2020 · Q5(b)
प्रश्न
“वर्तमान इंटरनेट विस्तार ने सांस्कृतिक मूल्यों का एक अलग समूह स्थापित किया है, जो अक्सर पारंपरिक मूल्यों के साथ संघर्ष में रहता है।” चर्चा कीजिए।
प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण
यह प्रश्न समाजीकरण की आधुनिक एजेंसी के रूप में 'इंटरनेट व
डिजिटल संस्कृ ति' और भारतीय पारंपरिक मूल्यों के बीच के अंतर्विरोध एवं संवाद का विश्लेषण मांगता है।
मॉडल उत्तर
भूमिका: इंटरनेट और स्मार्टफोन के सर्वव्यापी विस्तार ने एक नई 'डिजिटल संस्कृ ति' ( Cyber Culture) को जन्म दिया है, जिसने मूल्य-सृजन में
परिवार और समुदाय के पारंपरिक एकाधिकार को चुनौती देते हुए दोनों मूल्य-प्रणालियों के बीच गहरा द्वंद्व उत्पन्न किया है।
मुख्य भाग: इंटरनेट-जनित मूल्यों और पारंपरिक मूल्यों के बीच संघर्ष के प्रमुख बिंदु:
सामूहिकता बनाम अति-व्यक्तिवाद ( Collectivism vs Hyper-Individualism): पारंपरिक भारतीय मूल्य संयुक्त परिवार,
सामुदायिक एकजुटता और बड़ों के प्रति समर्पण पर बल देते हैं, जबकि इंटरनेट संस्कृ ति 'सेल्फी कल्चर', व्यक्तिगत स्वायत्तता और आभासी
अके लेपन ( Virtual Isolation) को बढ़ावा देती है।
संतोष और संयम बनाम त्वरित संतुष्टि ( Contentment vs Instant Gratification): पारंपरिक मूल्य 'धैर्य' और 'अपरिग्रह'
सिखाते हैं, जबकि ई-कॉमर्स, रील्स ( Reels) और सोशल मीडिया 'लाइक्स' की संस्कृ ति ने उपभोक्तावाद, दिखावे (FOMO) और त्वरित सुख
की भूख पैदा की है।
गोपनीयता एवं मर्यादा बनाम अति-प्रदर्शन ( Modesty vs Oversharing): निजी जीवन की पवित्रता के स्थान पर आज हर व्यक्तिगत
क्षण को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर मौद्रिक या लोकप्रियता लाभ लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है।
सकारात्मक संघर्ष (प्रगतिशील बदलाव): यह संघर्ष सदैव नकारात्मक नहीं है; इंटरनेट के लोकतांत्रिक और समतावादी मूल्यों ने जातिवाद,
पितृसत्ता और अंधविश्वास जैसे 'प्रतिगामी पारंपरिक मूल्यों' ( Regressive Traditional Values) को चुनौती देकर लैंगिक समानता और
मानवाधिकारों को भी सशक्त किया है।
निष्कर्ष: आवश्यकता इंटरनेट के आधुनिक मूल्यों (तार्किकता, वैश्विक जुड़ाव) और भारत के शाश्वत पारंपरिक मूल्यों (करुणा, पारिवारिक बंधन,
संयम) के बीच 'विवेकपूर्ण समन्वय' स्थापित करने की है।
UPSC CSE 2018 · Q4(b) · 10 अंक · 150 शब्द]
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