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अभ्यास से समझ तक

वस्तुनिष्ठ प्रश्न-संग्रह • पृष्ठ 119

एक सवाल हल कीजिए, उसका कारण समझिए, फिर आगे बढ़िए। करंट अफेयर्स, विषयवार अध्ययन और विगत वर्षों के प्रश्न अब एक जगह।

4666 प्रश्न संग्रह में3816 प्रश्न उत्तर और व्याख्या सहित
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सत्र में प्रश्नों की संख्या

2361–2380 / 4666 प्रश्न

प्रश्न-संग्रह

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विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअखिल भारतीय न्यायिक सेवा ( All India Judicial Service - AIJS) के सृजन के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 312 के तहत क्या प्रावधान किए गए हैं? 1. 4…

अखिल भारतीय न्यायिक सेवा ( All India Judicial Service - AIJS) के सृजन के संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 312 के तहत क्या प्रावधान किए गए हैं? 1. 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा अनुच्छेद 312 में संशोधन कर AIJS के गठन का प्रावधान किया गया। 2. राज्य सभा द्वारा उपस्थित और मत देने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से संकल्प पारित करने के बाद संसद विधि द्वारा AIJS का सृजन कर सकती है। 3. AIJS में जिला न्यायाधीश (District Judge) के पद से नीचे का कोई पद शामिल नहीं होगा। 4. AIJS का गठन होने पर अनुच्छेद 233 और 234 के तहत राज्यों और उच्च न्यायालयों की शक्तियां अप्रभावी हो जाएंगी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

केवल कथन 1, 2 और 3 सही हैं। 42वें संशोधन ने अनुच्छेद 312 में AIJS का स्पष्ट प्रावधान जोड़ा; राज्यसभा के दो-तिहाई उपस्थित एवं मतदान बहुमत वाले संकल्प के बाद संसद कानून बना सकती है और AIJS में district judge से नीचे का पद शामिल नहीं हो सकता। लेकिन AIJS बनते ही अनुच्छेद 233–234 की शक्तियाँ स्वतः निष्प्रभावी नहीं होतीं; अनुच्छेद 312(4) आवश्यक consequential amendments की अनुमति देता है। 2026 तक AIJS गठित नहीं हुई है और हितधारकों में सहमति नहीं है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअखिल भारतीय सेवा अधिकारियों के अनुशासनिक नियंत्रण के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. राज्य सरकार सेवा-संदर्भ के अनुसार अधिकारी को निलंबित कर सकती…

अखिल भारतीय सेवा अधिकारियों के अनुशासनिक नियंत्रण के बारे में कौन-से कथन सही हैं? 1. राज्य सरकार सेवा-संदर्भ के अनुसार अधिकारी को निलंबित कर सकती है और अनुशासनिक कार्यवाही शुरू कर सकती है। 2. dismissal, removal या compulsory retirement जैसी निर्दिष्ट बड़ी सजाएँ केवल केंद्र सरकार के आदेश से लगाई जा सकती हैं। 3. संबंधित नियमों के तहत केंद्र और राज्य दोनों की भूमिका हो सकती है।

उत्तर और पूरी व्याख्या

All India Services (Discipline and Appeal) Rules, 1969 केंद्र और राज्य दोनों को भूमिका देते हैं। राज्य निलंबन/कार्यवाही कर सकता है, लेकिन dismissal, removal और compulsory retirement जैसी सजाएँ केवल केंद्र सरकार लगा सकती है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 312 के तहत राज्यसभा यदि उपस्थित और मतदान करने …

अखिल भारतीय सेवाओं (All India Services) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 312 के तहत राज्यसभा यदि उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से प्रस्ताव पारित करे, तो संसद नई अखिल भारतीय सेवा का गठन कर सकती है। 2. अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की भर्ती और प्रशिक्षण केंद्र द्वारा किया जाता है, किंतु वे केंद्र और राज्य दोनों के अधीन कार्य करते हैं। 3. इन अधिकारियों पर अंतिम नियंत्रण (Ultimate Control) राज्य सरकार का होता है, जबकि तात्कालिक नियंत्रण केंद्र सरकार का होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (a) है। कथन 1 और 2 सही हैं। अनुच्छेद 312 राज्यसभा को राष्ट्रीय हित में नई अखिल भारतीय सेवा के निर्माण का विशेष द्वार देता है, जिसके बाद संसद कानून बनाती है। इन सेवाओं के अधिकारी केंद्र द्वारा भर्ती किए जाते हैं लेकिन राज्य कैडर में भी सेवा देते हैं। कथन 3 उल्टा है: तत्काल प्रशासनिक नियंत्रण सामान्यतः राज्य सरकार के पास रहता है, जबकि सेवा-संबंधी अंतिम नियंत्रण और अखिल भारतीय ढांचा केंद्र के पास अधिक प्रभावी रहता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअतीयाबारी टी कंपनी बनाम असम राज्य (1961) मामले में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 301 के तहत व्यापार की स्वतंत्रता के संबंध में क्या व्यवस्था दी थी?

अतीयाबारी टी कंपनी बनाम असम राज्य (1961) मामले में उच्चतम न्यायालय ने अनुच्छेद 301 के तहत व्यापार की स्वतंत्रता के संबंध में क्या व्यवस्था दी थी?

उत्तर और पूरी व्याख्या

अतीयाबारी मामले (1961) में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि कर भी व्यापार की स्वतंत्रता को बाधित कर सकते हैं यदि वे माल के संचलन पर सीधा अवरोध पैदा करते हैं और अनुच्छेद 304 के तहत राष्ट्रपति की मंजूरी के बिना लगाए गए हों।

UPSC विगत वर्ष • राजव्यवस्था और शासन • 2017अधिकारों के बारे में कौन-सा कथन सही है?
अधिकारों के बारे में कौन-सा कथन सही है?
उत्तर और पूरी व्याख्या
सही उत्तर(c) अधिकार नागरिकों के राज्य के विरुद्ध वैध दावे हैं

क्यों?

  • लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकार व्यक्ति के संरक्षित दावे और स्वतंत्रताएँ हैं।
विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअधीनस्थ न्यायालयों के संगठनात्मक ढांचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जिला न्यायाधीश ( District Judge) जिले का सर्वोच्च न्यायि…

अधीनस्थ न्यायालयों के संगठनात्मक ढांचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जिला न्यायाधीश ( District Judge) जिले का सर्वोच्च न्यायिक अधिकारी होता है जिसके पास दीवानी और फौजदारी दोनों मामलों में मूल और अपीलीय क्षेत्राधिकार होता है। 2. जब वह दीवानी मामलों की सुनवाई करता है तो उसे जिला न्यायाधीश कहा जाता है, और जब वह आपराधिक मामलों की सुनवाई करता है तो उसे सत्र न्यायाधीश ( Sessions Judge) कहा जाता है। 3. सत्र न्यायाधीश को किसी अपराधी को मृत्युदंड (Capital punishment) देने की शक्ति प्राप्त है, किंतु ऐसा मृत्युदंड संबंधित उच्च न्यायालय द्वारा संपुष्ट (Confirmed) किए जाने के बाद ही दिया जा सकता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

तीनों कथन सही हैं। जिला व सत्र न्यायाधीश जिले का शीर्ष न्यायिक पद है। उसके द्वारा दिए गए मृत्युदंड को उच्च न्यायालय द्वारा संपुष्ट किया जाना अनिवार्य होता है ( CrPC BNSS / के तहत)।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअध्यक्षीय प्रणाली (Presidential System) की विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

अध्यक्षीय प्रणाली (Presidential System) की विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन असत्य है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। अध्यक्षीय प्रणाली में राष्ट्रपति वास्तविक कार्यपालिका होता है और उसका कार्यकाल सामान्यतः निश्चित होता है। राष्ट्रपति तथा उसके सचिव/मंत्री विधायिका के सदस्य नहीं होते और सामूहिक रूप से विधायिका के प्रति उत्तरदायी भी नहीं होते। इसी कारण कार्यपालिका और विधायिका का पृथक्करण संसदीय प्रणाली की तुलना में अधिक स्पष्ट होता है। विकल्प (c) भी अध्यक्षीय मॉडल की सामान्य विशेषता है—राष्ट्रपति विधायिका को अपनी इच्छा से भंग नहीं करता।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअध्यादेश जारी करने के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

अध्यादेश जारी करने के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

b अनुच्छेद 123(2) के अनुसार राष्ट्रपति किसी भी समय अध्यादेश को वापस ले सकते हैं। अध्यादेश संसद के कानून की तरह भूतलक्षी Retrospective effect प्रभाव से भी लागू हो सकता है, किंतु यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकता।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअध्यादेशों के बार-बार पुनः प्रख्यापन ( Re-promulgation of Ordinances) के संदर्भ में डी. सी. वाधवा बनाम बिहार राज्य (1987) मामले में उच्चतम न्याया…

अध्यादेशों के बार-बार पुनः प्रख्यापन ( Re-promulgation of Ordinances) के संदर्भ में डी. सी. वाधवा बनाम बिहार राज्य (1987) मामले में उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने क्या व्यवस्था दी?

उत्तर और पूरी व्याख्या

डी. सी. वाधवा मामले (1987) में सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि बिहार सरकार ने 1967 से 1981 के बीच विधानमंडल को दरकिनार कर सैकड़ों अध्यादेशों को बार-बार प्रख्यापित किया। न्यायालय ने इसे कार्यपालिका द्वारा विधायिका की शक्ति हड़पने का असंवैधानिक कृत्य और संविधान के साथ धोखा माना।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 102 और दसवीं अनुसूची के तहत सांसदों की अयोग्यता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 102(1) वाली सामान्य अयोग्यताओ…

अनुच्छेद 102 और दसवीं अनुसूची के तहत सांसदों की अयोग्यता के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अनुच्छेद 102(1) वाली सामान्य अयोग्यताओं के प्रश्न पर राष्ट्रपति निर्वाचन आयोग की राय प्राप्त करके निर्णय करते हैं। 2. दसवीं अनुसूची के तहत दलबदल की अयोग्यता का निर्णय लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा सभापति करते हैं। 3. Kihoto Hollohan मामले में उच्चतम न्यायालय ने माना कि दलबदल पर पीठासीन अधिकारी का निर्णय न्यायिक समीक्षा के अधीन है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 103 के तहत अनुच्छेद 102(1) से जुड़ी अयोग्यता पर राष्ट्रपति निर्णय करते हैं और निर्वाचन आयोग की राय के अनुसार कार्य करते हैं। दलबदल अलग व्यवस्था है—दसवीं अनुसूची में संबंधित सदन का पीठासीन अधिकारी निर्णय करता है। Kihoto Hollohan v. Zachillhu (1992) ने यह स्पष्ट किया कि पीठासीन अधिकारी का निर्णय अंतिम राजनीतिक शब्द नहीं है; वह न्यायिक समीक्षा के दायरे में आ सकता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 110 के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा विषय अपने-आप किसी विधेयक को 'धन विधेयक' (Money Bill) नहीं बनाता?

अनुच्छेद 110 के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-सा विषय अपने-आप किसी विधेयक को 'धन विधेयक' (Money Bill) नहीं बनाता?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 110(1) Money Bill के विषयों की बंद सूची देता है—कर, उधारी, Consolidated Fund/Contingency Fund आदि। लेकिन अनुच्छेद 110(2) स्पष्ट करता है कि केवल जुर्माना, दंड, licence fee, service fee या स्थानीय निकाय द्वारा स्थानीय प्रयोजन के लिए कर लगाने के कारण कोई विधेयक Money Bill नहीं बन जाता। यही प्रश्न का मुख्य जाल है। अंतिम प्रमाणीकरण लोकसभा अध्यक्ष करते हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 114 के तहत 'विनियोग विधेयक' (Appropriation Bill) का मुख्य महत्व क्या है?

अनुच्छेद 114 के तहत 'विनियोग विधेयक' (Appropriation Bill) का मुख्य महत्व क्या है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। लोकसभा द्वारा अनुदान मांगें स्वीकृत होने और charged expenditure शामिल किए जाने के बाद सरकार को Consolidated Fund of India से विधिसम्मत निकासी के लिए Appropriation Bill लाना पड़ता है। अनुच्छेद 114(3) स्पष्ट करता है कि विनियोग कानून के बिना संचित निधि से धन नहीं निकाला जा सकता। कर लगाने का विधायी आधार Finance Bill/कर कानूनों से जुड़ा है; Appropriation Bill का उद्देश्य व्यय के लिए संसदीय प्राधिकार देना है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 124(7) Supreme Court के सेवानिवृत्त न्यायाधीश पर कौन-सा प्रतिबंध लगाता है?

अनुच्छेद 124(7) Supreme Court के सेवानिवृत्त न्यायाधीश पर कौन-सा प्रतिबंध लगाता है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (a) है। अनुच्छेद 124(7) कहता है कि जो व्यक्ति Supreme Court का Judge रह चुका है, वह भारत के क्षेत्र के भीतर किसी court या authority के समक्ष plead या act नहीं करेगा। यह post-retirement advocacy पर व्यापक रोक है। लेकिन संविधान यह नहीं कहता कि retired Judge किसी आयोग, tribunal, inquiry body या अन्य सार्वजनिक दायित्व पर कभी नियुक्त नहीं हो सकता; ऐसी नियुक्तियाँ अलग कानून/नीति के अधीन संभव रही हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 127 के तहत 'तदर्थ न्यायाधीश' (Ad-hoc Judge) की नियुक्ति के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?

अनुच्छेद 127 के तहत 'तदर्थ न्यायाधीश' (Ad-hoc Judge) की नियुक्ति के संदर्भ में कौन-सा कथन सही है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। अनुच्छेद 127 एक असाधारण व्यवस्था है जिसका उपयोग तब किया जा सकता है जब Supreme Court की किसी बैठक के लिए आवश्यक quorum उपलब्ध न हो। CJI राष्ट्रपति की पूर्व सहमति और संबंधित High Court के Chief Justice से consultation के बाद ऐसे उच्च न्यायालय न्यायाधीश को बुला सकते हैं जो Supreme Court Judge बनने की योग्यता रखता हो। यह स्थायी नियुक्ति नहीं है और न ही राष्ट्रपति या संसद मनमाने ढंग से किसी व्यक्ति को ad-hoc judge बना सकते हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 129 के अनुसार 'Court of Record' के रूप में Supreme Court की विशेषताओं में निम्नलिखित में से कौन-सी शामिल हैं? 1. उसके अभिलेख और न्यायिक …

अनुच्छेद 129 के अनुसार 'Court of Record' के रूप में Supreme Court की विशेषताओं में निम्नलिखित में से कौन-सी शामिल हैं? 1. उसके अभिलेख और न्यायिक कार्यवाही स्थायी प्रामाणिक रिकॉर्ड होते हैं। 2. उसे अपनी अवमानना के लिए दंड देने की शक्ति है। 3. Contempt of Courts Act, 1971 में अवमानना को Civil और Criminal Contempt में वर्गीकृत किया गया है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। Court of Record होने का अर्थ है कि Supreme Court के records और judicial acts प्रामाणिक अभिलेख माने जाते हैं तथा न्यायिक precedent के रूप में महत्व रखते हैं। अनुच्छेद 129 उसे contempt of itself दंडित करने की अंतर्निहित संवैधानिक शक्ति भी देता है। Contempt of Courts Act, 1971 civil contempt—जैसे जानबूझकर आदेश की अवज्ञा—और criminal contempt—जैसे न्याय प्रशासन में बाधा या न्यायालय को scandalise करने वाले प्रकाशन—के बीच अंतर करता है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 13 के तहत 'विधि' (Law) की परिभाषा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा पारित स्थायी कानून।…

अनुच्छेद 13 के तहत 'विधि' (Law) की परिभाषा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संसद या राज्य विधानमंडलों द्वारा पारित स्थायी कानून। 2. राष्ट्रपति या राज्यपालों द्वारा जारी अध्यादेश (Ordinances)। 3. प्रत्यायोजित विधान के तहत आदेश, उप-विधि, नियम, विनियम या अधिसूचना। 4. विधि का प्रभाव रखने वाली रूढ़ि या प्रथा (Custom or Usage)। उपर्युक्त में से कौन-से अनुच्छेद 13 के अंतर्गत 'विधि' के रूप में शामिल हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

अनुच्छेद 13 में विधि को अत्यंत व्यापक रूप से परिभाषित किया गया है, जिसमें स्थायी कानून, अस्थायी अध्यादेश, कार्यपालक आदेश/अधिसूचनाएं तथा कानूनी प्रभाव रखने वाली प्रथाएं सभी शामिल हैं।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 130 के अनुसार उच्चतम न्यायालय का स्थान (Seat) कहाँ होगा?

अनुच्छेद 130 के अनुसार उच्चतम न्यायालय का स्थान (Seat) कहाँ होगा?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। अनुच्छेद 130 दिल्ली को Supreme Court की सामान्य seat बनाता है, लेकिन साथ ही CJI को राष्ट्रपति की approval से अन्य स्थान या स्थानों पर बैठने की व्यवस्था निर्धारित करने की शक्ति देता है। इसलिए दिल्ली संवैधानिक रूप से अकेला अपरिवर्तनीय स्थान नहीं है। हालाँकि क्षेत्रीय पीठों की स्थापना पर लंबे समय से बहस होती रही है, संविधान उन्हें अनिवार्य नहीं बनाता।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 131 के संघीय मूल क्षेत्राधिकार की सीमाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान-पूर्व संधि, समझौते या सनद से उत्पन्न …

अनुच्छेद 131 के संघीय मूल क्षेत्राधिकार की सीमाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. संविधान-पूर्व संधि, समझौते या सनद से उत्पन्न ऐसा विवाद जिसे संवैधानिक प्रावधान क्षेत्राधिकार से बाहर रखता है, अनुच्छेद 131 में नहीं आएगा। 2. वित्त आयोग के कार्यक्षेत्र से जुड़े वितरण-संबंधी विषय स्वतः अनुच्छेद 131 के न्यायिक विवाद नहीं बनते। 3. केंद्र और राज्य के बीच केवल साधारण वाणिज्यिक/संविदात्मक विवाद, जिसमें राज्य अपने संप्रभु संवैधानिक अधिकार के बजाय सामान्य व्यापारिक पक्ष की तरह हो, अनुच्छेद 131 की exclusive jurisdiction में आवश्यकतः नहीं आता। उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 131 का केंद्र बिंदु केवल पक्षकारों की पहचान नहीं, बल्कि ऐसा विवाद है जिसमें सरकारों के बीच किसी legal right का अस्तित्व या सीमा प्रश्न में हो। संविधान-पूर्व संधियों के लिए proviso अपवाद बनाता है। Finance Commission जैसी संवैधानिक वित्तीय व्यवस्था के प्रश्न अपने-आप inter-governmental legal dispute नहीं बनते। इसी तरह साधारण contractual या commercial claim को केवल इसलिए अनुच्छेद 131 में नहीं खींचा जाता कि पक्षकार सरकारें हैं; विवाद का संघीय-कानूनी चरित्र आवश्यक है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 133 के तहत दीवानी मामलों में Supreme Court में अपील का संवैधानिक आधार क्या है?

अनुच्छेद 133 के तहत दीवानी मामलों में Supreme Court में अपील का संवैधानिक आधार क्या है?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (b) है। 30वें संविधान संशोधन, 1972 ने दीवानी अपील के पुराने monetary-value test को हटाकर substantial question of law of general importance और Supreme Court द्वारा उसके निर्णय की आवश्यकता पर आधारित certificate व्यवस्था अपनाई। इसलिए केवल मुकदमे की धनराशि बड़ी होना पर्याप्त नहीं है। Article 133 ordinary civil appeal को filtered constitutional route देता है; Article 136 का discretionary special leave इससे अलग अतिरिक्त शक्ति है।

विषयवार प्रश्न-सेट • राजव्यवस्था और शासनअनुच्छेद 136 के तहत Special Leave Petition (SLP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. Supreme Court भारत के क्षेत्र में किसी न्यायाल…

अनुच्छेद 136 के तहत Special Leave Petition (SLP) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. Supreme Court भारत के क्षेत्र में किसी न्यायालय या अधिकरण के निर्णय, डिक्री, आदेश, दंडादेश आदि के विरुद्ध विशेष अनुमति दे सकता है। 2. यह विवेकाधीन असाधारण शक्ति है; पक्षकार इसे सामान्य अपील के अधिकार की तरह दावा नहीं कर सकता। 3. अनुच्छेद 136(2) सशस्त्र बलों से संबंधित कानून के तहत गठित न्यायालय या अधिकरण के निर्णयों को इस संवैधानिक SLP शक्ति से बाहर रखता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

उत्तर और पूरी व्याख्या

सही उत्तर (d) है। अनुच्छेद 136 Supreme Court को अत्यंत व्यापक लेकिन discretionary appellate gateway देता है। यह नियमित statutory appeal नहीं, बल्कि exceptional leave है। न्यायालय हर त्रुटि सुधारने के लिए Article 136 नहीं खोलता; गंभीर अन्याय, महत्वपूर्ण विधिक प्रश्न या असाधारण परिस्थिति प्रमुख आधार हो सकते हैं। अनुच्छेद 136(2) armed forces law के अधीन courts/tribunals के मामलों को इस शक्ति से बाहर करता है, यद्यपि अन्य विशेष कानून अलग appellate mechanism दे सकते हैं।