2026 · Q3(c)
प्रश्न
शेक्सपियर ने ‘हेनरी चतुर्थ’ (Henry IV) में कहा है, “हथियार तभी न्यायसंगत होते हैं जब उन्हें धारण करने का उद्देश्य न्यायपूर्ण हो।” शासन व्यवस्था (Governance) में इसके क्या नैतिक निहितार्थ हैं?
प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण
यह प्रश्न मानवीय कृत्य में कर्ता की मंशा (Intention as a
Determinant of Ethics), 'न्यायपूर्ण युद्ध सिद्धांत' (Just War Theory) और राज्य की दंडात्मक शक्ति (Coercive Power of
State) के नैतिक औचित्य पर आधारित है। शासन के पास पुलिस, सेना, कानून और कराधान जैसी बाध्यकारी शक्तियाँ ('हथियार') होती हैं; वे
शक्तियाँ तभी नैतिक वैधता (Moral Legitimacy) पाती हैं जब उनका उपयोग प्रतिशोध या स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि लोक-कल्याण और न्याय
के लिए हो।
मॉडल उत्तर
भूमिका: शेक्सपियर का यह कथन नीतिशास्त्र के इस मूल सिद्धांत को दर्शाता है कि 'शक्ति या बल' ( Power/Force) स्वतः नैतिक या
अनैतिक नहीं होता, बल्कि उसका नैतिक मूल्य उसके पीछे निहित 'उद्देश्य और मंशा' (Intention & Purpose) से निर्धारित होता है। भारतीय
दर्शन में भी इसे 'धर्मयुद्ध' और कौटिल्य के 'दंडनीति' सिद्धांत से जोड़ा गया है।
मुख्य भाग: शासन में इसके नैतिक निहितार्थ ( Ethical Implications in Governance):
राज्य की बाध्यकारी शक्ति की वैधता (Legitimacy of State Coercion): मैक्स वेबर के अनुसार राज्य के पास वैध हिंसा/बल का
एकाधिकार है। पुलिस कार्रवाई, कराधान या भूमि अधिग्रहण जैसे कठोर कदम तभी नैतिक हैं जब उनका इरादा सार्वजनिक हित ( Public
Interest) और कमजोरों की रक्षा हो।
दुरुपयोग और प्रतिशोध पर अंकुश ( Check on Vendetta): यदि प्रशासनिक शक्तियों (जैसे—जांच एजेंसियों, बुलडोजर कार्रवाई या
निवारक निरोध कानूनों) का प्रयोग राजनीतिक द्वेष या व्यक्तिगत अहंकार के लिए किया जाए, तो कानूनी होने के बावजूद वह अनैतिक (Unjust) बन जाता है।
साधन की मर्यादा एवं अनुपातिकता ( Proportionality & Restraint): नेक इरादा होने पर भी शासन को असीमित बल-प्रयोग की छूट
नहीं मिल जाती; गांधीजी के साधन-साध्य सिद्धांत के अनुसार, न्यायपूर्ण उद्देश्य की प्राप्ति भी संवैधानिक मर्यादा और न्यूनतम आवश्यक बल के
माध्यम से ही होनी चाहिए (जैसे—फर्जी मुठभेड़/ Extra-judicial killings न्याय का विकल्प नहीं हो सकतीं)।
निष्कर्ष: संक्षेप में, प्रशासन के हाथों में कानून और दंड रूपी 'हथियार' नागरिकों के भयादोहन के लिए नहीं, बल्कि संवैधानिक न्याय और लोक-
कल्याण (सर्वजन हिताय) की रक्षा के लिए सौंपे गए न्यास ( Trust) हैं।