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UPSC CSE Mains · GS Paper 4

2016 · Q1(a)

10 अंक150 शब्दअध्याय 1

प्रश्न

स्पष्ट कीजिए कि नीतिशास्त्र किस प्रकार सामाजिक और मानवीय कल्याण ( Social and Human Well-being) में योगदान देता है।

प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण

यह प्रश्न सीधे सिलेबस के उप-विषय 'मानवीय क्रियाकलापों में
नीतिशास्त्र के परिणाम' से जुड़ा है। इसे दो स्तरों—(1) मानवीय/व्यक्तिगत कल्याण और (2) सामाजिक कल्याण—में बाँटकर उदाहरणों सहित
लिखना है।

मॉडल उत्तर

भूमिका: नीतिशास्त्र का अंतिम उद्देश्य कोरा दार्शनिक चिंतन नहीं, बल्कि मनुष्य को पाशविक स्वार्थ से ऊपर उठाकर 'सर्वजन हिताय, सर्वजन
सुखाय' के माध्यम से व्यक्तिगत और सामाजिक कल्याण ( Well-being) को सुनिश्चित करना है।
मुख्य भाग:

(क) मानवीय (व्यक्तिगत) कल्याण में योगदान ( Human Well-being):
मानसिक शांति एवं अपराध-बोध से मुक्ति: नैतिक आचरण व्यक्ति को संज्ञानात्मक असंगति ( Cognitive Dissonance) और
अंतरात्मा के दंश से बचाकर स्थायी आंतरिक शांति देता है।
आत्म-साक्षात्कार एवं चरित्र उत्कर्ष: सत्यनिष्ठा और करुणा का पालन व्यक्ति को मास्लो ( Maslow) के पदानुक्रम के सर्वोच्च स्तर 'आत्म-
सिद्धि' (Self-Actualization) और अरस्तू के 'यूडिमोनिया' तक पहुँचाता है।
विश्वसनीयता और सम्मान: नैतिक व्यक्ति संकट के समय भी परिवार व समाज का भरोसा और सम्मान पाता है।

(ख) सामाजिक कल्याण में योगदान ( Social Well-being):
सामाजिक पूंजी ( Social Capital) और सहयोग: आपसी विश्वास और ईमानदारी से समाज में लेन-देन की लागत (Transaction
Cost) घटती है और सामूहिक प्रगति होती है।
कमजोर वर्गों की सुरक्षा एवं न्याय: समानुभूति और न्याय के मूल्य महिलाओं, दलितों, वृद्धों और दिव्यांगों को शोषण से बचाकर समावेशी
समाज बनाते हैं (जैसे—कै लाश सत्यार्थी का बचपन बचाओ आंदोलन)।
सतत विकास: पर्यावरणीय नैतिकता भावी पीढ़ियों के लिए संसाधनों को सुरक्षित रखती है।

निष्कर्ष: संक्षेप में, नीतिशास्त्र व्यक्ति के 'स्वार्थ' को 'परमार्थ' से जोड़कर एक ऐसा शांतिपूर्ण, न्यायपूर्ण और खुशहाल समाज निर्मित करता है जहाँ
प्रत्येक मनुष्य गरिमापूर्ण जीवन जी सके।

मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।