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UPSC CSE Mains · GS Paper 4

2017 · Q8(b)

10 अंक150 शब्दअध्याय 1

प्रश्न

“सामान्य रूप से साझा और व्यापक रूप से स्थापित नैतिक मूल्यों तथा दायित्वों के बिना न तो कानून, न लोकतांत्रिक सरकार और न ही बाज़ार अर्थव्यवस्था ठीक से कार्य कर सकती है।” इस कथन से आप क्या समझते हैं? समकालीन उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण

यह प्रश्न समाज, राज्य और बाजार में नीतिशास्त्र की अपरिहार्यता
(Indispensability of Shared Moral Values) को स्पष्ट करता है। कानून, लोकतंत्र और बाजार—तीनों ही बाहरी ढाँचे हैं, जो नागरिकों
और संस्थाओं के 'आंतरिक नैतिक विश्वास और साझा कर्तव्यों' की नींव पर ही टिके रह सकते हैं।

मॉडल उत्तर

भूमिका: यह कथन स्पष्ट करता है कि कानून, लोकतंत्र और बाज़ार अर्थव्यवस्था कोई स्वचालित मशीनें नहीं हैं; उनका सफल संचालन समाज में
गहराई से जड़ें जमा चुके 'साझा नैतिक मूल्यों' (जैसे—विश्वास, ईमानदारी, सहिष्णुता और कर्तव्य-बोध) के अदृश्य आधार पर ही निर्भर करता
है।

मुख्य भाग: समकालीन उदाहरणों सहित तीनों संस्थाओं का विश्लेषण:

1. कानून ( Law) का संचालन: राज्य हर नागरिक के पीछे एक पुलिसकर्मी खड़ा नहीं कर सकता। यदि समाज में कानून का पालन करने का
साझा नैतिक दायित्व न हो, तो न्याय व्यवस्था ध्वस्त हो जाएगी। उदाहरण: शराबबंदी या दहेज-रोधी कानून तब तक विफल रहते हैं जब तक
समाज स्वयं उन्हें नैतिक रूप से स्वीकार न करे।
2. लोकतांत्रिक सरकार ( Democratic Government): लोकतंत्र केवल 'बहुमत के मतदान' का नाम नहीं है, बल्कि यह सहिष्णुता,
असहमति के सम्मान और चुनावी शुचिता के साझा मूल्यों पर चलता है। उदाहरण: यदि मतदाता जाति/धन के लालच में वोट बेचने लगें और
राजनेता संवैधानिक मर्यादा तोड़कर दल-बदल ( Horse-trading) करें, तो लोकतंत्र भीड़तंत्र या धनतंत्र में बदल जाता है।
3. बाज़ार अर्थव्यवस्था ( Market Economy): एडम स्मिथ ('द थ्योरी ऑफ मोरल सेंटीमेंट्स') ने भी माना था कि बाज़ार केवल 'परस्पर
विश्वास और अनुबंधों की ईमानदारी' (Trust & Fair Play) पर टिकता है। उदाहरण: 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट, सत्यम घोटाला या
विजय माल्या/नीरव मोदी जैसे बैंकिंग डिफॉल्ट दिखाते हैं कि नैतिक मूल्यों के बिना बाज़ार अर्थव्यवस्था क्रोनी कैपिटलिज्म (Crony
Capitalism) का शिकार होकर ढह जाती है।
निष्कर्ष: अतः साझा नैतिक मूल्य वह 'सीमेंट' हैं जो विधिक, राजनीतिक और आर्थिक संस्थाओं को जोड़े रखते हैं; उनके बिना कोई भी आधुनिक
व्यवस्था टिकाऊ नहीं रह सकती।

मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।