2026 · Q4(a)
प्रश्न
लंबे समय तक दवा लेने के गंभीर दुष्प्रभावों का हवाला देते हुए, एक डॉक्टर एक महिला मरीज के परिवार को सर्जरी के लिए मना लेता है। इससे मरीज को अनिच्छा से सर्जरी के लिए सहमति देनी पड़ी, जबकि उसकी मूल पसंद दवा का विकल्प चुनना था। डॉक्टर के इस कार्य का विश्लेषण करते हुए 'पितृसत्तात्मकता' ( Paternalism) और 'परोपकार/हितकारिता' (Beneficence) की अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए।
प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण
यह प्रश्न अनुप्रयुक्त नीतिशास्त्र (Applied Ethics -
Bioethics/Medical Ethics) के चार मूल स्तंभों (Beauchamp and Childress Principles: Autonomy, Beneficence,
Non-maleficence, Justice) के आपसी द्वंद्व पर आधारित है। यहाँ डॉक्टर मरीज की भलाई (Beneficence) चाहता है, लेकिन इसके लिए
वह मरीज की स्वतंत्र इच्छा (Autonomy) को दरकिनार कर परिवार के दबाव का सहारा लेता है, जो 'चिकित्सीय पितृसत्तात्मकता' (Medical
Paternalism) का उदाहरण है।
मॉडल उत्तर
भूमिका: चिकित्सा नीतिशास्त्र में यह प्रकरण रोगी की स्वायत्तता (Patient Autonomy) और चिकित्सक के हितकारी कर्तव्य (Beneficence) के बीच के प्रमुख नैतिक द्वंद्व को उजागर करता है।
मुख्य भाग:
परोपकार/हितकारिता ( Beneficence) की अवधारणा: इसका अर्थ है रोगी के सर्वोत्तम हित (Best Interest) में कार्य करना और उसे
संभावित नुकसान (Non-maleficence) से बचाना। डॉक्टर ने अपने विशेषज्ञ ज्ञान के आधार पर देखा कि लंबी दवाओं से अंगों को गंभीर
नुकसान हो सकता है और सर्जरी ही स्थायी इलाज है; अतः उसकी मंशा (Intention) परोपकार की थी।
पितृसत्तात्मकता ( Paternalism) की अवधारणा: जब कोई प्राधिकारी या विशेषज्ञ (जैसे डॉक्टर या प्रशासक) किसी व्यक्ति की भलाई के नाम पर उसकी स्वतंत्र इच्छा और निर्णय लेने की स्वायत्तता (Individual Autonomy) को दबा देता है, तो उसे पितृसत्तात्मकता कहते हैं।
डॉक्टर के कृत्य का नैतिक विश्लेषण:
स्वायत्तता एवं सूचित सहमति ( Informed Consent) का हनन: एक वयस्क और मानसिक रूप से सक्षम महिला मरीज को अपने शरीर
के बारे में निर्णय लेने का प्राथमिक अधिकार है।
पारिवारिक दबाव का उपयोग: मरीज को सीधे समझाने (Persuasion) के बजाय परिवार के माध्यम से दबाव बनाना उसकी सहमति को
'अनिच्छुक या बाध्यकारी सहमति' (Coerced Consent) बना देता है, जो इमैनुएल कांट के 'मनुष्य को साध्य मानने' के सिद्धांत के
प्रतिकूल है।
निष्कर्ष: यद्यपि डॉक्टर का साध्य (परोपकार) उत्तम था, किंतु उसका साधन (कठोर पितृसत्तात्मकता) नैतिक रूप से त्रुटिपूर्ण था। आदर्श चिकित्सा
नैतिकता में डॉक्टर को परिवार के दबाव के बजाय 'सहानुभूतिपूर्ण संवाद और परामर्श' ( Empathetic Counselling) द्वारा मरीज की स्वैच्छिक
सूचित सहमति प्राप्त करनी चाहिए।