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UPSC CSE Mains · GS Paper 4

2025 · Q3(c)

10 अंक150 शब्दअध्याय 1

प्रश्न

वर्तमान संदर्भ में निम्नलिखित उद्धरण आपके लिए क्या अर्थ रखता है? "किसी समाज की शक्ति उसके प्रशंसनीय आदर्शों (या कानूनों) में नहीं, बल्कि उसके लोगों की नैतिकता ( Morality of its people) में निहित होती है।" — स्वामी विवेकानंद।

प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण

स्वामी विवेकानंद का यह विचार कानून/संविधान की सीमाओं और
नागरिकों के आंतरिक चरित्र ( Internal Character) के महत्व को रेखांकित करता है। कोई भी राष्ट्र हज़ारों कानून या ऊँ चे आदर्श लिखकर महान
नहीं बनता; यदि नागरिकों और प्रशासकों के आचरण में ईमानदारी नहीं है, तो सर्वोत्तम कानून भी विफल हो जाते हैं।

मॉडल उत्तर

भूमिका: स्वामी विवेकानंद का यह कालजयी कथन स्पष्ट करता है कि किसी राष्ट्र या समाज की वास्तविक मजबूती उसके संविधान की पुस्तकों में
दर्ज 'उच्च आदर्शों' या 'कठोर कानूनों' से नहीं, बल्कि उसके सामान्य नागरिकों के दैनिक आचरण की सत्यनिष्ठा और चरित्र बल ( Character
Strength) से तय होती है।
मुख्य भाग: वर्तमान संदर्भ में कथन की प्रासंगिकता:

कानूनी प्रावधान बनाम सामाजिक व्यवहार का अंतराल: भारत में दहेज निषेध अधिनियम (1961), अस्पृश्यता उन्मूलन (अनुच्छेद 17)
और पीसीपीएनडीटी ( PCPNDT) जैसे श्रेष्ठ कानून मौजूद हैं, किंतु जन-नैतिकता के अभाव में दहेज, कन्या भ्रूण हत्या और जातिगत भेदभाव
आज भी समाज को कमजोर कर रहे हैं।
बाह्य भय बनाम आंतरिक स्व-अनुशासन: कानून केवल डर के माध्यम से बाह्य अनुपालन ( External Compliance) करा सकता है—
जैसे पुलिस या कै मरे को देखकर ट्रैफिक नियम मानना या कर ( Tax) चुकाना। इसके विपरीत, नैतिक नागरिक बिना किसी निगरानी के भी
सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा और पर्यावरण संरक्षण को अपना कर्तव्य मानता है (जैसे—स्वच्छ भारत अभियान या इंदौर का नागरिक मॉडल)।
भ्रष्टाचार और प्रशासनिक शुचिता: यदि समाज में धन और सत्ता की पूजा होती है, तो कठोरतम भ्रष्टाचार-रोधी कानून भी रिश्वतखोरी नहीं
रोक सकते। जैसा कि प्लेटो ने कहा था, "अच्छे लोगों को जिम्मेदार रहने के लिए कानूनों की आवश्यकता नहीं होती, और बुरे लोग कानून से
बचने का रास्ता खोज ही लेते हैं।"

निष्कर्ष: अतः एक सशक्त और विकसित भारत के निर्माण हेतु विधिक सुधारों के साथ-साथ परिवार, शिक्षा और समाज के माध्यम से 'व्यक्ति के
Man-making Education) पर निवेश करना सर्वाधिक आवश्यक है।
चरित्र निर्माण' (

UPSC CSE 2024 · Q1(b) · 10 अंक · 150 शब्द]

मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।