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UPSC CSE Mains · GS Paper 4

2024 · Q3(c)

10 अंक150 शब्दअध्याय 1

प्रश्न

वर्तमान संदर्भ में निम्नलिखित उद्धरण आपके लिए क्या अर्थ रखता है? "कानून के अनुसार, यदि मनुष्य दूसरों के अधिकारों का उल्लंघन करता है तो वह दोषी है। नीतिशास्त्र के अनुसार, यदि वह केवल ऐसा करने के बारे में सोचता है तो वह दोषी है।" — इमैनुएल कांट ( Immanuel Kant)।

प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण

कांट का यह प्रसिद्ध उद्धरण कानून (Law) और नीतिशास्त्र
(Ethics) के दायरे के अंतर को स्पष्ट करता है। कानून केवल बाह्य दृश्य कृत्य (External Overt Act / Actus Reus) को दंडित कर सकता
है, जबकि नीतिशास्त्र व्यक्ति की आंतरिक मंशा ( Internal Intention / Goodwill) और विचारों की पवित्रता की मांग करता है।

मॉडल उत्तर

भूमिका: जर्मन दार्शनिक इमैनुएल कांट का यह कथन मानवीय आचरण के दो नियामकों—'विधि' ( Law) और 'नीतिशास्त्र' (Ethics)—के
अधिकार-क्षेत्र के मौलिक अंतर को दर्शाता है। जहाँ कानून मनुष्य के 'बाह्य कर्म' को नियंत्रित करता है, वहीं नीतिशास्त्र उसके 'आंतरिक विचार और
Goodwill)' को शुद्ध करता है।
सद्विच्छा (

मुख्य भाग: वर्तमान संदर्भ में कथन का अर्थ एवं महत्व:

कानून की बाह्य सीमा ( External Scope of Law): कानूनी व्यवस्था में अपराध सिद्ध करने के लिए बाह्य कृत्य (Actus Reus) और
साक्ष्य आवश्यक हैं। उदाहरणार्थ, यदि कोई अधिकारी रिश्वत लेने की योजना बनाता है किंतु पकड़े जाने के डर से रिश्वत नहीं लेता, तो वह कानून
की नज़र में निर्दोष है।
नीतिशास्त्र की आंतरिक गहराई ( Internal Purity of Ethics): नीतिशास्त्र में केवल बाह्य अनुपालन पर्याप्त नहीं है; यदि मन में दूसरों
के शोषण, भेदभाव या भ्रष्टाचार का विचार भी आता है, तो व्यक्ति नैतिक रूप से पतित हो जाता है। भारतीय दर्शन में भी 'मनसा, वाचा,
कर्मणा' (मन, वचन और कर्म की एकता) तथा बुद्ध के धम्मपद में 'मन को ही सभी कर्मों का मूल' माना गया है।
समकालीन प्रशासनिक एवं सामाजिक प्रासंगिकता: आज साइबर अपराध, कॉर्पोरेट धोखाधड़ी ( Tax Evasion via Legal
Loopholes) और कार्यस्थल पर लैंगिक पूर्वाग्रह पहले भ्रष्ट विचारों में ही जन्म लेते हैं। केवल कानून के डर से रुका हुआ अपराधी अवसर
मिलते ही अपराध कर बैठता है।

निष्कर्ष: इस प्रकार, कांट हमें सिखाते हैं कि एक न्यायपूर्ण समाज और भ्रष्टाचार-मुक्त प्रशासन के लिए केवल बाहरी कानूनी निगरानी ( CCTV या
दंड) पर्याप्त नहीं है, बल्कि विचारों के स्तर पर 'नैतिक आत्म-नियंत्रण' और अंतरात्मा की शुद्धि अनिवार्य है।

मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।