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UPSC CSE Mains · GS Paper 4

2023 · Q4(b)

10 अंक150 शब्दअध्याय 1

प्रश्न

उपयुक्त उदाहरणों के साथ ‘नैतिक अंतर्ज्ञान’ (Moral Intuition) और ‘नैतिक तर्क शक्ति’ (Moral Reasoning) में अंतर कीजिए।

प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण

नैतिक मनोविज्ञान में जोनाथन हैड्ट (Jonathan Haidt) और
डेनियल काह्नमैन (System 1 vs System 2 Thinking) ने बताया है कि मनुष्य दो प्रकार से नैतिक निर्णय लेता है—एक तत्काल अंतर्मन की
स्वतःस्फू र्त आवाज (Moral Intuition) से, और दूसरा तथ्यों, परिणामों व सिद्धांतों के सचेत विश्लेषण (Moral Reasoning) से।

मॉडल उत्तर

भूमिका: नैतिक निर्णय-निर्माण की प्रक्रिया में 'नैतिक अंतर्ज्ञान' और 'नैतिक तर्क शक्ति' मानवीय चेतना के दो पूरक तंत्र हैं—जिनमें प्रथम
तात्कालिक संवेदनशीलता से और द्वितीय तार्किक विश्लेषण से जुड़ा है।

मुख्य भाग: दोनों अवधारणाओं में प्रमुख अंतर:

आधार Moral Intuition)
नैतिक अंतर्ज्ञान ( नैतिक तर्क शक्ति ( Moral Reasoning)
अर्थ एवं गति बिना किसी सचेत सोच-विचार के किसी कार्य के सही या तथ्यों, नियमों, कारण-परिणाम और नैतिक सिद्धांतों के
Fast
गलत होने की त्वरित, स्वतःस्फू र्त आंतरिक अनुभूति ( आधार पर किया गया सचेत और चरणबद्ध विश्लेषण
& Automatic Gut Feeling)। (Slow & Deliberative Analysis)।
आधार अंतरात्मा, समानुभूति (Empathy) और पूर्व समाजीकरण वस्तुनिष्ठता (Objectivity), संवैधानिक मूल्यों और
के अवचेतन संस्कारों पर आधारित। तर्क शास्त्र पर आधारित।

सीमा ( Limitation) कभी-कभी इसमें व्यक्तिगत पूर्वाग्रह या भावनात्मक आवेग अत्यधिक तर्क कभी-कभी संवेदनहीनता या 'नियम-जड़ता'
शामिल हो सकते हैं। Red-tapism) को जन्म दे सकता है।
(

उदाहरण ( Example) सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को देखकर बिना सोचे तुरंत एक जिलाधिकारी द्वारा बाढ़ राहत के सीमित बजट को
उसकी मदद के लिए दौड़ पड़ना या किसी बच्चे पर हिंसा बाँटते समय सर्वाधिक प्रभावित गाँवों का डेटा देखकर
देखकर स्वतः क्रोध/पीड़ा होना। प्राथमिकता तय करना।

निष्कर्ष: एक श्रेष्ठ लोक सेवक के लिए दोनों का समन्वय आवश्यक है—'नैतिक अंतर्ज्ञान' उसे पीड़ित के प्रति त्वरित करुणा देता है, जबकि 'नैतिक
तर्क शक्ति' उसे अपने निर्णय को संविधान और विधि के अनुरूप न्यायसंगत बनाने की दिशा देती है।

मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।