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UPSC CSE Mains · GS Paper 4

2025 · Q1(b)

10 अंक150 शब्दअध्याय 1

प्रश्न

"संवैधानिक नैतिकता कोई स्वाभाविक भावना नहीं है, बल्कि यह नागरिक शिक्षा ( Civil Education) और विधि के शासन के प्रति निष्ठा की परिपक्वता का उत्पाद है।" लोक प्रशासन में संवैधानिक नैतिकता को बनाए रखने, सुशासन को बढ़ावा देने और जवाबदेही सुनिश्चित करने में सिविल सेवकों की भूमिका के आलोक में इस कथन का परीक्षण कीजिए।

प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण

4 नवंबर 1948 को संविधान सभा में डॉ. बी.आर. आंबेडकर ने कहा
Constitutional morality is not a natural sentiment. It has to be cultivated. We must realize that our
था: "
people have yet to learn it." क्योंकि भारतीय समाज परंपरागत रूप से जाति, धर्म और सामंती पदानुक्रम में बँटा रहा है, इसलिए
लोकतांत्रिक समता और कानून के शासन का मूल्य जन्मजात नहीं होता, बल्कि उसे शिक्षा और संस्थागत अभ्यास से सीखा जाता है।

मॉडल उत्तर

भूमिका: डॉ. बी.आर. आंबेडकर से प्रेरित यह कथन स्पष्ट करता है कि मनुष्य में अपने परिवार, जाति या समुदाय के प्रति लगाव तो प्राकृतिक
(Natural Sentiment) होता है, किंतु संविधान के अमूर्त मूल्यों—समता, स्वतंत्रता, पंथनिरपेक्षता और विधि के शासन—के प्रति निष्ठा एक
अर्जित नागरिक चेतना ( Cultivated Civic Virtue) है।
मुख्य भाग:

संवैधानिक नैतिकता स्वाभाविक क्यों नहीं है? पारंपरिक सामाजिक समाजीकरण अक्सर पितृसत्ता, जातिवाद और पक्षपात को सामान्य मान
लेता है। इसके विपरीत, संवैधानिक नैतिकता व्यक्ति से अपेक्षा करती है कि वह अपनी व्यक्तिगत आस्थाओं से ऊपर उठकर संवैधानिक विधियों
और संस्थागत प्रक्रियाओं का सम्मान करे।
सुशासन एवं जवाबदेही में सिविल सेवकों की भूमिका:
सामाजिक पूर्वाग्रहों पर संविधान की सर्वोच्चता: एक लोक सेवक खाप पंचायतों के फै सलों, भीड़ की हिंसा ( Mob Lynching) या
जातिगत भेदभाव के विरुद्ध संवैधानिक अधिकारों (अनुच्छेद 14, 15, 21) की ढाल बनता है।
सुशासन (Good Governance) का संवर्धन: जब प्रशासक भाई-भतीजावाद और राजनीतिक दबाव को नकारते हुए 'वस्तुनिष्ठता'
(Objectivity) और 'समानुभूति' से कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति (अंत्योदय) तक पहुँचाता है, तब सुशासन साकार
होता है।
Accountability) सुनिश्चित करना: विवेकाधिकार (Discretionary Power) का मनमाना प्रयोग न करके सूचना का
जवाबदेही (
अधिकार (RTI), नागरिक चार्टर और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करता है।

निष्कर्ष: इस प्रकार, लोक सेवक केवल कानून के क्रियान्वयनकर्ता नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं अपने आचरण से समाज में संवैधानिक नैतिकता की
'नागरिक शिक्षा' प्रसारित करने वाले नैतिक संरक्षक ( Moral Custodians) हैं।
UPSC CSE 2025 · Q3(c) · 10 अंक · 150 शब्द]

मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।