2018 · Q4(b)
प्रश्न
कार्यों की नैतिकता के संबंध में, एक विचार यह है कि साधन ( Means) सर्वोपरि महत्व के हैं और दूसरा विचार यह है कि साध्य साधन को औचित्य प्रदान करता है (Ends justify the means)। आपके विचार में कौन-सा दृष्टिकोण अधिक उपयुक्त है? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।
प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण
यह मानकीय नीतिशास्त्र (Normative Ethics) की सबसे प्रसिद्ध
बहस है: कर्तव्यशास्त्र एवं गांधीवादी दर्शन ( Means are paramount) बनाम मैकियावेली और परिणामवाद (Ends justify the
means)। सिविल सेवा के संदर्भ में साधन की पवित्रता क्यों अधिक उपयुक्त है, यह सिद्ध करना है।
मॉडल उत्तर
भूमिका: मानवीय कृत्यों के नैतिक मूल्यांकन में 'साधन बनाम साध्य' ( Means vs Ends) का विवाद दो प्रमुख दार्शनिक धाराओं का प्रतिनिधित्व
करता है—प्रथम, इमैनुएल कांट, भगवद्गीता और महात्मा गांधी (जो साधन की पवित्रता को सर्वोपरि मानते हैं); और द्वितीय, मैकियावेली व
उपयोगितावादी (जो परिणाम या साध्य को ही अंतिम कसौटी मानते हैं)।
मुख्य भाग: दोनों दृष्टिकोणों की तुलना एवं अधिक उपयुक्त मत का औचित्य:
'साध्य साधन को उचित ठहराता है' की सीमाएँ: यद्यपि आपातकालीन परिस्थितियों (जैसे—राष्ट्रीय सुरक्षा या गुप्तचर अभियानों) में परिणाम
को प्राथमिकता दी जाती है, किंतु इसे सामान्य सिद्धांत बना लेने पर खतरनाक परिणाम होते हैं—जैसे अपराध नियंत्रण के नाम पर पुलिस द्वारा
'फर्जी मुठभेड़' (Fake Encounters) करना या आर्थिक विकास के नाम पर आदिवासियों का जबरन विस्थापन।
'साधन सर्वोपरि है' दृष्टिकोण अधिक उपयुक्त क्यों है?
1. गांधीजी का बीज-वृक्ष रूपक: गांधीजी ने 'हिंद स्वराज' में कहा था कि साधन बीज है और साध्य वृक्ष; बबूल का बीज बोकर आम का
फल नहीं पाया जा सकता। उदाहरणार्थ, चौरी-चौरा की हिंसा के बाद गांधीजी ने स्वराज्य जैसे महान साध्य के लिए भी असहयोग आंदोलन
वापस ले लिया।
2. कर्ता का नियंत्रण केवल साधन पर: गीता के निष्काम कर्मयोग के अनुसार मनुष्य का अधिकार केवल कर्म (साधन) पर है, परिणाम
(साध्य) अनेक बाह्य कारकों पर निर्भर करता है।
Due Process of Law
3. संवैधानिक शासन की नींव: लोकतंत्र में केवल 'न्याय' होना काफी नहीं है, बल्कि 'विधि की सम्यक प्रक्रिया' (
- साधन) का पालन होना ही नागरिकों का विश्वास बनाए रखता है।
निष्कर्ष: अतः सभ्य समाज और लोक प्रशासन में 'साधन की पवित्रता' ही अधिक उपयुक्त और टिकाऊ दृष्टिकोण है, क्योंकि अनैतिक साधनों से
प्राप्त किया गया शुभ साध्य भी अंततः व्यवस्था को भ्रष्ट और हिंसक बना देता है।
मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।