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UPSC CSE Mains · GS Paper 4

2019 · Q3(a)

10 अंक150 शब्दअध्याय 1

प्रश्न

‘संवैधानिक नैतिकता’ (Constitutional Morality) से क्या तात्पर्य है? कोई व्यक्ति संवैधानिक नैतिकता को किस प्रकार बनाए रखता है?

प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण

संवैधानिक नैतिकता के अर्थ और उसके व्यावहारिक पालन पर केंद्रित प्रश्न।

मॉडल उत्तर

भूमिका: 'संवैधानिक नैतिकता' का तात्पर्य संविधान के मूलभूत दर्शन और आदर्शों (प्रस्तावना, मूल अधिकार एवं मूल कर्तव्य) के प्रति गहरी
प्रतिबद्धता से है। यह व्यक्ति और राज्य से अपेक्षा करती है कि वे लोकप्रिय जनभावना ( Popular/Social Morality) के दबाव में आए बिना
संवैधानिक सर्वोच्चता और प्रक्रियात्मक मर्यादाओं का पालन करें।

मुख्य भाग: संवैधानिक नैतिकता को बनाए रखने के तरीके ( How to Uphold It):
सामाजिक कु प्रथाओं पर संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता देना: जब पारंपरिक सामाजिक नैतिकता (जैसे—जातिगत भेदभाव, लिंग
आधारित मंदिर प्रवेश निषेध या ऑनर किलिंग) मानवीय गरिमा और समता (अनुच्छेद 14–17) से टकराए, तब संविधान के पक्ष में खड़ा होना
(उदाहरण: सर्वोच्च न्यायालय का सबरीमाला एवं नवतेज जौहर निर्णय)।
संस्थागत संयम एवं प्रक्रिया का सम्मान ( Institutional Self-Restraint): सत्ता में बैठे व्यक्तियों द्वारा अपने अधिकार-क्षेत्र
(Separation of Powers) का अतिक्रमण न करना और विरोध/असहमति के शांतिपूर्ण अधिकार का सम्मान करना।
नागरिक कर्तव्यों का पालन: नागरिकों द्वारा हिंसा या अराजकता का सहारा लेने के बजाय संवैधानिक और लोकतांत्रिक माध्यमों से अपनी

मांगें रखना तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण व बंधुत्व (अनुच्छेद 51 ) को बढ़ावा देना।
प्रशासनिक निष्पक्षता: लोक सेवकों द्वारा धर्म, जाति या राजनीतिक दल के आधार पर भेदभाव किए बिना प्रत्येक नागरिक को समान सेवा
प्रदान करना।

निष्कर्ष: संवैधानिक नैतिकता भारत जैसे विविधतापूर्ण लोकतंत्र को बहुसंख्यकवाद और अराजकता से बचाने वाला सर्वोच्च नैतिक सुरक्षा कवच है।

मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।