2024 · Q4(a)
प्रश्न
“न्यायपूर्ण और अन्यायपूर्ण (Just and Unjust) की अवधारणा संदर्भ-आधारित है। जो एक वर्ष पहले न्यायपूर्ण था, वह आज के संदर्भ में अन्यायपूर्ण हो सकता है। न्याय-हत्या (Miscarriage of Justice) को रोकने के लिए बदलते संदर्भ की निरंतर समीक्षा आवश्यक है।” उपयुक्त उदाहरणों सहित इस कथन का परीक्षण कीजिए।
मॉडल उत्तर
भूमिका: न्याय कोई जड़ या स्थिर ( Static) अवधारणा नहीं है, बल्कि यह समय, स्थान और सामाजिक-तकनीकी विकास के साथ गतिशील
(Dynamic & Contextual) रहती है। यदि कानून और नैतिक मानक बदलते संदर्भ के साथ स्वयं को अद्यतन न करें, तो पुराना न्याय ही वर्तमान
का अन्याय बन जाता है।
मुख्य भाग: समुचित उदाहरणों द्वारा कथन का परीक्षण:
विधिक एवं संवैधानिक संदर्भ में बदलाव: औपनिवेशिक काल या कुछ दशक पूर्व तक धारा 377 (समलैंगिकता को अपराध मानना) या
वैवाहिक संबंधों में विषम-लैंगिक कठोरता को सामाजिक व्यवस्था के नाम पर 'न्यायपूर्ण' माना जाता था, किंतु मानवीय गरिमा और निजता की
आधुनिक समझ के आलोक में सर्वोच्च न्यायालय (नवतेज सिंह जौहर वाद, 2018) ने इसे गंभीर अन्याय माना।
प्रशासनिक एवं आपातकालीन संदर्भ ( COVID-19 का उदाहरण): वर्ष 2020 की महामारी के दौरान सख्त लॉकडाउन और केवल
ऑनलाइन माध्यम से शिक्षा/सेवा वितरण जीवन रक्षा हेतु 'न्यायपूर्ण' था; किंतु सामान्य स्थिति लौटने के बाद भी डिजिटल रूप से वंचित गरीबों
पर केवल ऑनलाइन प्रणाली थोपना 'डिजिटल बहिष्करण' और अन्याय बन जाता है।
पर्यावरण एवं विकास का बदलता संदर्भ: औद्योगिक क्रांति के दौर में कोयले का असीमित दोहन आर्थिक विकास के लिए उचित माना गया,
पर आज जलवायु संकट के दौर में वही कार्य भावी पीढ़ियों के साथ अन्याय ( Inter-generational Injustice) है।
Miscarriage of Justice) को रोकने के लिए विधायिका, न्यायपालिका और लोक सेवकों को लकीर का फकीर
निष्कर्ष: अतः न्याय-हत्या (
बनने के बजाय 'जीवंत संविधानवाद' (Living Constitutionalism) और निरंतर नैतिक आत्म-निरीक्षण अपनाना चाहिए।
मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।