वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 120
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2381–2400 / 4666 प्रश्न
प्रश्न-संग्रह
प्रश्न खोलकर हल करेंअनुच्छेद 137 के तहत Supreme Court की 'पुनर्विलोकन शक्ति' (Power of Review) के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?
अनुच्छेद 137 के तहत Supreme Court की 'पुनर्विलोकन शक्ति' (Power of Review) के संदर्भ में कौन-सा कथन सत्य है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (a) है। अनुच्छेद 137 Supreme Court को अपने judgments और orders की review का संवैधानिक आधार देता है, पर यह असीमित पुनःसुनवाई नहीं है। Supreme Court Rules और न्यायिक सिद्धांत review के संकीर्ण आधार निर्धारित करते हैं—जैसे स्पष्ट त्रुटि, महत्वपूर्ण नए तथ्य या गंभीर न्याय-विफलता। न्यायालय बड़े bench या उपयुक्त मामले में अपने पुराने precedent को overrule भी कर सकता है, लेकिन Article 137 की review और precedent overruling अलग न्यायिक प्रक्रियाएँ हैं।
अनुच्छेद 14 के तहत 'विधि के समक्ष समता' (Equality before Law) और 'विधियों का समान संरक्षण' (Equal Protection of the Laws) के संदर्भ में निम्नलिखि…
अनुच्छेद 14 के तहत 'विधि के समक्ष समता' (Equality before Law) और 'विधियों का समान संरक्षण' (Equal Protection of the Laws) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'विधि के समक्ष समता' की अवधारणा अमेरिकी संविधान से ली गई है, जो एक नकारात्मक अवधारणा है। 2. 'विधियों का समान संरक्षण' की अवधारणा ब्रिटिश संविधान से ली गई है, जो एक सकारात्मक अवधारणा है। 3. अनुच्छेद 14 व्यक्तियों के वर्ग-विधान (Class Legislation) का निषेध करता है, किंतु 'युक्तियुक्त वर्गीकरण' (Reasonable Classification) की अनुमति देता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
कथन 1 और 2 व्युत्क्रमित हैं: 'विधि के समक्ष समता' ब्रिटिश मूल (नकारात्मक) है, जबकि 'विधियों का समान संरक्षण' अमेरिकी मूल (सकारात्मक) है। कथन 3 पूर्णतः सही है।
अनुच्छेद 14 में निहित समता के अधिकार के अपवादों (Exceptions) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत के राष्ट्रपति और राज्यपालों क…
अनुच्छेद 14 में निहित समता के अधिकार के अपवादों (Exceptions) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत के राष्ट्रपति और राज्यपालों को उनके कार्यकाल के दौरान उनके आधिकारिक कृत्यों के लिए किसी न्यायालय में जवाबदेह नहीं ठहराया जा सकता (अनुच्छेद 361)। 2. राष्ट्रपति या राज्यपाल के विरुद्ध उनकी पदावधि के दौरान कोई दांडिक कार्यवाही (Criminal Proceedings) संस्थित नहीं की जा सकती। 3. विदेशी संप्रभु शासकों, राजदूतों और कूटनीतिज्ञों को भारतीय दीवानी और फौजदारी मुकदमों से उन्मुक्ति प्राप्त है। 4. अनुच्छेद 31-C जहां प्रवेश करता है, वहां अनुच्छेद 14 बाहर चला जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कितने सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
चारों कथन सही हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि जहां अनुच्छेद 31-C (अनुच्छेद 39(b) और 39(c) के नीति निदेशक तत्वों को लागू करने वाले कानून) आता है, वहां अनुच्छेद 14 निष्प्रभावी हो जाता है।
अनुच्छेद 141 के अनुसार Supreme Court द्वारा घोषित विधि (Law Declared) का क्या प्रभाव होता है?
अनुच्छेद 141 के अनुसार Supreme Court द्वारा घोषित विधि (Law Declared) का क्या प्रभाव होता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (b) है। अनुच्छेद 141 कहता है कि Supreme Court द्वारा घोषित law भारत के territory में सभी courts पर binding होगा। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर विधि की एकरूपता और precedent की निश्चितता बनाए रखना है। हालांकि judgment का हर वाक्य binding ratio decidendi नहीं होता; binding तत्व वह विधिक सिद्धांत है जो निर्णय के लिए आवश्यक था। Obiter observations persuasive हो सकते हैं, लेकिन Article 141 की बाध्यता को समझते समय ratio और सामान्य टिप्पणी में अंतर उपयोगी है।
अनुच्छेद 142 की संवैधानिक शक्ति पर साधारण कानून की सीमाएँ लागू नहीं होने का सही अर्थ क्या है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
क्यों?
- अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को पूर्ण न्याय हेतु विशेष शक्ति देता है।
अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति के Advisory Jurisdiction के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विधि या तथ्य के ऐसे प्रश्न पर जो सार्वज…
अनुच्छेद 143 के तहत राष्ट्रपति के Advisory Jurisdiction के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विधि या तथ्य के ऐसे प्रश्न पर जो सार्वजनिक महत्व का हो, राष्ट्रपति Supreme Court से राय मांग सकते हैं; ऐसी स्थिति में न्यायालय राय देने से इंकार भी कर सकता है। 2. अनुच्छेद 143(2) के तहत अनुच्छेद 131 के proviso में आने वाले संविधान-पूर्व संधि/समझौते से संबंधित विवाद संदर्भित किए जा सकते हैं, जिन पर Supreme Court राय देता है। 3. Supreme Court की advisory opinion राष्ट्रपति पर बाध्यकारी नहीं होती। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 143(1) में राष्ट्रपति public importance के law/fact question पर राय मांग सकते हैं; Supreme Court ने इस श्रेणी में उत्तर देने से इंकार की गुंजाइश भी स्वीकार की है। अनुच्छेद 143(2) विशेष रूप से अनुच्छेद 131 proviso वाले पूर्व-संवैधानिक treaty/agreement disputes के संदर्भ की अनुमति देता है। Advisory opinion न्यायिक निर्णय की तरह राष्ट्रपति को बाध्य नहीं करती; उसका महत्व अत्यधिक persuasive और संवैधानिक मार्गदर्शक का होता है।
अनुच्छेद 15 के तहत भेदभाव के निषेध के अपवादों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान …
अनुच्छेद 15 के तहत भेदभाव के निषेध के अपवादों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राज्य को महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष प्रावधान करने की छूट है। 2. राज्य सामाजिक और शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े वर्गों (SEBC) या SC/ST के लिए विशेष उपबंध कर सकता है। 3. 103वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2019 द्वारा नागरिकों के आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के लिए अधिकतम 10% आरक्षण का प्रावधान अनुच्छेद 15(6) में जोड़ा गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
तीनों कथन सही हैं। 103वें संशोधन 2019 द्वारा EWS के लिए शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश हेतु अनुच्छेद 15(6) जोड़ा गया।
अनुच्छेद 15(1) राज्य को नागरिकों के विरुद्ध केवल किन आधारों पर भेदभाव करने से रोकता है?
अनुच्छेद 15(1) राज्य को नागरिकों के विरुद्ध केवल किन आधारों पर भेदभाव करने से रोकता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
अनुच्छेद 15(1) के अनुसार, राज्य किसी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान (Religion, Race, Caste, Sex or Place of birth) के आधार पर कोई विभेद नहीं करेगा।
अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समता) के तहत राज्य किन आधारों पर भेदभाव नहीं कर सकता?
अनुच्छेद 16 (सार्वजनिक रोजगार में अवसर की समता) के तहत राज्य किन आधारों पर भेदभाव नहीं कर सकता?
उत्तर और पूरी व्याख्या
अनुच्छेद 16(2) में 7 आधार दिए गए हैं: धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, उद्भव (Descent), जन्मस्थान और निवास (Residence)। अनुच्छेद 15 में 5 आधार हैं (उद्भव व निवास अनुच्छेद 15 में नहीं हैं)।
अनुच्छेद 163(2) के पाठ के अनुसार यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई विषय Governor के discretion में आता है या नहीं, तो कौन-सा कथन सही है?
अनुच्छेद 163(2) के पाठ के अनुसार यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई विषय Governor के discretion में आता है या नहीं, तो कौन-सा कथन सही है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (b) है। Article 163(2) Governor को textually finality देता है कि कोई matter उसके discretion का है या नहीं। लेकिन इसे absolute immunity समझना गलत है। Nabam Rebia और बाद के Supreme Court decisions ने स्पष्ट किया कि Article 163(2) केवल constitutionally permissible discretion के भीतर काम करता है; jurisdiction से बाहर, mala fide या constitutional limits के विरुद्ध exercise judicial review के अधीन हो सकता है। यही bare text और modern constitutional jurisprudence का संतुलित पठन है।
अनुच्छेद 163(3) के अनुसार मंत्रियों द्वारा Governor को दी गई advice के संबंध में न्यायालय की क्या स्थिति है?
अनुच्छेद 163(3) के अनुसार मंत्रियों द्वारा Governor को दी गई advice के संबंध में न्यायालय की क्या स्थिति है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (b) है। Article 163(3) ministerial advice की confidentiality को constitutional protection देता है। Court यह inquiry नहीं कर सकता कि Governor को क्या advice दी गई थी। लेकिन इससे Governor के नाम पर हुई final constitutional action judicial review से बाहर नहीं हो जाती; court उस action की legality, constitutional limits और relevant material की वैधता की समीक्षा कर सकता है, बिना protected advice की सामग्री को सीधे जाँचने के। यह Article 74(2) की Union-level व्यवस्था से समानता रखता है।
अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
अनुच्छेद 164 के अनुसार मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों की नियुक्ति के संबंध में कौन-सा कथन सही है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (b) है। Article 164(1) appointment का मूल संवैधानिक ढाँचा देता है, लेकिन hung assembly में invitation की विस्तृत ranking संविधान में नहीं लिखी है। स्पष्ट बहुमत की स्थिति में Governor को उस नेता को मुख्यमंत्री नियुक्त करना चाहिए जो Assembly का विश्वास रखता हो। अन्य ministers मुख्यमंत्री की advice पर नियुक्त होते हैं। इसलिए Governor की भूमिका parliamentary confidence को पहचानने की है, स्वतंत्र राजनीतिक सरकार चुनने की नहीं।
अनुच्छेद 164(1) के proviso के अनुसार किन राज्यों में Tribal Welfare के लिए एक अलग मंत्री होना संवैधानिक रूप से आवश्यक है?
अनुच्छेद 164(1) के proviso के अनुसार किन राज्यों में Tribal Welfare के लिए एक अलग मंत्री होना संवैधानिक रूप से आवश्यक है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (a) है। 94वें संविधान संशोधन, 2006 के बाद Article 164(1) का proviso Chhattisgarh, Jharkhand, Madhya Pradesh और Odisha में tribal welfare के प्रभारी मंत्री की अनिवार्यता निर्धारित करता है। यह मंत्री Scheduled Castes, backward classes या अन्य कार्य भी संभाल सकता है। Bihar को पुराने प्रावधान से हटाया गया और नए राज्यों की वास्तविक संरचना के अनुरूप सूची बदली गई। यह सामान्य राजनीतिक परंपरा नहीं, संविधान में लिखी विशेष अनिवार्यता है।
अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री के Governor के प्रति संवैधानिक कर्तव्यों में कौन-से शामिल हैं? 1. राज्य प्रशासन और legislative proposals पर Co…
अनुच्छेद 167 के अनुसार मुख्यमंत्री के Governor के प्रति संवैधानिक कर्तव्यों में कौन-से शामिल हैं? 1. राज्य प्रशासन और legislative proposals पर Council of Ministers के निर्णयों की जानकारी देना। 2. Governor द्वारा मांगी गई राज्य प्रशासन/विधायी जानकारी देना। 3. Governor की अपेक्षा पर किसी मंत्री द्वारा तय लेकिन Council द्वारा न विचार किए गए विषय को Council of Ministers के समक्ष रखना। सही उत्तर चुनिए:
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (d) है। Article 167 मुख्यमंत्री को Governor और Council of Ministers के बीच संवैधानिक communication link बनाता है। Governor को सरकार के निर्णयों की जानकारी प्राप्त करने का अधिकार है और CM संबंधित जानकारी उपलब्ध कराता है। यदि किसी individual minister ने ऐसा निर्णय लिया हो जिसे full Council ने नहीं देखा, Governor उसे Council के सामने रखने को कह सकता है। यह व्यवस्था collective responsibility और constitutional head के सूचना-अधिकार दोनों को सुरक्षित करती है।
अनुच्छेद 169 के तहत किसी राज्य में Legislative Council के creation या abolition की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. St…
अनुच्छेद 169 के तहत किसी राज्य में Legislative Council के creation या abolition की प्रक्रिया के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. State Assembly को कुल सदस्य संख्या के बहुमत तथा उपस्थित और मतदान करने वालों के कम-से-कम दो-तिहाई बहुमत से resolution पारित करना होता है। 2. इसके बाद Parliament साधारण बहुमत से कानून बना सकती है। 3. ऐसा Parliamentary law Article 368 के purposes के लिए Constitution Amendment माना जाता है। सही उत्तर चुनिए:
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (a) है। Article 169 दो-चरणीय प्रक्रिया देता है: पहले संबंधित Legislative Assembly विशेष प्रकार के बहुमत से resolution पारित करती है; उसके बाद Parliament ordinary legislative process से Council बनाने या समाप्त करने का कानून बना सकती है। Article 169(3) स्पष्ट कहता है कि ऐसे कानून को Article 368 के प्रयोजन के लिए constitutional amendment नहीं माना जाएगा, भले वह First/other Schedules या incidental provisions में आवश्यक बदलाव करे।
अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का अंत) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान में 'अस्पृश्यता' (Untouchability) शब्द को स्पष्ट रूप से…
अनुच्छेद 17 (अस्पृश्यता का अंत) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान में 'अस्पृश्यता' (Untouchability) शब्द को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। 2. अनुच्छेद 17 एक पूर्ण अधिकार (Absolute Right) है, जिसका कोई अपवाद नहीं है। 3. यह अधिकार केवल राज्य की कार्रवाई के विरुद्ध ही नहीं, बल्कि निजी व्यक्तियों के विरुद्ध भी उपलब्ध है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
कथन 1 गलत है क्योंकि 'अस्पृश्यता' को न तो संविधान में और न ही नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम 1955 में परिभाषित किया गया है। मैसूर उच्च न्यायालय ने कहा कि इसका अर्थ ऐतिहासिक सामाजिक प्रथा से है।
अनुच्छेद 171(1) के अनुसार Legislative Council की कुल सदस्य संख्या की सामान्य संवैधानिक सीमा क्या है?
अनुच्छेद 171(1) के अनुसार Legislative Council की कुल सदस्य संख्या की सामान्य संवैधानिक सीमा क्या है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (a) है। Article 171(1) कहता है कि किसी State Legislative Council की कुल संख्या संबंधित Assembly की कुल सदस्य संख्या के one-third से अधिक नहीं होगी और सामान्यतः 40 से कम नहीं होगी। यह upper chamber को Assembly की तुलना में छोटा रखता है। Parliament कानून द्वारा actual composition निर्धारित करती है, लेकिन वह इस constitutional framework से बँधी रहती है। कुछ ऐतिहासिक/विशेष व्यवस्थाओं को सामान्य नियम से अलग पढ़ना चाहिए।
अनुच्छेद 174 के अनुसार State Legislature के दो sessions के बीच अधिकतम कितना अंतर हो सकता है?
अनुच्छेद 174 के अनुसार State Legislature के दो sessions के बीच अधिकतम कितना अंतर हो सकता है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर (b) है। Article 174 कहता है कि एक session की अंतिम sitting और अगले session की पहली sitting के बीच छह महीने से अधिक अंतर नहीं होना चाहिए। तकनीकी रूप से Constitution 'वर्ष में दो session' की fixed calendar terminology नहीं, बल्कि six-month gap rule देता है; परिणामतः Legislature को पर्याप्त नियमितता से मिलना ही पड़ता है। Governor House या Houses को summon करता है, सामान्यतः Council of Ministers की aid and advice पर।
अनुच्छेद 18 (उपाधियों का अंत) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के अलावा कोई उपा…
अनुच्छेद 18 (उपाधियों का अंत) के प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राज्य सेना या विद्या संबंधी सम्मान के अलावा कोई उपाधि प्रदान नहीं करेगा। 2. कोई भी भारतीय नागरिक किसी विदेशी राज्य से कोई उपाधि स्वीकार नहीं करेगा। 3. बालाजी राघवन मामले (1996) में उच्चतम न्यायालय ने भारत रत्न और पद्म पुरस्कारों को अनुच्छेद 18 के उल्लंघन के आधार पर असंवैधानिक घोषित कर दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
उत्तर और पूरी व्याख्या
कथन 3 गलत है क्योंकि 1996 में सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय पुरस्कारों (भारत रत्न, पद्म विभूषण आदि) की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा, किंतु यह स्पष्ट किया कि इनका प्रयोग नाम के आगे या पीछे उपाधि के रूप में नहीं किया जा सकता।
अनुच्छेद 19(1) के तहत भारतीय नागरिकों को गारंटीकृत छह स्वतंत्रताओं में निम्नलिखित में से कौन-सी शामिल नहीं है?
अनुच्छेद 19(1) के तहत भारतीय नागरिकों को गारंटीकृत छह स्वतंत्रताओं में निम्नलिखित में से कौन-सी शामिल नहीं है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
संपत्ति के अर्जन, धारण और व्ययन की स्वतंत्रता मूलतः अनुच्छेद 19(1)(f) में थी, जिसे 44वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1978 द्वारा समाप्त कर दिया गया।