कर सकती। 3. न्यायालय ने माना कि प्रस्तावना संविधान का अभिन्न अंग है और इसमें अनुच्छेद 368 के तहत संशोधन किया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। 24 अप्रैल 1973 को 13 न्यायाधीशों की पीठ ने 7:6 से फैसला सुनाया। इसने माना कि संसद मूल अधिकारों सहित संविधान के किसी भी हिस्से में संशोधन कर सकती है, लेकिन वह 'मूल संरचना' ( Basic Structure ) को नुकसान या नष्ट नहीं कर सकती। प्रस्तावना को संविधान का अभिन्न अंग माना गया।
के. एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामला (2017) में नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 'निजता के अधिकार' (Right to Privacy) को किस अनुच्छेद के तहत …
के. एस. पुट्टास्वामी बनाम भारत संघ मामला (2017) में नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने 'निजता के अधिकार' (Right to Privacy) को किस अनुच्छेद के तहत मौलिक अधिकार घोषित किया?
उत्तर और पूरी व्याख्या
पुट्टास्वामी मामले (2017) में सुप्रीम कोर्ट ने सर्वसम्मति से निर्णय दिया कि निजता का अधिकार अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का एक आंतरिक व अंतर्निहित हिस्सा है।
केंद्र और राज्यों की ऋण लेने की शक्ति (Borrowing Powers) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
केंद्र और राज्यों की ऋण लेने की शक्ति (Borrowing Powers) के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 292 संघ को भारत की संचित निधि की साख पर उधार लेने की शक्ति देता है, जबकि अनुच्छेद 293 राज्यों की उधारी को भारत के क्षेत्र के भीतर सीमित करता है। इसलिए राज्य सरकार सीधे विदेशी स्रोतों से ऋण नहीं ले सकती। यदि राज्य पर केंद्र का ऋण बकाया हो या केंद्र की गारंटी वाला ऋण मौजूद हो, तो अनुच्छेद 293(3) के तहत केंद्र की सहमति महत्वपूर्ण हो जाती है।
केंद्र प्रायोजित योजनाओं ( Centrally Sponsored Schemes - CSS) और राजकोषीय संघवाद के संदर्भ में राज्यों की चिंताओं पर विचार कीजिए: 1. CSS के तहत ध…
केंद्र प्रायोजित योजनाओं ( Centrally Sponsored Schemes - CSS) और राजकोषीय संघवाद के संदर्भ में राज्यों की चिंताओं पर विचार कीजिए: 1. CSS के तहत धन विशिष्ट योजनाओं के लिए सशर्त (Tied funds) दिया जाता है, जिससे राज्यों की प्राथमिकताओं के अनुसार खर्च करने की स्वायत्तता सीमित होती है। 2. इन योजनाओं में राज्यों को अनिवार्य रूप से अपना मिलान हिस्सा ( Matching share, जैसे 40% या 50%) लगाना होता है, जिससे उनके स्वयं के विकासात्मक बजट पर दबाव पड़ता है। 3. 14वें और 15वें वित्त आयोगों तथा नीति आयोग के उप-समूहों ने CSS की संख्या को युक्तिसंगत बनाने और राज्यों को अधिक लचीलापन (Flexibility) देने की सिफारिश की है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। CSS केंद्र-राज्य वित्तीय संबंधों में तनाव का एक बड़ा बिंदु रही हैं क्योंकि वे राज्यों को उनकी स्थानीय आवश्यकताओं के बजाय केंद्रीय प्राथमिकताओं पर खर्च करने को विवश करती हैं।