LIVEUPSC CSE 2027 & BPSC • नोट्स • समसामयिकी • PYQ • Tests
UPSC CSE Mains · GS Paper 4

2016 · Q5

10 अंक150 शब्दअध्याय 1

प्रश्न

कानून और नीतिशास्त्र (Law and Ethics) मानव आचरण को नियंत्रित करने के दो उपकरण माने जाते हैं ताकि उसे सभ्य सामाजिक अस्तित्व के अनुकूल बनाया जा सके। (क) चर्चा कीजिए कि वे इस उद्देश्य को कैसे प्राप्त करते हैं। (ख) उदाहरण देते हुए दर्शाइए कि दोनों अपने दृष्टिकोण में किस प्रकार भिन्न हैं।

प्रश्न की मांग एवं दृष्टिकोण

यह प्रश्न कानून और नीतिशास्त्र के पूरक संबंध (कैसे दोनों मिलकर
समाज को सभ्य बनाते हैं) और उनके कार्य करने के तरीके के अंतर (बाह्य दंड बनाम आंतरिक अंतरात्मा) पर केंद्रित है।

मॉडल उत्तर

भूमिका: थॉमस हॉब्स के अनुसार, नियमों के अभाव में मानव जीवन 'एकाकी, पाशविक और अल्पायु' हो जाता है। कानून और नीतिशास्त्र वे दो
जुड़वां स्तंभ हैं जो मानवीय आचरण को नियंत्रित कर सभ्य सामाजिक अस्तित्व ( Civilized Social Existence) को संभव बनाते हैं।
मुख्य भाग:

( ) दोनों इस उद्देश्य को कैसे प्राप्त करते हैं?
कानून द्वारा: राज्य की संप्रभु शक्ति द्वारा स्पष्ट एवं लिखित नियम बनाकर, अपराधियों को दंडित कर (निवारक प्रभाव/ Deterrence)
और नागरिकों के मूलभूत अधिकारों की रक्षा कर बाहरी व्यवस्था ( Law & Order) बनाए रखी जाती है।
नीतिशास्त्र द्वारा: समाजीकरण, अंतरात्मा और मानवीय मूल्यों (करुणा, अहिंसा, ईमानदारी) के माध्यम से व्यक्ति को भीतर से प्रेरित किया
जाता है कि वह स्वेच्छा से दूसरों का अहित न करे। जहाँ कानून नहीं पहुँच पाता (जैसे बंद कमरे में व्यवहार), वहाँ नीतिशास्त्र आचरण को
सभ्य रखता है।

( ) दोनों के दृष्टिकोण ( Approaches) में अंतर:
बाह्य बाध्यता बनाम आंतरिक प्रेरणा: कानून बाह्य दंड और जुर्माने के भय से कार्य करता है, जबकि नीतिशास्त्र आंतरिक कर्तव्य-बोध और
सामाजिक स्वीकृति से कार्य करता है।
न्यूनतम मानक बनाम उच्चतम आदर्श (उदाहरण सहित): कानून केवल 'न्यूनतम मानक' तय करता है—जैसे सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति
को देखकर रुकना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है (जब तक आपने टक्कर न मारी हो), किंतु उसे अस्पताल पहुँचाकर जान बचाना ( Good
Samaritan) नीतिशास्त्र का उच्चतम आदर्श है। इसी प्रकार माता-पिता को वृद्धावस्था में केवल भरण-पोषण भत्ता देना कानून है
(Senior Citizens Act), पर उन्हें स्नेह और सम्मान देना नीतिशास्त्र है।

निष्कर्ष: कानून सभ्य समाज का 'कं काल' (Skeleton) है और नीतिशास्त्र उसकी 'आत्मा' (Soul); दोनों के समन्वय से ही न्यायपूर्ण समाज
टिकता है।

मॉडल उत्तर स्रोत PDF पर आधारित है; पठनीयता के लिए टंकण, विराम-चिह्न और स्पष्ट OCR त्रुटियों का संपादकीय परिष्कार किया गया है। प्रश्न क्रमांक/शब्द-सीमा सत्यापन के बाद प्रकाशित हैं।