2017 · Q7(a)
प्रश्न
"आधुनिक समय में नैतिक मूल्यों का संकट अच्छे जीवन ( Good Life) की संकीर्ण धारणा से जुड़ा हुआ है।" विवेचना कीजिए।
प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण
प्राचीन दार्शनिकों (सुकरात, अरस्तू, बुद्ध, भारतीय पुरुषार्थ व्यवस्था) के
लिए 'अच्छा जीवन' ( Good Life) सद्गुण, ज्ञान, धर्म और समाज-कल्याण से जुड़ा था। परंतु आधुनिक उपभोक्तावादी युग में 'अच्छे जीवन' को
केवल 'अधिक पैसा, उपभोग और सत्ता' (Materialistic Hedonism) तक सीमित कर दिया गया है, जो आज के नैतिक संकट की जड़ है।
मॉडल उत्तर
भूमिका: प्रत्येक मनुष्य 'अच्छे जीवन' ( Good Life) की आकांक्षा रखता है, किंतु आधुनिक भौतिकवादी युग में 'अच्छे जीवन' की परिभाषा
सिमटकर केवल 'भौतिक संपन्नता, असीमित उपभोग और व्यक्तिगत सत्ता' ( Consumerism & Hedonism) तक संकीर्ण हो गई है,
जिसने समकालीन समाज में गंभीर नैतिक संकट उत्पन्न किया है।
मुख्य भाग: 'अच्छे जीवन' की संकीर्ण धारणा से नैतिक मूल्यों का संकट कैसे उत्पन्न हुआ?
सद्गुण से संपदा की ओर विस्थापन ( Shift from Virtue to Wealth): सुकरात और अरस्तू के लिए अच्छा जीवन 'सद्गुणी और आत्म-
परीक्षित जीवन' था, तथा भारतीय दर्शन में 'धर्म और मोक्ष' से नियंत्रित 'अर्थ और काम' (चतुर्वर्ग पुरुषार्थ) को आदर्श माना गया। आज 'धर्म/
नैतिकता' को हटाकर केवल 'अर्थ और काम' को ही जीवन का पर्याय मान लिया गया है।
भ्रष्टाचार और गलाकाट प्रतिस्पर्धा ( Cut-throat Competition): जब महंगी गाड़ियों, बड़े पदों और विलासिता को ही सफल जीवन का
पैमाना मान लिया जाता है, तब लोग टैक्स चोरी, मिलावट, कॉर्पोरेट धोखाधड़ी और प्रशासनिक भ्रष्टाचार में लिप्त हो जाते हैं।
मानवीय संबंधों का वस्तुकरण ( Commodification of Relations): इमैनुएल कांट के सिद्धांत के विपरीत, लोग परिवार, मित्रों और
सहकर्मियों को भी अपने करियर व स्वार्थ की सीढ़ी ( Means) की तरह इस्तेमाल करने लगे हैं, जिससे वृद्धाश्रमों की संख्या और तलाक/
अवसाद बढ़ रहे हैं।
पर्यावरणीय विनाश: असीमित उपभोग को ही खुशहाली मानने से प्रकृति का अंधाधुंध दोहन और जलवायु संकट पैदा हुआ है।
निष्कर्ष: इस नैतिक संकट से उबरने के लिए हमें 'अच्छे जीवन' की धारणा को पुनः व्यापक बनाना होगा—जहाँ भौतिक समृद्धि के साथ-साथ
'आंतरिक शांति, संतोष, सामाजिक करुणा और पर्यावरणीय सह-अस्तित्व' शामिल हों (भूटान के Gross National Happiness मॉडल की
भांति)।
मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।