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अभ्यास से समझ तक

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 122

एक सवाल हल कीजिए, उसका कारण समझिए, फिर आगे बढ़िए। करंट अफेयर्स, विषयवार अध्ययन और विगत वर्षों के प्रश्न अब एक जगह।

4666 प्रश्न संग्रह में3816 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित
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2421–2440 / 4666 प्रश्न

प्रश्न-संग्रह

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विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 261 के Full Faith and Credit सिद्धांत के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. संघ और प्रत्येक राज्य के public acts, records और judicial proce…

अनुच्छेद 261 के Full Faith and Credit सिद्धांत के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. संघ और प्रत्येक राज्य के public acts, records और judicial proceedings को पूरे भारत में full faith and credit दिया जाएगा। 2. भारत के किसी भाग के civil court के final judgments/orders को कानून के अनुसार भारत में अन्यत्र execute किया जा सकता है। 3. अनुच्छेद 261(3) criminal sentences के लिए इसी प्रकार का स्वतः nationwide execution rule नहीं बनाता।

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों सही हैं। अनुच्छेद 261(3) विशेष रूप से civil courts के final judgments और orders की execution की बात करता है; criminal judgments के लिए वही स्वतः-execution clause नहीं है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 263 के तहत 'अंतर-राज्यीय परिषद' (Inter-State Council) की स्थापना किसके द्वारा की जा सकती है?

अनुच्छेद 263 के तहत 'अंतर-राज्यीय परिषद' (Inter-State Council) की स्थापना किसके द्वारा की जा सकती है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। अनुच्छेद 263 राष्ट्रपति को अंतर-राज्यीय परिषद स्थापित करने की शक्ति देता है, यदि उन्हें लगता है कि लोकहित में ऐसी परिषद उपयोगी होगी। परिषद राज्यों के बीच विवादों की जाँच/सलाह, साझा हित के विषयों पर चर्चा और नीति-समन्वय को बढ़ावा दे सकती है। 1990 में सरकारिया आयोग की सिफारिशों के बाद स्थायी अंतर-राज्यीय परिषद की स्थापना राष्ट्रपति के आदेश से की गई।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 27 (किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय के बारे में स्वतंत्रता) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

अनुच्छेद 27 (किसी विशिष्ट धर्म की अभिवृद्धि के लिए करों के संदाय के बारे में स्वतंत्रता) के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

अनुच्छेद 27 किसी व्यक्ति को ऐसे कर के भुगतान के लिए बाध्य किए जाने से बचाता है जिसकी आय विशेष रूप से किसी एक धर्म या धार्मिक संप्रदाय के संवर्धन या पोषण में लगाई जाए। यह हर प्रकार के नियामक शुल्क को निषिद्ध नहीं करता; सेवा या प्रशासन से जुड़ा शुल्क कर से भिन्न हो सकता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 28 के तहत शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित में से किस संस्थान में धार्मिक श…

अनुच्छेद 28 के तहत शैक्षणिक संस्थानों में धार्मिक शिक्षा या धार्मिक उपासना में उपस्थिति के संदर्भ में निम्नलिखित में से किस संस्थान में धार्मिक शिक्षा पूर्णतः प्रतिबंधित है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

अनुच्छेद 28(1) के अनुसार राज्य निधि से पूर्णतः पोषित किसी भी शिक्षा संस्था में कोई धार्मिक शिक्षा नहीं दी जाएगी।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 29 (अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह भारत के किसी भी भाग में रहने वाले नागरिक…

अनुच्छेद 29 (अल्पसंख्यक वर्गों के हितों का संरक्षण) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. यह भारत के किसी भी भाग में रहने वाले नागरिकों के किसी भी अनुभाग (Section of Citizens) को अपनी बोली, भाषा या संस्कृति सुरक्षित रखने का अधिकार देता है। 2. उच्चतम न्यायालय के अनुसार, अनुच्छेद 29 का दायरा केवल अल्पसंख्यकों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें बहुसंख्यक भी शामिल हैं। 3. नागरिकों को केवल धर्म, मूलवंश, जाति या भाषा के आधार पर राज्य द्वारा पोषित शिक्षण संस्थान में प्रवेश से वंचित नहीं किया जा सकता। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि 'नागरिकों के किसी अनुभाग' शब्द से स्पष्ट है कि यह केवल धार्मिक/ भाषाई अल्पसंख्यकों तक सीमित नहीं है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 299 के तहत सरकारी संविदा के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. संविदा राष्ट्रपति/राज्यपाल द्वारा की गई व्यक्त होनी चाहिए। 2. उसे उनकी ओर से…

अनुच्छेद 299 के तहत सरकारी संविदा के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. संविदा राष्ट्रपति/राज्यपाल द्वारा की गई व्यक्त होनी चाहिए। 2. उसे उनकी ओर से विधिवत अधिकृत व्यक्ति निष्पादित करे। 3. संवैधानिक औपचारिकताओं का पालन न होने पर संविदा सामान्यतः सरकार के विरुद्ध अनुबंध के रूप में प्रवर्तनीय नहीं होती।

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों सही हैं। अनुच्छेद 299 की औपचारिक शर्तें अनिवार्य हैं। गैर-अनुपालन में अनुबंध सरकार पर बाध्यकारी नहीं होता, हालांकि कुछ परिस्थितियों में restitution जैसे अलग विधिक उपाय उपलब्ध हो सकते हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 3 के तहत संसद द्वारा किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाले विधेयक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऐ…

अनुच्छेद 3 के तहत संसद द्वारा किसी राज्य के क्षेत्र, सीमा या नाम में परिवर्तन करने वाले विधेयक के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऐसा विधेयक संसद में केवल राष्ट्रपति की पूर्व सिफारिश से ही पेश किया जा सकता है। 2. राष्ट्रपति को संबंधित राज्य के विधानमंडल के विचार जानने के लिए विधेयक भेजना अनिवार्य है। 3. राष्ट्रपति या संसद संबंधित राज्य विधानमंडल के विचारों को मानने के लिए बाध्य हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

कथन 3 गलत है क्योंकि संसद या राष्ट्रपति संबंधित राज्य विधानमंडल के विचारों से बंधे नहीं होते; वे उन्हें स्वीकार या अस्वीकार कर सकते हैं। इसीलिए भारत को 'विनाशी राज्यों का अविनाशी संघ' कहा जाता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 30 (शिक्षण संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक-वर्गों का अधिकार) के तहत संविधान किस आधार पर अल्पसंख्यकों की मान्यता देता ह…

अनुच्छेद 30 (शिक्षण संस्थाओं की स्थापना और प्रशासन करने का अल्पसंख्यक-वर्गों का अधिकार) के तहत संविधान किस आधार पर अल्पसंख्यकों की मान्यता देता है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

अनुच्छेद 30 में स्पष्ट रूप से केवल दो प्रकार के अल्पसंख्यकों—'धर्म या भाषा पर आधारित' (Religion or Language) का उल्लेख है। संविधान में 'अल्पसंख्यक' शब्द को कहीं परिभाषित नहीं किया गया है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. धार्मिक या भाषायी अल्पसंख्यकों को अपन…

अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के अधिकारों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. धार्मिक या भाषायी अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान स्थापित और प्रशासित करने का अधिकार है। 2. राज्य सहायता देने में इस आधार पर विभेद नहीं करेगा कि संस्था किसी धार्मिक या भाषायी अल्पसंख्यक के प्रबंधन में है। 3. अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को शैक्षणिक मानकों, स्वच्छता, पाठ्यक्रम या शिक्षकों की न्यूनतम योग्यताओं से संबंधित सभी सामान्य विनियमों से पूर्ण छूट प्राप्त है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

कथन 1 और 2 सही हैं। अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान स्थापित और प्रशासित करने का अधिकार देता है तथा राज्य सहायता में केवल अल्पसंख्यक प्रबंधन के आधार पर भेदभाव रोकता है। यह अधिकार पूर्ण निरंकुशता नहीं देता; शैक्षणिक उत्कृष्टता, शिक्षक-योग्यता, स्वास्थ्य और प्रशासन की निष्पक्षता जैसे वैध नियामक मानक लागू हो सकते हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 300 के तहत सरकार की वाद-क्षमता के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. भारत संघ के नाम से वाद लाया/किया जा सकता है। 2. राज्य अपने नाम से वाद …

अनुच्छेद 300 के तहत सरकार की वाद-क्षमता के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. भारत संघ के नाम से वाद लाया/किया जा सकता है। 2. राज्य अपने नाम से वाद ला/झेल सकता है। 3. संघ और राज्य विधिक व्यक्तित्व रखते हैं और संपत्ति/संविदा संबंधों में भाग ले सकते हैं।

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन अनुच्छेद 300 तथा राज्य के विधिक व्यक्तित्व की सामान्य संवैधानिक व्यवस्था से मेल खाते हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 309 के तहत लोक सेवाओं के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. संसद/राज्य विधानमंडल भर्ती और सेवा-शर्तों को कानून से विनियमित कर सकते हैं। 2. …

अनुच्छेद 309 के तहत लोक सेवाओं के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. संसद/राज्य विधानमंडल भर्ती और सेवा-शर्तों को कानून से विनियमित कर सकते हैं। 2. कानून बनने तक राष्ट्रपति/राज्यपाल नियम बना सकते हैं। 3. संविधान प्रत्येक लोक सेवक का न्यूनतम वेतन स्वयं निश्चित करता है।

उत्तर और पूरी व्याख्या

कथन 1 और 2 सही हैं। संविधान सेवा-विनियमन की शक्ति देता है, लेकिन सामान्य लोक सेवकों के वेतन-भत्तों की कोई सार्वभौमिक न्यूनतम दर स्वयं तय नहीं करता।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 310 के 'Doctrine of Pleasure' के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. संघ की रक्षा/सिविल सेवा के सदस्य राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करत…

अनुच्छेद 310 के 'Doctrine of Pleasure' के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. संघ की रक्षा/सिविल सेवा के सदस्य राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं। 2. राज्य की सिविल सेवा के सदस्य राज्यपाल के प्रसादपर्यंत पद धारण करते हैं। 3. भारत में यह सिद्धांत पूर्णतः निरपेक्ष है और अनुच्छेद 311 जैसी कोई सीमा नहीं है।

उत्तर और पूरी व्याख्या

कथन 3 गलत है। भारत में pleasure doctrine संवैधानिक सीमाओं—विशेषकर अनुच्छेद 311—के अधीन है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 311 के तहत सिविल सेवकों की सुरक्षा के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी से अधीनस्थ प्राधिकारी द्वारा बर्खास्…

अनुच्छेद 311 के तहत सिविल सेवकों की सुरक्षा के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. नियुक्ति करने वाले प्राधिकारी से अधीनस्थ प्राधिकारी द्वारा बर्खास्त/हटाया नहीं जा सकता। 2. सामान्यतः बर्खास्तगी, हटाने या पदावनति से पहले आरोपों की सूचना और सुनवाई का युक्तियुक्त अवसर देना होता है।

उत्तर और पूरी व्याख्या

दोनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 311(1) और 311(2) क्रमशः प्राधिकारी-सुरक्षा और उचित जांच/सुनवाई की सुरक्षा देते हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 311(2) में विभागीय जांच से छूट के स्पष्ट अपवाद कौन-से हैं? 1. आपराधिक आरोप पर दोषसिद्धि। 2. जांच कराना व्यावहारिक रूप से संभव न होना। 3.…

अनुच्छेद 311(2) में विभागीय जांच से छूट के स्पष्ट अपवाद कौन-से हैं? 1. आपराधिक आरोप पर दोषसिद्धि। 2. जांच कराना व्यावहारिक रूप से संभव न होना। 3. राष्ट्रपति/राज्यपाल की संतुष्टि कि राज्य की सुरक्षा के हित में जांच करना समीचीन नहीं।

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों अनुच्छेद 311(2) के proviso में मान्य अपवाद हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 312 के तहत नई अखिल भारतीय सेवा कैसे बनाई जा सकती है?

अनुच्छेद 312 के तहत नई अखिल भारतीय सेवा कैसे बनाई जा सकती है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

राज्यसभा की विशेष संघीय भूमिका यहाँ महत्वपूर्ण है। उसके दो-तिहाई उपस्थित एवं मतदान बहुमत वाले संकल्प के बाद संसद कानून द्वारा नई अखिल भारतीय सेवा बना सकती है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 317 के तहत कदाचार के आधार पर UPSC/SPSC सदस्य को हटाने की प्रक्रिया क्या है?

अनुच्छेद 317 के तहत कदाचार के आधार पर UPSC/SPSC सदस्य को हटाने की प्रक्रिया क्या है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

कदाचार के मामले में राष्ट्रपति संदर्भ उच्चतम न्यायालय को भेजते हैं। अनुच्छेद 317(1) के तहत न्यायालय जांच करता है; उसके प्रतिवेदन के आधार पर हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 319 के तहत पदमुक्ति के बाद नियुक्तियों पर प्रतिबंधों के बारे में कौन-सा कथन असत्य है?

अनुच्छेद 319 के तहत पदमुक्ति के बाद नियुक्तियों पर प्रतिबंधों के बारे में कौन-सा कथन असत्य है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

UPSC अध्यक्ष पदमुक्त होने के बाद भारत सरकार या राज्य सरकार के अधीन आगे नियोजन के लिए पात्र नहीं होता। इसलिए विकल्प (d) असत्य है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 31C के तहत मूल अधिकारों पर राज्य के नीति निदेशक तत्वों को वरीयता दिए जाने के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से निदेशक तत्व शामिल हैं?

अनुच्छेद 31C के तहत मूल अधिकारों पर राज्य के नीति निदेशक तत्वों को वरीयता दिए जाने के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-से निदेशक तत्व शामिल हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

अनुच्छेद 31C के तहत यदि संसद अनुच्छेद 39(b) (भौतिक संसाधनों का सामूहिक हित में वितरण) और 39(c) (धन के संकेंद्रण की रोकथाम) को लागू करने वाला कानून बनाती है, तो उसे अनुच्छेद 14 और 19 के उल्लंघन के आधार पर चुनौती नहीं दी जा सकती।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 31C के दूसरे प्रावधान को, जिसमें कहा गया था कि 'ऐसी नीति को प्रभावी करने की घोषणा करने वाली किसी भी विधि को किसी न्यायालय में इस आधार पर…

अनुच्छेद 31C के दूसरे प्रावधान को, जिसमें कहा गया था कि 'ऐसी नीति को प्रभावी करने की घोषणा करने वाली किसी भी विधि को किसी न्यायालय में इस आधार पर चुनौती नहीं दी जाएगी कि वह ऐसी नीति को प्रभावी नहीं करती', किस मामले में असंवैधानिक घोषित किया गया था?

उत्तर और पूरी व्याख्या

केशवानंद भारती मामले (1973) में सुप्रीम कोर्ट ने 25वें संशोधन के इस भाग को असंवैधानिक माना क्योंकि यह न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) को समाप्त करता था, जो संविधान का आधारभूत ढांचा है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 32 (उच्चतम न्यायालय) और अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय) के तहत रिट क्षेत्राधिकार के मध्य अंतर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए…

अनुच्छेद 32 (उच्चतम न्यायालय) और अनुच्छेद 226 (उच्च न्यायालय) के तहत रिट क्षेत्राधिकार के मध्य अंतर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. उच्चतम न्यायालय अनुच्छेद 32 के तहत मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए रिट जारी करता है, जबकि उच्च न्यायालय अनुच्छेद 226 के तहत मूल अधिकारों के साथ अन्य विधिक अधिकारों के लिए भी रिट जारी कर सकता है। 2. अनुच्छेद 32 स्वयं एक मौलिक अधिकार है; अनुच्छेद 226 की रिट शक्ति अधिक व्यापक है और उसका प्रयोग न्यायिक विवेक के अधीन होता है। 3. उच्च न्यायालय का रिट क्षेत्राधिकार उसके प्रादेशिक क्षेत्र तथा अनुच्छेद 226(2) के अनुसार वहां पूर्णतः या आंशिक रूप से उत्पन्न कारण-ए-दावा से जुड़ा होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। अनुच्छेद 32 मूल अधिकारों के प्रवर्तन के लिए उच्चतम न्यायालय तक पहुंच की गारंटी देता है। अनुच्छेद 226 के तहत उच्च न्यायालय मूल अधिकारों के अतिरिक्त 'किसी अन्य प्रयोजन' के लिए भी रिट जारी कर सकता है। अनुच्छेद 226(2) कारण-ए-दावा के पूर्णतः या आंशिक रूप से संबंधित क्षेत्र में उत्पन्न होने पर भी क्षेत्राधिकार देता है।